भोपाल। ग्रामीण अर्थव्यवस्था का उत्थान, शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। शासन द्वारा कृषि और पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिससे कृषि और पशुपालन अब न केवल लाभ का व्यवसाय (Profitable Businesses for Farmers) बन...
भोपाल। ग्रामीण अर्थव्यवस्था का उत्थान, शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। शासन द्वारा कृषि और पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिससे कृषि और पशुपालन अब न केवल लाभ का व्यवसाय (Profitable Businesses for Farmers) बन गया है, बल्कि इससे किसानों और पशुपालकों को नई पहचान भी मिल रही है।
एक मॉडल बकरी फार्म (Model Goat Farm) के रूप में बना चुकी पहचान
छिंदवाड़ा जिले के चौरई विकासखंड के ग्राम बांकानागनपुर के नवीन रघुवंशी भी उन्हीं किसानों और पशुपालकों में से एक हैं। रघुवंशी ने पशुपालन विभाग की राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) योजना का लाभ लेकर बकरी पालन को एक सशक्त और लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित किया है। सीमित संसाधनों से शुरू हुई उनकी यह पहल आज आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रबंधन के कारण क्षेत्र में एक मॉडल बकरी फार्म के रूप में पहचान बना चुकी है। रघुवंशी बताते हैं कि एनएलएम योजना के अंतर्गत स्वीकृत उनके इस बकरी फार्म में सिरोही नस्ल की कुल 175 बकरियाँ, बकरे एवं उनके बच्चे उपलब्ध हैं।
बीमार बकरियों के लिए पृथक क्वारंटाइन शेड
फार्म को मॉडल स्वरूप में विकसित किया गया है, जिसमें बीमार बकरियों के लिए पृथक क्वारंटाइन शेड, बच्चों के लिए अलग कमरे तथा बकरियों के बैठने के लिए 4 फीट ऊँचाई पर प्लाई प्लेटफॉर्म बनाया गया है। इसी प्लेटफॉर्म के नीचे कड़कनाथ मुर्गी का पालन भी किया जा रहा है, जिससे अतिरिक्त आय का स्रोत विकसित हुआ है।
भारत सरकार से 50 लाख रुपये की अनुदान राशि
बकरी फार्म की कुल लागत लगभग 1 करोड़ रुपये है, जिसमें भारत सरकार द्वारा 50 लाख रुपये की अनुदान राशि स्वीकृत की गई है। योजना के अंतर्गत प्रथम किस्त के रूप में 25 लाख रुपये की राशि नवीन रघुवंशी को प्रदाय की जा चुकी है। इस आर्थिक सहयोग से फार्म को आधुनिक संसाधनों से सुसज्जित किया गया है।
बकरियों के पोषण के लिए फार्म में तीन प्रकार की नेपियर घास का उत्पादन किया जा रहा है। दाना बनाने की मशीन एवं चैफ कटर जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं। ब्रीडिंग के उद्देश्य से उच्च गुणवत्ता के बकरे रखे गए हैं, जिनमें एक बकरे की कीमत लगभग 2 लाख रुपये है। बेहतर पोषण और प्रबंधन के कारण बकरियों का स्वास्थ्य एवं उत्पादन स्तर उत्कृष्ट बना हुआ है।
बकरी पालन के साथ प्राकृतिक खेती
फार्म में बकरी पालन के साथ-साथ प्राकृतिक खेती भी की जा रही है। इससे न केवल लागत में कमी आई है, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल खेती को भी बढ़ावा मिला है। नवीन रघुवंशी के पुत्र मंथन रघुवंशी द्वारा बकरी पालन एवं उन्नत कृषि को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नई पहचान दी जा रही है। वे यूट्यूब एवं इंस्टाग्राम के माध्यम से बकरी पालन, उन्नत कृषि, मक्का उत्पादन तथा कम उम्र में पशुओं का वजन बढ़ाने जैसे विषयों पर शैक्षणिक वीडियो साझा कर रहे हैं। मंथन रघुवंशी को उनके प्रभावी डिजिटल योगदान के लिए कृषि जागरण की ओर से “एग्री इंफ्लूएंसर ऑफ द ईयर 2026 पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह उपलब्धि युवाओं को कृषि एवं पशुपालन से जोड़ने की प्रेरणा देती है।
महिला किसानों की पहल को मिली प्रदेश स्तर पर सराहना
छिंदवाड़ा जिले के मोहखेड़ ब्लॉक की महिला किसान ज्योति सोमकुंवर ने प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में अपने नवाचार, अनुभव और जमीनी प्रयासों से प्रदेश स्तर पर पहचान बनाने में सफलता पाई है। भोपाल के मिंटो हॉल में आयोजित "मनन 2026" प्राकृतिक खेती विषयक कार्यक्रम में प्रदेश की महिला किसानों ने अपने अनुभव साझा किए, जिसमने छिंदवाड़ा जिले की ज्योति सोमकुंवर को भी अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिला, जिसकी प्रदेश स्तर पर सराहना की गई। सोमकुंवर ने हकदर्शिका संस्था से जुड़कर किसानों को शासन की विभिन्न योजनाओं से जोड़ने के अपने अनुभव साझा किए।
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Profitable Businesses for Farmers in MP[/caption]
ग्रामीण स्तर पर सृजित हो रहे रोजगार एवं आय के नए अवसर
नव गठित पांढुर्णा जिले के विकासखंड सौंसर से महिला किसान मीता धुर्वे एवं कविता सिरसाम ने भी बड़ादेव जैविक उत्पादक समूह के माध्यम से ग्राम जोबनढाना में सृजन संस्था के सहयोग से संचालित जैविक उत्पाद केंद्र की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार जैविक उत्पाद बनाकर किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित किया जा रहा है और इससे ग्रामीण स्तर पर रोजगार एवं आय के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा
मोहखेड़ एवं सौंसर ब्लॉक की जैविक उत्पाद केंद्र से जुड़ी इन महिला किसानों द्वारा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के किए का रहे प्रयासों को प्रदेश स्तर पर सराहा गया। महिला किसानों की यह पहल न केवल अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बनी है, बल्कि प्राकृतिक खेती को अपनाने की दिशा में एक मजबूत संदेश भी दे रही है।