विकसित भारत @2047: कृषि की भूमिका पर नीति आयोग की अहम रिपोर्ट : नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद की हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत 2047 तक एक विकसित देश बनने के अपने लक्ष्य, यानी “विकसित भारत @ 2047”, को मज़बूती से हासिल करने की दिशा में आग...

विकसित भारत @2047: कृषि की भूमिका पर नीति आयोग की अहम रिपोर्ट : नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद की हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत 2047 तक एक विकसित देश बनने के अपने लक्ष्य, यानी “विकसित भारत @ 2047”, को मज़बूती से हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस विज़न में कृषि क्षेत्र की भूमिका सबसे अहम मानी गई है।
प्रो. रमेश चंद के अनुसार, एक विकसित भारत का विज़न दो मुख्य स्तंभों पर आधारित है —
प्रति व्यक्ति आय को विकसित देशों के स्तर तक ले जाना और सबको साथ लेकर चलने वाली समावेशी ग्रोथ (सबका विकास) सुनिश्चित करना।
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि खेती इस बदलाव के केंद्र में होनी चाहिए, क्योंकि यह सेक्टर देश की कुल आय में लगभग 20 प्रतिशत योगदान देता है और 46 प्रतिशत वर्कफोर्स को रोज़गार देता है। खास बात यह है कि खेती में काम करने वाले लोगों में से लगभग दो-तिहाई महिलाएं हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2015-16 से 2024-25 के बीच भारत के कृषि और उससे जुड़े सेक्टर ने अब तक की सबसे तेज़ ग्रोथ दर्ज की है।
इस दौरान औसत सालाना ग्रोथ लगभग 4.45 प्रतिशत रही, जो न केवल भारत के इतिहास में सबसे ज़्यादा है बल्कि चीन समेत दूसरी बड़ी कृषि अर्थव्यवस्थाओं से भी बेहतर है।
एक अहम बात यह रही कि इस पूरे दौर में कृषि आय में एक भी साल नेगेटिव ग्रोथ नहीं देखी गई।
यहाँ तक कि Covid-19 महामारी के समय भी खेती ने मजबूती दिखाई, जो इस सेक्टर की स्थिरता और लचीलापन दर्शाता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि पशुधन, मछली पालन और फॉरेस्ट्री जैसी एग्री-अलाइड एक्टिविटीज़ ने पारंपरिक फसल खेती से बेहतर प्रदर्शन किया।
अकेले मछली पालन सेक्टर में सालाना करीब 9 प्रतिशत ग्रोथ दर्ज की गई
यह सेक्टर किसानों के लिए ज़्यादा इनकम और नए रोज़गार के मौके लेकर आया
फल, मसाले, चारा और दालें जैसे हाई-वैल्यू सेगमेंट की ग्रोथ अनाज की तुलना में कहीं ज़्यादा तेज़ रही।
यह बदलाव भारत की खेती में डाइवर्सिफिकेशन और बेहतर रिटर्न मॉडल की ओर इशारा करता है।
भारतीय कृषि का स्ट्रक्चर अब तेज़ी से बदल रहा है।
कुल कृषि उत्पादन में फसलों का हिस्सा घटा
पशुधन, बागवानी और मछली पालन का योगदान बढ़ा
इस बदलाव का सीधा असर किसानों की आय पर पड़ा है।
पिछले एक दशक में किसानों की औसत आय 100 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ी है।
इसके पीछे मुख्य कारण रहे:
बेहतर MSP और मार्केट प्राइस
बेहतर मार्केट एक्सेस
सरकार की लक्षित नीतियां और सुधार
सिंचाई कवरेज का विस्तार
फसल बीमा योजना का दायरा बढ़ाना
किसान क्रेडिट कार्ड से आसान लोन
एग्री-फाइनेंसिंग में बढ़ोतरी
e-NAM प्लेटफॉर्म से 1,500+ मंडियों को जोड़ना
दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक
चावल का सबसे बड़ा निर्यातक, के रूप में स्थापित कर लिया है, जो देश की कृषि क्षमता को ग्लोबल पहचान देता है।
फल, सब्ज़ियां, अंडे, मांस और ड्राय फ्रूट्स की खपत बढ़ी
चीनी की खपत में गिरावट, रिपोर्ट का अनुमान है कि खाने की कुल मांग हर साल करीब 3 प्रतिशत बढ़ेगी।
अगर मौजूदा ट्रेंड जारी रहते हैं, तो 2035 तक भारत के पास लगभग 20 प्रतिशत खाद्य सरप्लस हो सकता है, जो फूड सिक्योरिटी और एक्सपोर्ट दोनों के लिए अहम है।
प्रो. रमेश चंद के मुताबिक, पिछला दशक भारतीय कृषि के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ है। मजबूत ग्रोथ, स्थिरता, बढ़ती किसानों की आय और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी — ये सभी फैक्टर मिलकर “विकसित भारत @ 2047” के लक्ष्य को हासिल करने में कृषि को एक केंद्रीय स्तंभ बनाते हैं।
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