जब किसी गांव में बाढ़ आती है या सूखे की वजह से कुएं सूख जाते हैं, तो आमतौर पर राहत पहुंचाने के लिए पानी, राशन और अस्थायी आश्रय की व्यवस्था की जाती है। यह मदद संकट के समय बेहद जरूरी होती है, लेकिन अक्सर समस्या की जड़ तक नहीं पहुंचती।

जब किसी गांव में बाढ़ आती है या सूखे की वजह से कुएं सूख जाते हैं, तो आमतौर पर राहत पहुंचाने के लिए पानी, राशन और अस्थायी आश्रय की व्यवस्था की जाती है। यह मदद संकट के समय बेहद जरूरी होती है, लेकिन अक्सर समस्या की जड़ तक नहीं पहुंचती।
जिस जमीन पर आज बाढ़ आई है, वहां अगली बारिश में फिर पानी भर सकता है। जिस कुएं में आज पानी नहीं है, वह अगले साल भी सूख सकता है। ऐसे में सवाल सिर्फ राहत पहुंचाने का नहीं, बल्कि जमीन, पानी और खेती को इस तरह मजबूत बनाने का है कि समुदाय अगली आपदा का सामना बेहतर तरीके से कर सके।
यहीं permaculture यानी प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर खेती और जीवन-व्यवस्था विकसित करने की अवधारणा महत्वपूर्ण हो जाती है।
Permaculture शब्द मूल रूप से “permanent agriculture” से बना है, लेकिन समय के साथ इसका अर्थ व्यापक होकर एक स्थायी जीवन-पद्धति तक पहुंच गया है।
इसका उद्देश्य खेती, घर और समुदायों को इस तरह डिजाइन करना है कि वे प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करें और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के बजाय उसके साथ मिलकर काम करें।
इसमें मिट्टी की सेहत सुधारना, बारिश के पानी को रोकना, जैव विविधता बढ़ाना और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार फसलें उगाना जैसे तरीके शामिल हो सकते हैं।
इस नजरिए से permaculture सिर्फ खेती की तकनीक नहीं रह जाती। यह समुदायों को खाद्य सुरक्षा, पानी की उपलब्धता और टिकाऊ आजीविका के लिए अधिक आत्मनिर्भर बनाने का माध्यम बन सकती है।
बेंगलुरु स्थित The Art of Living के एक उदाहरण में करीब सात एकड़ की बंजर और पथरीली जमीन को कुछ ही महीनों में उत्पादक फार्म में बदला गया।
इसके लिए raised beds, rainwater swales और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार सावधानीपूर्वक पौधारोपण जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया गया।
ऐसे मॉडल का उद्देश्य केवल एक खेत में उत्पादन बढ़ाना नहीं है। इसका बड़ा लक्ष्य यह दिखाना है कि सही तकनीक और स्थानीय ज्ञान की मदद से कमजोर जमीन को भी दोबारा उत्पादक बनाया जा सकता है।
किसी भी समुदाय की मजबूती में भोजन की उपलब्धता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
Permaculture में स्थानीय जमीन और जलवायु के अनुसार अलग-अलग प्रकार की पौष्टिक फसलें उगाने पर जोर दिया जाता है। इससे किसान किसी एक फसल या बाहरी सप्लाई चेन पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहते।
अगर कोई किसान हर साल एक ही फसल उगाता है और उसी से अपनी पूरी आय की उम्मीद करता है, तो फसल खराब होने पर उसकी आर्थिक स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है।
इसके मुकाबले विविध खेती किसानों को कुछ हद तक जोखिम से बचा सकती है।
The Art of Living के अनुसार, उसके farming programmes के माध्यम से 30 लाख से अधिक भारतीय किसानों ने मिट्टी के साथ बेहतर तरीके से काम करने, उसकी उत्पादकता बनाए रखने और प्राकृतिक संसाधनों को बचाने से जुड़े तरीकों को सीखा है।
सूखा और बाढ़ अक्सर पानी से जुड़ी दो अलग-अलग समस्याएं लगती हैं, लेकिन दोनों के पीछे पानी के प्रबंधन की बड़ी भूमिका हो सकती है।
Permaculture में बारिश के पानी को जमीन पर रोकने, मिट्टी में नमी बनाए रखने और पानी के बहाव को कम करने पर ध्यान दिया जाता है।
Rainwater harvesting, swales और बेहतर soil management जैसे छोटे स्तर के उपाय बारिश के पानी को तुरंत बह जाने से रोक सकते हैं।
इसका फायदा यह है कि बारिश के दौरान पानी का बेहतर इस्तेमाल हो सकता है और सूखे के समय मिट्टी में मौजूद नमी लंबे समय तक मदद कर सकती है।
टिकाऊ खेती का एक महत्वपूर्ण पहलू किसान की लागत कम करना भी है।
कई किसान रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर बड़ी रकम खर्च करते हैं। अगर खेती से पर्याप्त आमदनी नहीं होती, तो उन्हें कर्ज लेना पड़ सकता है।
