Chandrma Ketu Yuti: चंद्रमा 25 अप्रैल की रात को कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में गोचर कर गए हैं। चंद्रमा का यह गोचर रात 8:52 बजे हुआ। इस बीच, छाया ग्रह केतु पहले से ही सिंह राशि में स्थित था। परिणामस्वरूप, चंद्रमा और केतु की युति ने एक ग्रहण योग का निर्माण किया है, जो 28 अप्रैल की सुबह लगभग 3:36 बजे तक सक्रिय रहेगा। इसलिए, आने वाले कुछ दिन कुछ राशियों के लिए उथल-पुथल भरे साबित हो सकते हैं।
चंद्रमा जो मन का कारक है और केतु जो मानसिक भ्रम पैदा करने के लिए जाना जाता है, कुछ व्यक्तियों के करियर और पारिवारिक जीवन में कठिनाइयां उत्पन्न कर सकते हैं। ऐसे में इन राशियों को बेहद सावधनियां बरतने की जरुरत है। आइए जानते हैं कि किन राशियों पर इसका प्रभाव पड़ेगा और उन्हें क्या उपाय करने चाहिए।
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वृषभ (Taurus)
चंद्रमा और केतु की युति आपकी राशि से चौथे भाव में होगी। इस भाव को घरेलू सुख और आराम का कारक माना जाता है। चौथे भाव में इस अशुभ युति के कारण, आपको अपने पारिवारिक जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
आने वाले दिनों में बातचीत के दौरान शब्दों का चयन करते समय आपको अत्यधिक सावधानी और सोच-समझकर काम लेना चाहिए। इसके अतिरिक्त, वृषभ राशि के जातकों को कानूनी मामलों के प्रति सतर्क रहना चाहिए। वाहन चलाते समय और मशीनरी का उपयोग करते समय सावधानी बरतें। उपाय के तौर पर आपको भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए और शिव मंत्रों का जाप करना चाहिए।

सिंह (Leo)
चंद्रमा और केतु की युति आपकी अपनी ही राशि में हो रही है। परिणामस्वरूप, आप मानसिक भ्रम या भटकाव का शिकार हो सकते हैं। सामाजिक स्तर पर, आपकी लापरवाही भरी या अनुचित टिप्पणियां आपकी सार्वजनिक छवि को धूमिल कर सकती हैं। इसलिए, सावधान रहें। इसके अलावा, आपको अपने आर्थिक मामलों में समझदारी और सावधानी बरतनी होगी। आप जितना ज़्यादा वाद-विवाद और झगड़ों से दूर रहेंगे, आपके लिए उतना ही ज़्यादा फ़ायदेमंद होगा। उपाय के तौर पर आपको भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना चाहिए।
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मीन राशि (Pisces)
आपकी राशि से छठे भाव में चंद्रमा और केतु की युति बनेगी। इसलिए, आपको अपने शत्रुओं के प्रति सावधान रहना चाहिए। अपने राज़ किसी को न बताएं। वरना आप मुसीबत में पड़ सकते हैं। इस राशि के जातकों को आर्थिक लेन-देन करते समय भी समझदारी बरतनी चाहिए। आपके स्वास्थ्य में भी उतार-चढ़ाव की संभावना है। उपाय के तौर पर, इस राशि के जातकों को शिवलिंग पर जल चढ़ाना चाहिए।



















