NPCI का नया UPI MDR नियम 15 अक्टूबर से लागू होगा। जानें किन लेनदेन पर शुल्क लगेगा, किसे मिलेगी छूट और Netflix-SIP पर क्या होगा असर।

15 अक्टूबर से नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और सरकार के नए फ्रेमवर्क के तहत कुछ चुनिंदा हाई-वैल्यू पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने जा रहा है। यह शुल्क 2,000 रुपये से ज्यादा के लेनदेन पर लगेगा, जबकि रिकरिंग मैंडेट्स और रोजमर्रा के ट्रांसफर को इससे पूरी तरह बाहर रखा गया है।
नए नियम के तहत 2,000 रुपये से ज्यादा के नियमित योग्य मर्चेंट लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगेगा, जो 75,000 रुपये या उससे ज्यादा के लेनदेन पर अधिकतम 300 रुपये तक सीमित रहेगा। हालांकि पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांसफर, यानी दोस्तों-परिवार के बीच पैसों का लेनदेन, राशि चाहे जितनी भी हो, पूरी तरह मुफ्त बना रहेगा। इसके अलावा 2,000 रुपये तक के छोटे P2M लेनदेन पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा, जो कुल यूपीआई वॉल्यूम का 95 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा हैं।
यह जानना जरूरी है कि MDR एक ऐसा शुल्क है जो मर्चेंट बैंकों और पेमेंट प्रोसेसर्स (जैसे PhonePe या Google Pay) को चुकाते हैं, न कि यह ग्राहकों से चेकआउट के समय सीधे वसूला जाने वाला कोई अतिरिक्त शुल्क है। हालांकि अंतिम रूप से ग्राहक पर इसका असर मर्चेंट की प्राइसिंग पॉलिसी पर निर्भर करेगा। NPCI ने साफ किया है कि मर्चेंट्स को यह शुल्क खुद वहन करना होगा और वे इसे अलग से ग्राहकों से वसूल नहीं कर सकते, यानी यूपीआई से भुगतान करने वाले ग्राहकों को किसी भी तरह के अतिरिक्त शुल्क का सामना नहीं करना पड़ेगा।
नए फ्रेमवर्क में छोटे व्यापारियों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा का भी प्रावधान किया गया है। जो व्यापारी यूपीआई क्यूआर कोड के जरिए हर महीने 1 लाख रुपये तक की राशि प्राप्त करते हैं, वे इस MDR से पूरी तरह मुक्त रहेंगे। इसके अलावा सरकार ने छोटे व्यापारियों की मदद और टियर-3 से टियर-6 शहरों, जिसमें पूर्वोत्तर राज्य, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भी शामिल हैं, में डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए एक अलग फंड बनाने का भी प्रस्ताव दिया है। यह फंड टियर-1 और टियर-2 शहरों में सरकार की अधिसूचित योजनाओं को भी सहयोग देगा।
बीमा से जुड़े भुगतानों को लेकर एक खास व्यवस्था रखी गई है। 2,000 रुपये से ज्यादा के निर्दिष्ट इंश्योरेंस पेमेंट पर प्रतिशत के आधार पर नहीं, बल्कि प्रति लेनदेन सिर्फ 5 रुपये का फ्लैट MDR लगेगा, ताकि बड़ी वार्षिक पॉलिसियों पर प्रतिशत के हिसाब से बड़ी कटौती न हो।
वहीं म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉकब्रोकर्स और वॉलेट टॉप-अप जैसे वन-टाइम कैपिटल-मार्केट पेमेंट्स पर रियायती 0.02 प्रतिशत MDR लगेगा, जो अधिकतम 300 रुपये तक सीमित रहेगा।
यूपीआई मैंडेट्स या ऑटोपे के जरिए होने वाले रिकरिंग पेमेंट्स, जिनमें Netflix जैसी स्ट्रीमिंग सर्विसेज, बिजली-यूटिलिटी बिल, मोबाइल रिचार्ज, इंश्योरेंस ऑटो-डेबिट और म्यूचुअल फंड SIP शामिल हैं, इस निर्धारित MDR के दायरे में नहीं आएंगे।
