AI Entry in Dairy: आर्टिफिशल इंटेलीजेंस (एआई) धीरे-धीरे हर क्षेत्र में कदम बढ़ा रही है। कृषि के क्षेत्र में भी अब मददगार साबित हो रही है। अब डेयरी (AI Entry in Dairy) में भी बड़े पैमाने पर इसकी शुरुआत हो चुकी है। हाल ही में देश के सबसे बड़े कोऑपरेटिव अम...
AI Entry in Dairy: आर्टिफिशल इंटेलीजेंस (एआई) धीरे-धीरे हर क्षेत्र में कदम बढ़ा रही है। कृषि के क्षेत्र में भी अब मददगार साबित हो रही है। अब डेयरी (AI Entry in Dairy) में भी बड़े पैमाने पर इसकी शुरुआत हो चुकी है। हाल ही में देश के सबसे बड़े कोऑपरेटिव अमूल ने इसकी शुरुआत कर दी है। अमूल अब अमूल एआई हो गया है। इसका फायदा अमूल से जुड़े करीब 36 लाख दूध उत्पादन करने वाले परिवारों को होगा।
एआई एक्सपर्ट की मानें तो एआई (AI) जहां दूध की लागत कम करने में मददगार साबित होगा, वहीं एआई के इस्तेमाल से पशुपालन की परेशानियां भी कम और खत्म होंगी। एक्सपर्ट का कहना है कि अभी तक पशुपालन-डेयरी में कहीं भी एक जगह डाटा स्टोर नहीं है। पशुपालक तो अभी डाटा के बारे में सोचते तक नहीं हैं. लेकिन अब एआई का इस्तेमाल कर डाटा कलेक्शन करने से पशुपालन और डेयरी सेक्टर में एक बड़ा बदलाव आएगा।
उत्पादन के साथ बढ़ रही प्रोडक्ट की क्वालिटी
आपको जानकार हैरानी होगी, लेकिन ये हकीकत है कि आज बहुत सारे देशों में एआई की मदद से पशुपालन किया जा रहा है। एआई की मदद से पशुपालन और डेयरी के सेक्टर में ना सिर्फ लागत कम हो रही है, बल्कि उत्पादन और प्रोडक्ट की क्वालिटी भी बढ़ रही है। एक्सपर्ट दावा करते हैं कि अगर एआई का पशुपालन में इस्तेमाल किया जाता है तो दूध की लागत 10 फीसद तक कम हो जाती है।
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एआई (AI Entry in Dairy ) ऐसे कम करेगा दूध की लागत
एआई एक्सपर्ट वाईके सिंह का कहना है कि पशुपालन हो या फिर मुर्गी और मछली पालन, सबसे जयादा लागत चारे और दाने पर आती है, जबकि पशुपालन में तो पशुओं को हरे-सूखे चारे के साथ ही मिनरल्स भी दिए जाते हैं उत्पादन और प्रोडक्ट की क्वालिटी भी बढ़ रही। फिर भी प्रति पशु दूध उत्पादन के मामले में हमरा देश बहुत पीछे है। अगर एआई का इस्तेमाल किया जाए तो लागत कम कर प्रति पशु उत्पादन भी बढ़ाया जा सकता है।
एआई (AI) की मदद से की जा रही पशुओं की हैल्थ मॉनिटरिंग
इस मामले में एआई की मदद से पशुओं की हैल्थ मॉनिटरिंग की जाती है। जैसे दूध देने वाली अगर भैंस है तो उसकी उम्र, भैंस का वजन, हर रोज दिए जाने वाले दूध की मात्रा कितनी है आदि। हर रोज के ये आंकड़े जमा करने के बाद इसी आधार पर पशु फिर वो चाहें गाय हो या भैंस उसकी खुराक तय की जाती है।मतलब गाय-भैंस की खुराक में कितना हरा चारा देना है या फिर कितना सूखा चारा खिलाना है। खुराक में शामिल किए जाने वाले मिनरल्स की मात्रा भी इन्हीं आंकड़ों के हिसाब से तय की जाती है।
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एआई (AI) से आसान होगी प्रोडक्ट की ट्रेसेबिलिटी
खान का कहना है कि पहले के मुकाबले अब ग्राहक बहुत जागरुक हो चुके हैं। अगर फूड आइटम की बात करें तो अभी तक ग्राहक पैकेट पर बनने की तारीख से लेकर इस्तेमाल करने या कह लें एक्सपायरी डेट देखता था, लेकिन अब ग्राहक यह भी जानना चाहता है कि उस प्रोडक्ट में क्या-क्या शामिल है. वो आया कहां से. बढ़ती हुई बीमारियों ने भी लोगों को जागरुक किया है, लेकिन एआई की मदद से सिर्फ एक क्यूआर कोड से आप अपने प्रोडक्ट से जुड़ी एक-एक जानकारी अपने ग्राहक को दे सकते हैं।
अब दूध के पैकेट पर मिलेगी सभी प्रकार की जानकारी
अगर हम डेयरी प्रोडक्ट की बात करें तो आप अपने ग्राहक को बता सकते हैं कि दूध का जो पैकेट उसने खरीदा है वो दूध किस गांव और शहर से आया है। किस नस्ल की गाय और भैंस का दूध है। गाय-भैंस को वक्त से कौन-कौनसी वैक्सीन लग चुकी हैं। गाय-भैंस को कोई बीमारी तो नहीं है। दूध के कौन-कौन से टेस्ट हुए हैं। दूध में फैट और एसएनएफ की मात्रा कितनी है और इस लेवल की जानकारी से ग्राहक को संतुष्ट करने के बाद आप उससे एक-दो रुपये लीटर ज्यादा भी ले सकते हैं।