Avenue Supermarts ने DMart Ready की पैरेंट कंपनी Avenue E-Commerce में ₹500 करोड़ तक अतिरिक्त निवेश मंजूर किया है। जानें रेवेन्यू, घाटा और 11 शहरों की नई रणनीति।

DMart Ready News: Avenue Supermarts ने अपने ऑनलाइन ग्रॉसरी बिजनेस को मजबूत करने के लिए बड़ा निवेश करने का फैसला किया है। DMart की ऑनलाइन ग्रॉसरी सब्सिडियरी Avenue E-Commerce में कंपनी ने ₹500 करोड़ तक अतिरिक्त पूंजी निवेश को मंजूरी दी है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब DMart Ready का रेवेन्यू तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन ऑनलाइन बिजनेस अभी भी घाटे में है। कंपनी की Annual General Meeting (AGM) में इस अतिरिक्त निवेश को मंजूरी दी गई।
नए निवेश के बाद Avenue E-Commerce में कंपनी का कुल पूंजी निवेश करीब ₹2,000 करोड़ तक पहुंच सकता है। इसमें वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान किया गया ₹350 करोड़ का निवेश भी शामिल है।
Avenue E-Commerce, DMart Ready के ऑनलाइन ग्रॉसरी ऑपरेशन को संभालती है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी के रेवेन्यू में अच्छी बढ़ोतरी हुई।
FY26 में Avenue E-Commerce का रेवेन्यू 17 फीसदी बढ़कर ₹4,094 करोड़ हो गया। इससे पिछले वित्त वर्ष यानी FY25 में कंपनी का रेवेन्यू ₹3,502 करोड़ था।
रेवेन्यू में करीब ₹592 करोड़ की बढ़ोतरी बताती है कि DMart Ready के ऑनलाइन कारोबार में ग्राहक मांग और बिक्री का आधार मजबूत हुआ है।
लेकिन बढ़ती बिक्री अभी मुनाफे में तब्दील नहीं हो पाई है।
रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद Avenue E-Commerce का घाटा FY26 में और बढ़ गया।
कंपनी का घाटा FY25 के ₹247 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹307 करोड़ हो गया। यानी एक साल में घाटा करीब ₹60 करोड़ बढ़ा।
इससे साफ है कि DMart Ready के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ बिक्री बढ़ाना नहीं, बल्कि उस बिक्री को टिकाऊ मुनाफे में बदलना है।
ऑनलाइन ग्रॉसरी कारोबार में डिलीवरी, टेक्नोलॉजी, ऑर्डर प्रोसेसिंग और फुलफिलमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे खर्च अहम होते हैं। इन लागतों को नियंत्रित करना किसी भी ऑनलाइन ग्रॉसरी प्लेटफॉर्म के लिए प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
Avenue Supermarts ने अपने ऑनलाइन बिजनेस की विस्तार रणनीति में बदलाव किया है। कंपनी अब देशभर में तेजी से विस्तार करने के बजाय 11 प्रमुख शहरों पर ज्यादा ध्यान देने की योजना बना रही है।
कंपनी का मानना है कि DMart Ready के ऑनलाइन कारोबार का बड़ा हिस्सा इन्हीं चुनिंदा बाजारों से आता है। इसलिए इन शहरों में ग्राहक आधार, ऑर्डर वॉल्यूम और ऑपरेशनल क्षमता को मजबूत करना कंपनी की प्राथमिकता होगी।
कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO Anshul Asawa के अनुसार, 11 शहरों पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला रणनीतिक रूप से लिया गया है। लक्ष्य इन बाजारों में ऐसा ई-कॉमर्स मॉडल तैयार करना है जो लंबे समय में टिकाऊ और लाभदायक हो।
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान DMart Ready ने अपनी होम डिलीवरी सर्विस का विस्तार करते हुए 18 शहरों तक पहुंच बनाई थी।
कंपनी ने इस दौरान 8 नए फुलफिलमेंट सेंटर भी जोड़े। इसके अलावा टेक्नोलॉजी, ग्राहक इंटरफेस और डिलीवरी क्षमता को बेहतर बनाने के लिए निवेश किया गया।
हालांकि, अब कंपनी की रणनीति ज्यादा से ज्यादा शहरों में पहुंच बनाने के बजाय मौजूदा चुनिंदा बाजारों में कारोबार को मजबूत करने की है।
Avenue Supermarts की ओर से ₹500 करोड़ तक का अतिरिक्त निवेश यह संकेत देता है कि कंपनी ऑनलाइन ग्रॉसरी बिजनेस को अपनी लंबी अवधि की रणनीति में महत्वपूर्ण मानती है।
हालांकि DMart Ready अभी घाटे में है, लेकिन बढ़ता रेवेन्यू कंपनी को इस कारोबार में भविष्य की संभावनाएं दिखाता है। अतिरिक्त पूंजी का इस्तेमाल कारोबार की तकनीकी और ऑपरेशनल क्षमताओं को मजबूत करने तथा चुनिंदा शहरों में विस्तार को समर्थन देने के लिए किया जा सकता है।
कंपनी के लिए अब चुनौती यह होगी कि अतिरिक्त निवेश और बढ़ती बिक्री का इस्तेमाल करके घाटे को कम किया जाए और अंततः कारोबार को मुनाफे में लाया जाए।
DMart Ready के आंकड़े एक महत्वपूर्ण तस्वीर दिखाते हैं। एक तरफ कंपनी का रेवेन्यू 17 फीसदी बढ़ा है, दूसरी तरफ घाटा भी ₹60 करोड़ बढ़ गया।
इसका अर्थ है कि ग्रोथ अभी पर्याप्त नहीं है। कंपनी को ऑर्डर बढ़ाने के साथ-साथ प्रति ऑर्डर लागत, डिलीवरी खर्च और फुलफिलमेंट से जुड़े खर्चों को बेहतर तरीके से नियंत्रित करना होगा।
11 शहरों पर फोकस इसी दिशा में एक रणनीतिक बदलाव है। कम लेकिन मजबूत बाजारों में बेहतर ऑपरेशनल एफिशिएंसी हासिल करके कंपनी अपने ऑनलाइन कारोबार की यूनिट इकनॉमिक्स सुधारने की कोशिश कर सकती है।
Avenue Supermarts के लिए अगला बड़ा लक्ष्य ऑनलाइन ग्रॉसरी कारोबार में सस्टेनेबल ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करना होगा।
कंपनी ने तेजी से शहरों की संख्या बढ़ाने के बजाय उन बाजारों पर ध्यान देने का फैसला किया है जहां DMart Ready पहले से मजबूत मौजूदगी रखता है। ₹500 करोड़ तक का नया निवेश इस रणनीति को वित्तीय समर्थन देगा।
आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि कंपनी इस पूंजी और बढ़ते रेवेन्यू का इस्तेमाल घाटे को कम करने में कितनी सफल रहती है।