यहां एक अहम बात समझनी जरूरी है, यूपीआई ऑटोपे के जरिए होने वाली ऑटोमेटेड मासिक SIP पूरी तरह इस शुल्क से मुक्त रहेगी, जबकि म्यूचुअल फंड यूनिट्स के लिए किया गया कोई नया, एक बार का मैनुअल पेमेंट कैपिटल-मार्केट की 0.02 प्रतिशत वाली संरचना के दायरे में आएगा। इसी तरह OTT और फोन बिल के लिए मैंडेट्स के जरिए किए जाने वाले सब्सक्रिप्शन ऑटो-पे भी बिना किसी अतिरिक्त NPCI-निर्धारित संरचनात्मक शुल्क के जारी रहेंगे।
यह नया फ्रेमवर्क 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगा, जिससे एक्वायरिंग बैंकों, पेमेंट एग्रीगेटर्स, फिनटेक ऐप्स और कॉर्पोरेट अकाउंटिंग प्लेटफॉर्म्स को अपने सॉफ्टवेयर सिस्टम और बिलिंग को अपडेट करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। NPCI के मुताबिक यूपीआई ऐप प्रोवाइडर्स को ग्राहकों से यूपीआई लेनदेन पर प्लेटफॉर्म फीस या किसी भी अन्य तरह का शुल्क लेने से भी रोका गया है। बताया जा रहा है कि इस विस्तृत फ्रेमवर्क को भारतीय रिजर्व बैंक के साथ मिलकर अगले तीन महीनों में अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।
बैंक, साथ ही PhonePe, Google Pay और Paytm जैसे यूपीआई पेमेंट ऐप्स, इस नए MDR व्यवस्था के सबसे बड़े लाभार्थियों में शामिल माने जा रहे हैं, क्योंकि यह शुल्क पूरी पेमेंट चेन में शामिल सभी भागीदारों के बीच बांटा जाएगा। इसमें ग्राहक का खाता रखने वाला इश्यूइंग या रेमिटर बैंक, मर्चेंट को ऑनबोर्ड करने वाला एक्वायरिंग बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर बैंक और यूपीआई ऐप शामिल हैं। इंडस्ट्री एनालिस्ट्स का मानना है कि यह फ्रेमवर्क बैंकों और थर्ड-पार्टी ऐप प्रोवाइडर्स के लिए रेवेन्यू के जरिए को औपचारिक रूप देता है, बिना मुफ्त पीयर-टू-पीयर अडॉप्शन या माइक्रो-रिटेल पेमेंट्स को प्रभावित किए।
गौरतलब है कि 2020 में सरकार ने यूपीआई को पूरी तरह मुफ्त कर दिया था, और यह नया MDR उस फैसले के बाद यूपीआई पर लगाया जाने वाला पहला शुल्क है। ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनके रिकरिंग मैंडेट्स यूपीआई ऑटोपे के जरिए सही तरीके से रजिस्टर्ड हों, ताकि उन्हें छूट का दर्जा मिलता रहे, क्योंकि एक बार का मैनुअल चेकआउट व्यवहार संरचनात्मक रूप से ऑटोमेटेड रिकरिंग व्यवस्था से अलग है।
1. UPI पर नया MDR नियम कब से लागू होगा?
यह नया नियम 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा।
2. किन लेनदेन पर MDR लगेगा?
2,000 रुपये से ज्यादा के P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगेगा, जो अधिकतम 300 रुपये तक सीमित रहेगा।
3. क्या दोस्तों या परिवार को पैसे भेजने पर कोई शुल्क लगेगा?
नहीं, P2P यानी पर्सन-टू-पर्सन ट्रांसफर राशि चाहे जितनी भी हो, पूरी तरह मुफ्त रहेगा।
4. क्या Netflix सब्सक्रिप्शन या SIP ऑटोपे पर यह शुल्क लगेगा?
नहीं, यूपीआई मैंडेट्स या ऑटोपे के जरिए होने वाले सभी रिकरिंग पेमेंट्स, जैसे Netflix, बिजली बिल और SIP, इस MDR से मुक्त रहेंगे।
5. क्या यह शुल्क सीधे ग्राहकों से वसूला जाएगा?
नहीं, यह शुल्क मर्चेंट्स को बैंकों और पेमेंट प्रोसेसर्स को चुकाना होगा। NPCI के मुताबिक मर्चेंट्स इसे अलग से ग्राहकों से नहीं वसूल सकते।