टाटा संस बोर्ड ने N चंद्रशेखरन को चेयरमैन पद पर फिर नियुक्त किया, जानें RBI के फैसले, नोएल टाटा के विरोध और शेयर बाजार पर असर की पूरी डिटेल।

टाटा संस ने एन. चंद्रशेखरन को एक बार फिर पांच साल के लिए एग्जीक्यूटिव चेयरमैन नियुक्त किया है, जो उनके इस्तीफा न लेने के पहले के फैसले को पूरी तरह पलटता है। यह फैसला 17 सितंबर 2026 को हुई टाटा संस की बोर्ड बैठक में लिया गया, जब बोर्ड ने चंद्रशेखरन से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने का अनुरोध किया।
टाटा संस की ओर से जारी बयान के मुताबिक बोर्ड के अनुरोध के बाद चंद्रशेखरन अपने पहले के फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए राजी हो गए। इसके बाद बोर्ड ने बहुमत के आधार पर उन्हें मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद अगले पांच साल के लिए एग्जीक्यूटिव चेयरमैन नियुक्त करने का प्रस्ताव पारित किया। चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म होना तय है। वे 2017 से टाटा संस के चेयरमैन के तौर पर काम कर रहे हैं और फिलहाल अपने दूसरे पांच साल के कार्यकाल में हैं। यह उनका अब तीसरा कार्यकाल होगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी ने औपचारिक तौर पर 63 वर्षीय चंद्रशेखरन से अगस्त में बोर्ड को बताए गए अपने फैसले पर दोबारा विचार करने का अनुरोध किया। गौरतलब है कि यह पहला फैसला रिजर्व बैंक के हालिया आदेश से पहले और कंपनी के रेगुलेटरी रास्ते को लेकर अलग परिस्थितियों में लिया गया था।
इस पूरे फैसले में एक अहम पहलू यह भी है कि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के खिलाफ वोट डाला। टाटा ट्रस्ट्स और उससे संबद्ध ट्रस्ट मिलकर टाटा संस में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं। हालांकि इसके बावजूद यह प्रस्ताव बहुमत के आधार पर पारित हो गया। रिपोर्ट्स बताती हैं कि नोएल टाटा कम से कम फरवरी से ही टाटा संस की लिस्टिंग का विरोध करते आ रहे हैं, और यह शर्त कथित तौर पर उनके पहले चंद्रशेखरन के पिछले कार्यकाल विस्तार का समर्थन करने की शर्तों में भी शामिल थी। इसके उलट टाटा संस में करीब 18 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला शापूरजी पालोनजी ग्रुप, जिसकी स्थापना नोएल टाटा के ससुर ने की थी, लंबे समय से टाटा संस की लिस्टिंग के पक्ष में रहा है।
चंद्रशेखरन का यह नया कार्यकाल उनके तीसरे कार्यकाल के लिए दावेदारी न करने की घोषणा के करीब एक महीने बाद आया है। इस फैसले ने टाटा संस में उत्तराधिकार को लेकर कई चर्चाओं को जन्म दिया था, और कंपनी फरवरी 2027 के बाद नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी में जुट गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक चंद्रशेखरन ने खुद बताया था कि फरवरी की बोर्ड बैठक के दौरान टाटा संस के एक बोर्ड सदस्य ने उनके पांच साल के कार्यकाल विस्तार का समर्थन नहीं किया था, जबकि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने बोर्ड बैठक से पहले सर्वसम्मति से इस विस्तार की सिफारिश की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि करीब छह महीने तक इस मामले पर कोई हल नहीं निकल पाया, जबकि ऐसे समय में जब कई रणनीतिक प्रोजेक्ट्स अहम मोड़ पर हैं, नेतृत्व को लेकर स्पष्टता की जरूरत थी।
बोर्ड का यह ताजा फैसला ऐसे समय पर आया है जब टाटा संस भारतीय रिजर्व बैंक से जुड़े एक अहम रेगुलेटरी घटनाक्रम से गुजर रही है। 11 सितंबर को RBI ने टाटा संस के उस आवेदन को खारिज कर दिया था, जिसमें कंपनी ने कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के तौर पर अपना पंजीकरण स्वेच्छा से समर्पण करने की मांग की थी। इस फैसले का मतलब है कि टाटा संस अपर-लेयर एनबीएफसी पर लागू होने वाले रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के दायरे में ही बनी रहेगी, जिसमें लिस्टिंग से जुड़ी अनिवार्यताएं भी शामिल हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक टाटा संस ने अपने कर्ज को कम करने और रेगुलेटरी स्टेटस बदलने के लिए 21,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज चुकाने जैसे कई कदम उठाए थे, और इसी आधार पर डीरजिस्ट्रेशन की मांग की गई थी। हालांकि RBI के इस फैसले ने टाटा संस की संभावित सार्वजनिक लिस्टिंग के लंबे समय से चले आ रहे सवाल को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। बोर्ड सदस्यों का मानना है कि किसी भी संभावित लिस्टिंग प्रक्रिया से पहले नेतृत्व में निरंतरता संभावित निवेशकों को भरोसा दिलाने में मदद करेगी, क्योंकि जब भी कोई कंपनी आईपीओ की प्रक्रिया शुरू करती है, निवेशक आमतौर पर मैनेजमेंट की निरंतरता को लेकर आश्वासन चाहते हैं।
चंद्रशेखरन ने 2017 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर रहने के बाद टाटा संस की कमान संभाली थी। उनके नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एविएशन और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी को काफी बढ़ाया है। उनका यह नया कार्यकाल ऐसे समय शुरू हो रहा है जब टाटा संस के सामने RBI की रेगुलेटरी अनिवार्यताओं का जवाब देने और होल्डिंग कंपनी के भविष्य के ढांचे को लेकर कई बड़े रणनीतिक और रेगुलेटरी सवाल खड़े हैं।
गुरुवार को चंद्रशेखरन को दोबारा पांच साल का कार्यकाल मिलने की खबरें सामने आते ही टाटा ग्रुप की कई कंपनियों के शेयरों में तेजी देखी गई। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान टाटा के बड़े शेयरों में बढ़त दर्ज हुई, जिनमें से कुछ शेयर 5 प्रतिशत तक चढ़े, हालांकि दिन भर अलग-अलग शेयरों के प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला। रिपोर्ट्स के मुताबिक टाटा केमिकल्स, टाटा इन्वेस्टमेंट, TCS और टाटा टेक जैसे शेयरों में 13 प्रतिशत तक की तेजी भी दर्ज की गई।
यह पुनर्नियुक्ति फिलहाल टाटा संस के नेतृत्व को लेकर बनी अनिश्चितता को खत्म करती है, हालांकि कंपनी के रेगुलेटरी और लिस्टिंग से जुड़े मुद्दे अभी भी चर्चा में बने हुए हैं।