NEET री-एग्जाम से पहले टूट गया डॉक्टर बनने का सपना: उत्तराखंड के देहरादून से दुखद खबर सामने आई है। 23 साल की होनहार छात्रा रिया की मौत के बाद इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है। रिया, जिसने 12वीं बोर्ड परीक्षा में 96.7% मार्क्स हासिल किए थे, डॉक्टर बनना चाहती थी और काफी समय से NEET परीक्षा की तैयारी कर रही थी। उसके परिवार का कहना है कि हालांकि उसका हालिया NEET एग्जाम बहुत अच्छा गया था, लेकिन संभावित दोबारा परीक्षा की चर्चाओं के बाद वह लगातार तनाव में रहने लगी थी। उसके कमरे में मिला एक छोटा सा नोट—जिसमें लिखा था “मम्मी और पापा, मैं आपसे प्यार करती हूँ” इस घटना को बेहद भावुक बना देता है।

डॉक्टर बनने का बड़ा सपना

रिया बचपन से ही पढ़ाई में बहुत होनहार थी। उसने 12वीं की परीक्षा में 96.7% मार्क्स हासिल करके अपने स्कूल, राजा राम मोहन रॉय एकेडमी में टॉप किया था। उसके परिवार और शिक्षकों को पूरा भरोसा था कि वह एक दिन डॉक्टर बनेगी।

उसने मेडिकल कॉलेज में एडमिशन पाने के लिए NEET परीक्षा की तैयारी में खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया था। उसकी दिनचर्या में पढ़ाई करना, कोचिंग क्लास में जाना और नियमित अभ्यास करना शामिल था।

NEET परीक्षा के बाद बदला व्यवहार

परिवार के अनुसार, NEET परीक्षा से लौटने के बाद रिया काफी खुश थी। उसे भरोसा था कि इस बार उसका सिलेक्शन हो जाएगा। हालाँकि, जैसे-जैसे परीक्षा में गड़बड़ी और दोबारा परीक्षा की चर्चाएँ सामने आने लगीं, वह धीरे-धीरे गुमसुम रहने लगी। हालाँकि उसने अपनी पढ़ाई जारी रखी, लेकिन परिवार ने देखा कि वह मानसिक रूप से परेशान हो रही थी।

कमरे में मिला भावुक नोट

पुलिस के अनुसार, घटनास्थल से एक नोट मिला जिसमें लिखा था—

“मम्मी और पापा, मैं आपसे प्यार करती हूँ।”

इन कुछ शब्दों ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है। पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है और घटना के हर पहलू की पड़ताल कर रही है।

परिवार और पड़ोस में शोक

रिया अपने परिवार में सबसे बड़ी संतान थी; उसकी एक छोटी बहन और एक छोटा भाई था। पड़ोसियों के अनुसार, वह पढ़ाई में हमेशा दूसरों की मदद करती थी और उसका स्वभाव बहुत शांत था। आज भी, उसकी मेडिकल की किताबें, नोट्स और भविष्य की योजनाएँ वैसी ही हैं जैसी वह उन्हें छोड़ गई थी, फिर भी रिया—जिसने उनसे पढ़ाई की थी—अब इस दुनिया में नहीं है।

छात्रों पर बढ़ता मानसिक दबाव: चिंता का विषय

रिया की मौत ने कॉम्पिटिटिव एग्ज़ाम की तैयारी कर रहे छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसे कोर्स के एंट्रेंस टेस्ट की तैयारी करने वाले लाखों छात्र लंबे समय तक तनाव, अनिश्चितता और अच्छा प्रदर्शन करने के दबाव का सामना करते हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना ​​है कि एग्ज़ाम की तैयारी के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी उतना ही ध्यान दिया जाना चाहिए। परिवार, स्कूल और कोचिंग संस्थानों की भूमिका सिर्फ़ पढ़ाई-लिखाई तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए; छात्रों को भावनात्मक सहारा देना भी उतना ही ज़रूरी है।

पुलिस अभी इस मामले की जांच कर रही है। घटना के कारण के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक नतीजा नहीं निकला है; इसलिए, इसे किसी खास वजह से जोड़कर देखना ठीक नहीं होगा। पूरी घटना की साफ़ तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।