मध्य प्रदेश में Custom Hiring Centre योजना के तहत कृषि यंत्र किराया केंद्र खोलने पर ₹10 लाख तक की सब्सिडी मिल सकती है। जानें पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और जरूरी तारीखें।

कृषि यंत्र किराए पर देने का बिजनेस शुरू करें
मध्य प्रदेश में कृषि क्षेत्र से जुड़े युवाओं, किसानों और एफपीओ के लिए स्वरोजगार का एक अवसर सामने आया है। कृषि अभियांत्रिकी विभाग ने वर्ष 2026-27 के लिए निजी क्षेत्र में कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) स्थापित करने के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं।
इस योजना के तहत प्रदेश में कुल 1,000 कृषि यंत्र किराया केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इन केंद्रों के जरिए किसान ट्रैक्टर और दूसरे आधुनिक कृषि यंत्र खरीदने के बजाय जरूरत के अनुसार किराए पर ले सकेंगे।
सबसे खास बात यह है कि पात्र आवेदकों को परियोजना लागत पर 40% तक, अधिकतम ₹10 लाख की क्रेडिट लिंक्ड बैक एंडेड सब्सिडी मिल सकती है।
कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने के लिए अधिकतम ₹25 लाख की परियोजना लागत निर्धारित की गई है।
योजना के तहत पात्र आवेदक को परियोजना लागत का 40% तक अनुदान दिया जाएगा, लेकिन इसकी अधिकतम सीमा ₹10 लाख है। केंद्र की स्थापना बैंक ऋण के आधार पर की जाएगी।
इसका मकसद किसानों को महंगे कृषि उपकरण खरीदने की जरूरत से राहत देना और गांवों में कृषि मशीनरी की उपलब्धता बढ़ाना है।
किसान बुवाई, जुताई, कटाई और दूसरे कृषि कार्यों के लिए अपनी जरूरत के हिसाब से मशीनरी किराए पर ले सकेंगे।
इच्छुक आवेदकों को 21 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
आवेदन के लिए विभाग ने chc.mpdage.org पोर्टल निर्धारित किया है। आवेदन के साथ ₹10,000 की धरोहर राशि बैंक ड्राफ्ट के रूप में जमा करना अनिवार्य है।
आवेदकों को आवेदन करने से पहले योजना की आधिकारिक शर्तों और अपने जिले के लिए उपलब्ध अवसर की जानकारी ध्यान से जांचनी चाहिए।
योजना के तहत पात्रता के लिए कई शर्तें रखी गई हैं।
आवेदक का 12वीं कक्षा उत्तीर्ण होना जरूरी है। साथ ही 1 अगस्त 2026 को उसकी आयु 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
आवेदक को उसी जिले से आवेदन करना होगा जहां वह कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करना चाहता है। इसके अलावा संबंधित गांव का निवासी होना या उस गांव में आवेदक अथवा उसके माता-पिता के नाम जमीन होना जरूरी है।
एक गांव और एक परिवार से केवल एक CHC के लिए पात्रता होगी।
सभी पात्र आवेदकों का चयन सीधे पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर नहीं होगा। योजना में कंप्यूटराइज्ड लॉटरी के माध्यम से प्राथमिकता सूची तैयार की जाएगी।
आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 22 अगस्त 2026 को भोपाल में कंप्यूटराइज्ड लॉटरी आयोजित की जाएगी। आवेदक उसी दिन शाम 5 बजे के बाद पोर्टल पर अपनी प्राथमिकता सूची देख सकेंगे।
इसके बाद चयनित आवेदकों के दस्तावेजों का सत्यापन 24 और 25 अगस्त को संबंधित कार्यालयों में किया जाएगा।
चयनित आवेदकों के लिए 31 अगस्त 2026 को मार्गदर्शन शिविर आयोजित किया जाएगा।
इस शिविर में आवेदकों को कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए परियोजना तैयार करने, बैंक से ऋण लेने और केंद्र स्थापित करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी जाएगी।
प्रोजेक्ट स्वीकृत होने के बाद बैंक के माध्यम से ऋण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। कृषि यंत्र किराया केंद्र स्थापित हो जाने के बाद विभाग की ओर से उसका भौतिक सत्यापन किया जाएगा।
सत्यापन और योजना की शर्तें पूरी होने के बाद पात्र आवेदक को निर्धारित अनुदान जारी किया जाएगा।
कस्टम हायरिंग सेंटर का मॉडल किसानों और केंद्र संचालक, दोनों के लिए उपयोगी हो सकता है।
छोटे और मध्यम किसानों के लिए ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और दूसरे आधुनिक कृषि उपकरण खरीदना महंगा पड़ सकता है। ऐसे में उन्हें हर मशीन खरीदने के बजाय जरूरत के समय किराए पर मशीन उपलब्ध हो सकती है।
