महाराष्ट्र में आदिवासी छात्रों के आंदोलन को लेकर राहुल गांधी और मंत्री अशोक उइके आमने-सामने हैं। जानिए 30 साल की उम्र सीमा, छात्रावास सुविधाओं और छात्रों की प्रमुख मांगों पर पूरा मामला।

राहुल गांधी
महाराष्ट्र में आदिवासी छात्रों के आंदोलन को लेकर अब सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से आदिवासी छात्रों की मांगों को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखे जाने के बाद महाराष्ट्र के आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके ने उन पर निशाना साधा है।
अशोक उइके ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि “जब भी आप आते हैं, हमेशा देर से आते हैं।” मंत्री का दावा है कि राहुल गांधी के महाराष्ट्र पहुंचने से पहले ही नागपुर और चंद्रपुर के आदिवासी छात्रों ने अपना भूख हड़ताल आंदोलन वापस ले लिया था।
उइके ने कहा कि शायद महाराष्ट्र कांग्रेस के नेताओं ने राहुल गांधी को आंदोलन की पूरी जानकारी नहीं दी। उन्होंने राहुल गांधी पर मुख्यमंत्री से सवाल पूछने से पहले अपने ही नेताओं और पुराने रिकॉर्ड को देखने की सलाह भी दी।
राहुल गांधीजी, @RahulGandhi
— Dr.Ashok Uike (@drashokuike_mla) August 25, 2026
आप जब भी आते हो, देर करते हो!
हमारे जनप्रिय मुख्यमंत्री देवेंद्रजी फडणवीस इनसें सवाल पुछने सें पहले, जरा अपने गिरेबान में झाक लिया होता.
जिस दिन आप महाराष्ट्र आए और पेड पीआर प्रोग्राम किया, उसी दिन, प्रोग्राम सें पहले, हमारे नागपूर और चंद्रपूर के… https://t.co/GsmYSDLQN3
दरअसल, महाराष्ट्र के आदिवासी छात्र पिछले कई दिनों से सरकारी छात्रावासों और आदिवासी विद्यार्थियों से जुड़े नियमों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। पुणे के मांजरी इलाके में भी छात्रों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी।
छात्रों की सबसे बड़ी आपत्तियों में सरकारी छात्रावासों में 30 साल की उम्र सीमा, छात्रावासों की सुविधाओं और महिला छात्रों से जुड़े कुछ मेडिकल नियम शामिल हैं।
राहुल गांधी ने 24 अगस्त को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर इन मुद्दों पर तुरंत कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि आदिवासी छात्र कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई कर रहे हैं और छात्रावासों में उन्हें बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए।
राहुल गांधी ने अपने पत्र में महिला छात्रों की ओर से लगाए गए आरोपों का जिक्र किया था। इसमें छुट्टी के बाद छात्रावास लौटने वाली छात्राओं की कथित तौर पर गर्भावस्था जांच कराने का मुद्दा भी शामिल था।
इस आरोप को अशोक उइके ने पूरी तरह गलत बताया। मंत्री ने कहा कि किसी छात्र के लंबे समय तक छुट्टी पर रहने के बाद स्वास्थ्य की जांच के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट मांगा जाता है, लेकिन गर्भावस्था जांच कराने की बात गलत है और ऐसा कोई नियम नहीं है।
उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से ले रही है और व्यवस्था में जहां भी कमी है, उसे दूर करने का काम जारी है।
आदिवासी छात्रों ने गढ़चिरौली के एक आदिवासी आवासीय स्कूल में सांप के काटने से तीन छात्राओं की मौत का मामला भी उठाया है। आंदोलनकारी परिवारों को मुआवजा देने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
इस मामले पर भी मंत्री अशोक उइके ने कांग्रेस पर पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन आश्रम स्कूलों में अव्यवस्थाओं की शिकायतें सामने आ रही हैं, उनमें से कुछ स्कूल कांग्रेस के पूर्व नेताओं से जुड़े रहे हैं।
मंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार सभी समुदायों के छात्रों को जरूरी सुविधाएं देने के लिए काम कर रही है और व्यवस्था में सुधार का अभियान आगे भी जारी रहेगा।
आदिवासी छात्रों ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें छात्रावासों से जुड़े हालिया सरकारी आदेशों को वापस लेना, छात्रावास की उम्र सीमा को हटाना या 30 से बढ़ाकर 36 साल करना और छात्रावासों में मिलने वाली आर्थिक सुविधाओं को मौजूदा महंगाई के हिसाब से बढ़ाना शामिल है।
छात्रों की यह भी मांग है कि आदिवासी छात्रों से जुड़े फैसले लेते समय उनकी राय को नीति बनाने की प्रक्रिया में शामिल किया जाए।
इसके अलावा आंदोलनकारियों ने गढ़चिरौली में सांप के काटने से जान गंवाने वाली तीन छात्राओं के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग भी रखी है।
फिलहाल आदिवासी छात्रों के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच बयानबाजी जारी है। एक तरफ राहुल गांधी ने छात्रों की समस्याओं को लेकर सरकार से जवाब मांगा है, वहीं मंत्री अशोक उइके ने कांग्रेस पर ही इन समस्याओं के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया है।