Dedicated permaculture programmes के जरिए 2,000 से अधिक परिवारों को सीधे लाभ मिलने का दावा किया गया है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य खेती की लागत कम करने और किसानों को अधिक टिकाऊ आजीविका की ओर बढ़ने में मदद करना है।
कुछ किसान The Art of Living के Kisan Manch platform के माध्यम से अपनी उपज सीधे बेचते हैं। इससे उन्हें बिचौलियों पर निर्भरता कम करने और अपनी उपज के लिए बेहतर कीमत हासिल करने में मदद मिल सकती है।
इस तरह खेती सिर्फ उत्पादन का जरिया नहीं रहती, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता का माध्यम भी बन सकती है।
बदलता मौसम किसानों के लिए नई चुनौतियां पैदा कर रहा है। अनियमित बारिश, लंबे सूखे, तेज गर्मी और अचानक आने वाली भारी बारिश खेती को प्रभावित कर सकती है।
ऐसे माहौल में स्वस्थ मिट्टी, जैव विविधता और मजबूत स्थानीय ecosystem किसी समुदाय की resilience बढ़ा सकते हैं।
अगर मिट्टी पानी को बेहतर तरीके से सोखती और रोकती है, तो भारी बारिश का असर कम हो सकता है। वहीं, मिट्टी में पर्याप्त organic matter और नमी होने से सूखे के दौरान फसलों को कुछ अतिरिक्त सहारा मिल सकता है।
इसलिए permaculture का उद्देश्य सिर्फ आज की फसल बचाना नहीं, बल्कि जमीन को आने वाले वर्षों के लिए मजबूत बनाना भी है।
मानवीय सहायता का पहला उद्देश्य संकट में फंसे लोगों की तत्काल मदद करना होता है। लेकिन लंबे समय तक किसी समुदाय को मजबूत बनाने के लिए केवल राहत पर्याप्त नहीं होती।
यहीं permaculture एक अलग भूमिका निभा सकती है।
राहत सामग्री किसी संकट के दौरान मदद करती है, लेकिन खेती, पानी और मिट्टी के प्रबंधन का ज्ञान समुदाय के पास लंबे समय तक रह सकता है।
इससे लोग केवल मदद पाने वाले नहीं रहते। वे अपनी जमीन को सुधारने, भोजन उगाने और अपनी आजीविका को मजबूत करने की क्षमता विकसित कर सकते हैं।
यही बदलाव relief से resilience की ओर जाने का रास्ता बनाता है।
Gurudev Sri Sri Ravi Shankar, जो The Art of Living के संस्थापक हैं, पृथ्वी और मानव जीवन को एक-दूसरे से जुड़ी व्यवस्था के रूप में देखते हैं।
उनका जोर इस बात पर रहा है कि मानव जीवन की गुणवत्ता प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण की सेहत से अलग नहीं की जा सकती।
उनके अनुसार, कृषि मानव अस्तित्व की बुनियाद है, लेकिन अगर खेती का तरीका ही टिकाऊ नहीं रहेगा तो लंबे समय तक समाज और अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखना मुश्किल होगा।
इसी सोच के तहत permaculture को भविष्य के लिए एक उपयोगी जीवन-कौशल के रूप में भी देखा जाता है।
Permaculture और sustainability पर चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए The Art of Living ने 22 और 23 अगस्त को अपना पहला National Conference on Permaculture and Sustainability आयोजित करने की योजना बनाई है।
इस सम्मेलन का फोकस केवल व्याख्यानों तक सीमित नहीं है। इसमें practical और hands-on learning sessions के जरिए लोगों को ऐसे तरीकों से परिचित कराने पर जोर है, जिन्हें जमीन पर लागू किया जा सके।
इस तरह के आयोजन permaculture को केवल एक farming concept के बजाय व्यापक sustainability movement के रूप में समझने का अवसर देते हैं।
किसी बाढ़ या सूखे के बाद राहत पहुंचाना जरूरी है। लेकिन असली बदलाव तब आता है जब समुदाय अगली आपदा के लिए पहले से मजबूत हो।
Permaculture इसी सोच को आगे बढ़ाती है।
स्वस्थ मिट्टी बेहतर फसल की नींव बनती है। बेहतर पानी प्रबंधन खेती को सूखे और भारी बारिश के खिलाफ मजबूत कर सकता है। विविध खेती food security बढ़ा सकती है और कम लागत वाली farming किसानों की आर्थिक स्थिति सुधार सकती है।
इसलिए permaculture को सिर्फ एक कृषि तकनीक के रूप में देखना इसकी भूमिका को सीमित करना होगा।
यह food, water, livelihood और climate resilience को एक साथ जोड़ने वाला मॉडल हो सकता है।
मानवीय सहायता का उद्देश्य केवल लोगों को संकट से निकालना नहीं होना चाहिए। लंबे समय में लक्ष्य यह होना चाहिए कि लोग अपनी जमीन, संसाधनों और आजीविका को खुद मजबूत कर सकें।
यही बदलाव राहत से आगे बढ़कर सम्मान, आत्मनिर्भरता और resilience की ओर ले जाता है।