हरभजन सिंह ने AAP छोड़कर BJP में जाने के फैसले पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि राजनीति में आने का मकसद खेलों के लिए काम करना था, लेकिन सुझावों पर काम नहीं हुआ।

पूर्व क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने AAP छोड़ने और BJP में शामिल होने के फैसले पर अपनी बात रखी।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर और BJP के राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में जाने के अपने फैसले को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि राजनीति में आने के पीछे उनका मुख्य उद्देश्य खेलों के लिए काम करना था, लेकिन उन्हें लगा कि जिस एजेंडे के साथ उन्होंने राजनीतिक सफर शुरू किया था, उस पर अपेक्षित काम नहीं हो सका।
हरभजन के मुताबिक उन्होंने AAP में रहते हुए खेलों से जुड़े कई सुझाव दिए, लेकिन उन्हें लगा कि इन सुझावों को गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर भी खेलों को बढ़ावा देने को लेकर पर्याप्त रुचि नहीं दिखाने का आरोप लगाया।
हालांकि, ये हरभजन सिंह के अपने अनुभव और दावे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और भगवंत मान या पंजाब सरकार का इस खास बयान पर पक्ष अलग से महत्वपूर्ण होगा।
हरभजन सिंह को AAP ने 2022 में पंजाब से राज्यसभा के लिए नामित किया था। उन्होंने राजनीति में प्रवेश के समय ही स्पष्ट किया था कि उनकी प्राथमिकता खेलों से जुड़े मुद्दों पर काम करना रहेगी।
उनके अनुसार, जब भगवंत मान ने उन्हें AAP में आने के लिए संपर्क किया था, तब उनकी बातचीत में खेलों के विकास का मुद्दा प्रमुख था। हरभजन का कहना है कि वह संसद में रहकर खेलों से जुड़े मुद्दे उठाना चाहते थे और राजनीति को अपना मुख्य पेशा या लक्ष्य नहीं बनाना चाहते थे।
उनके लिए यह भूमिका पंजाब तक सीमित नहीं थी। वह राष्ट्रीय स्तर पर भी खिलाड़ियों, खेल सुविधाओं और खेलों से जुड़े मुद्दों के लिए काम करने का अवसर देख रहे थे।
AAP छोड़ने की वजह बताते हुए हरभजन ने कहा कि उन्होंने अपनी सोच और योजनाओं को पार्टी के सामने रखा, लेकिन उन्हें ऐसा लगा कि उन पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई।
उनका कहना है कि अगर उनके प्रस्तावों में से कुछ पर भी ठोस कदम उठाया जाता, तो शायद वह पार्टी छोड़ने के बारे में नहीं सोचते।
हरभजन के मुताबिक समस्या राजनीतिक मतभेद से ज्यादा उस उद्देश्य से जुड़ी थी, जिसके लिए उन्होंने राजनीति में कदम रखा था। उनका दावा है कि जब खेलों के लिए काम करने का उनका मकसद पूरा होता नहीं दिखा, तो उनके लिए AAP में बने रहना मुश्किल हो गया।
हरभजन सिंह ने अपने अनुभव को पंजाब सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत मान से भी जोड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने खेलों को बढ़ावा देने में पर्याप्त रुचि नहीं दिखाई।
उन्होंने यह भी दावा किया कि खेलों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए उन्होंने मुलाकात की कोशिश की, लेकिन उन्हें मुख्यमंत्री से मिलने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।
इन बयानों को हरभजन सिंह के व्यक्तिगत अनुभव के तौर पर देखा जाना चाहिए। उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और भगवंत मान की ओर से इन विशिष्ट दावों पर प्रतिक्रिया इस मामले का दूसरा पक्ष होगी।
हरभजन सिंह 2022 में AAP के राज्यसभा सांसद बने थे। उनका राजनीति में प्रवेश उनके लंबे क्रिकेट करियर के बाद हुआ।
उन्होंने भारत के लिए टेस्ट, वनडे और T20 क्रिकेट खेला और 2007 T20 विश्व कप तथा 2011 वनडे विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे।
क्रिकेट से राजनीति में उनका प्रवेश इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि उन्होंने अपने राजनीतिक सफर में खेलों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर काम करने की इच्छा को प्रमुखता दी थी।
हरभजन सिंह ने अप्रैल 2026 में AAP छोड़कर BJP का दामन थामा। उनके साथ AAP के छह अन्य राज्यसभा सांसद भी BJP में चले गए।
इस समूह में राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, स्वाति मालीवाल, राजिंदर गुप्ता और विक्रम साहनी शामिल थे।
सात सांसदों के BJP में जाने के बाद AAP के राज्यसभा प्रतिनिधित्व पर बड़ा असर पड़ा। यह कदम दल-बदल कानून के तहत राज्यसभा में पार्टी की संख्या के दो-तिहाई हिस्से से जुड़े प्रावधानों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण था।

सात राज्यसभा सांसदों के BJP में जाने के बाद भगवंत मान ने इस कदम की तीखी आलोचना की थी। उन्होंने इन नेताओं के लिए 'गद्दार' शब्द का इस्तेमाल किया था और आरोप लगाया था कि यह कदम उनकी सरकार को अस्थिर करने की कोशिश का हिस्सा है।
अब हरभजन सिंह की ओर से AAP छोड़ने की वजह को लेकर दिया गया स्पष्टीकरण इस राजनीतिक घटनाक्रम का एक अलग पक्ष सामने रखता है। हरभजन का कहना है कि उनके फैसले के पीछे खेलों से जुड़े काम को लेकर असंतोष प्रमुख कारण था।
AAP छोड़ने के बाद BJP में शामिल हुए हरभजन सिंह ने खेलों से जुड़े मुद्दों को उठाना जारी रखा है। पंजाब में युवा खिलाड़ियों के लिए बेहतर खेल सुविधाओं और प्रशिक्षण के अवसरों की जरूरत को लेकर वह अपनी बात रखते रहे हैं।
उनकी हालिया टिप्पणियों से यह संकेत मिलता है कि खेल विकास अब भी उनके राजनीतिक एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उनका राजनीतिक सफर इस मायने में अलग रहा है कि क्रिकेट से संन्यास के बाद उन्होंने सीधे खेल प्रशासन के बजाय संसद और राजनीति के जरिए खेलों से जुड़े मुद्दों पर काम करने का रास्ता चुना।
हरभजन सिंह के बयान का मुख्य संदेश यही है कि राजनीति में आने के पीछे उनका उद्देश्य सत्ता की राजनीति में सक्रिय होना नहीं, बल्कि अपने प्रभाव का इस्तेमाल खेलों के विकास के लिए करना था।
अब वह कहते हैं कि AAP में रहते हुए जब उन्हें अपने खेल एजेंडे पर अपेक्षित प्रगति नहीं दिखी और पंजाब नेतृत्व तक उनकी पहुंच सीमित रही, तो उन्होंने राजनीतिक रास्ता बदलने का फैसला किया।
अप्रैल में BJP में शामिल होना AAP के सात राज्यसभा सांसदों के सामूहिक बदलाव का हिस्सा था। इस घटनाक्रम ने पंजाब की राजनीति के साथ-साथ राज्यसभा में AAP की स्थिति पर भी असर डाला।