Delhi: सुप्रीम कोर्ट, पटना हाईकोर्ट के जजों की याचिका पर सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है। पटना हाईकोर्ट के जजों ने याचिका में कहा है कि उनके सामान्य भविष्य निधी खातों (GPF) को बंद कर दिया गया है। SC शुक्रवार को मामले की सुनवाई के लिए तैयार हो गया है।

दरअसल, बिहार सरकार की ओर से एक आदेश जारी किया गया है। इसमें पटना हाईकोर्ट के सात जजों के GPF अकाउंट्स को बंद करने का आदेश दिया है। पटना हाईकोर्ट के जजों ने इस आदेश को चुनौती दी है।

जजों की ओर से पेश वकील ने कहा कि सात जजों के GPF अकाउंट को बंद कर दिया गया। इस मामले में जल्द सुनवाई की जरूरत है।

चीफ जस्टिस बेंच सुनावाई के लिए तैयार

याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा, सरकार ने हाई कोर्ट के जजों का जीपीएफ खाता बंद कर दिया है। इस आदेश के गंभीर परिणाम हुए हैं। बिहार के महालेखाकार ने जजों के जीपीएफ खातों को बंद कर दिया है।

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इस पर चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस कृष्ण मुरारी  और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच ने हैरान होकर पूछा, क्या, जजों के जीपीएफ GPF खातों को बंद किया गया। बोले, याचिकाकर्ता कौन हैं? इसे मामले को शुक्रवार के लिए लिस्ट किया जाता है।

इन जजों ने दाखिल की याचिका

जस्टिस शैलेंद्र सिंह, जस्टिस अरुण कुमार झा, जस्टिस जितेंद्र कुमार, जस्टिस आलोक कुमार पांडेय, जस्टिस सुनील दत्त मिश्रा, जस्टिस चन्द्रप्रकाश सिंह और जस्टिस चन्द्रसेखर झा की तरफ से ये याचिका दाखिल की गई है।

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ये सभी जज न्यायिक सेवा कोटे से 22 जून को जज नियुक्त हुए थे। जज बनने के बाद इन सभी के GPF अकाउंट को बंद हो चुका है। बिहार गवर्मेंट ने कहा है कि इन सभी जजों के GPF अकाउंट बंद होने की वजह न्यायिक सेवा में उनकी नियुक्ति साल 2005 के बाद है।

क्या है GPF फंड?

जीपीएफ या जनरल प्रोविडेंट फंड भी एक तरह का प्रोविडेंट फंड होता है। हालांकि यह सिर्फ सरकारी कर्मचारी खुलवा सकते हैं।

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वेतनभोगियों की तरह ही सरकारी कर्मचारियों को भी इसमें अपनी सैलरी में से कुछ तय रकम जमा करनी होती है। रिटायर्मेंट के बाद ये रकम कर्मचारियों को मिलती है। ये एक तरह की रिटायर्मेंट प्लानिंग होती है।

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