दूसरी ओर, CHC संचालक किसानों को मशीनरी उपलब्ध कराकर किराया प्राप्त कर सकता है। इस तरह यह ग्रामीण क्षेत्र में कृषि आधारित स्वरोजगार का विकल्प बन सकता है।
हालांकि, किसी भी बिजनेस की तरह इसमें भी मशीनों की खरीद, बैंक ऋण, रखरखाव, ईंधन, बीमा, ऑपरेटर और स्थानीय मांग जैसे खर्चों को परियोजना बनाने से पहले ध्यान में रखना जरूरी है।
कस्टम हायरिंग सेंटर गांवों के आसपास कृषि मशीनरी की उपलब्धता बढ़ा सकते हैं। किसानों को खेती के अलग-अलग चरणों में मशीनें किराए पर मिलने से महंगे उपकरणों में शुरुआती निवेश से बचने का विकल्प मिलता है।
समय पर मशीन मिलने से बुवाई या कटाई जैसे काम निर्धारित अवधि में पूरा करने में भी मदद मिल सकती है। इससे कृषि कार्यों में लगने वाला श्रम और समय कम करने का अवसर मिल सकता है।
इसका वास्तविक लाभ हालांकि स्थानीय स्तर पर मशीनों की उपलब्धता, किराये की दर, फसल चक्र और किसानों की मांग पर निर्भर करेगा।
कृषि विभाग की यह योजना खेती के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं के लिए व्यवसाय शुरू करने का विकल्प भी देती है।
12वीं पास और निर्धारित आयु सीमा में आने वाले युवा कृषि मशीनरी को व्यवसाय के रूप में संचालित कर सकते हैं। किसान और एफपीओ भी योजना की पात्रता पूरी करने पर आवेदन कर सकते हैं।
अगर किसी क्षेत्र में कृषि मशीनरी की मांग अधिक है और किसानों को समय पर उपकरण उपलब्ध नहीं हो पाते, तो वहां CHC मॉडल के जरिए स्थानीय स्तर पर सेवा उपलब्ध कराने की संभावना बन सकती है।
| प्रक्रिया | तारीख |
|---|---|
| ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तारीख | 21 अगस्त 2026 |
| कंप्यूटराइज्ड लॉटरी | 22 अगस्त 2026 |
| प्राथमिकता सूची पोर्टल पर | 22 अगस्त, शाम 5 बजे के बाद |
| दस्तावेज सत्यापन | 24-25 अगस्त 2026 |
| मार्गदर्शन शिविर | 31 अगस्त 2026 |
योजना में अधिकतम ₹25 लाख की परियोजना लागत पर परियोजना लागत का 40% तक क्रेडिट लिंक्ड बैक एंडेड सब्सिडी का प्रावधान है। हालांकि, अनुदान की अधिकतम सीमा ₹10 लाख है।
इसका मतलब यह है कि 40% की गणना ₹25 लाख पर करने पर राशि ₹10 लाख बनती है, इसलिए इससे अधिक अनुदान नहीं मिलेगा।
सब्सिडी का लाभ योजना की पात्रता, बैंक ऋण, परियोजना स्वीकृति और विभागीय सत्यापन जैसी निर्धारित प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद मिलेगा।
इच्छुक आवेदक निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के दौरान पात्रता और दस्तावेजों की जानकारी सही तरीके से भरना जरूरी है।
आवेदन पोर्टल: chc.mpdage.org
आवेदन के साथ निर्धारित ₹10,000 की धरोहर राशि बैंक ड्राफ्ट के रूप में जमा करनी होगी।
आवेदन करने से पहले आवेदकों को आधिकारिक दिशा-निर्देशों में दी गई जिलेवार उपलब्धता, पात्रता, आवश्यक दस्तावेज और अन्य शर्तों की जांच कर लेनी चाहिए।
यह ऐसी योजना है जिसके तहत कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जाते हैं, जहां किसान ट्रैक्टर और अन्य कृषि मशीनरी जरूरत के अनुसार किराए पर ले सकते हैं।
पात्र आवेदकों को परियोजना लागत पर 40% तक, अधिकतम ₹10 लाख का क्रेडिट लिंक्ड बैक एंडेड सब्सिडी अनुदान दिया जाएगा।
योजना के तहत अधिकतम परियोजना लागत ₹25 लाख निर्धारित की गई है।
ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तारीख 21 अगस्त 2026 है।
हां। योजना में आवेदक का 12वीं पास होना और 1 अगस्त 2026 को 18 से 40 वर्ष की आयु सीमा में होना जरूरी है।
पात्र आवेदकों का चयन कंप्यूटराइज्ड लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा। प्राथमिकता सूची 22 अगस्त को जारी की जाएगी।
आवेदन के साथ ₹10,000 की धरोहर राशि बैंक ड्राफ्ट के रूप में जमा करना अनिवार्य है।
योजना के अनुसार एक गांव और एक परिवार से केवल एक CHC के लिए पात्रता होगी।
विभाग ने इच्छुक युवाओं, किसानों और एफपीओ से आवेदन करने की अपील की है। हालांकि, आवेदन से पहले संबंधित आधिकारिक पात्रता शर्तों की जांच करना जरूरी है।