मध्य प्रदेश सरकार 1 जनवरी 2026 से राज्य के 6.5 लाख से अधिक कर्मचारियों के लिए सेवा अवकाश नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है। लगभग पांच दशक पुराने मध्य प्रदेश अवकाश नियम 1977 को अब समाप्त कर मध्य प्रदेश सिविल सर्विसेज (लीव) रूल्स, 2025 लागू किए जाएंगे...

मध्य प्रदेश सरकार 1 जनवरी 2026 से राज्य के 6.5 लाख से अधिक कर्मचारियों के लिए सेवा अवकाश नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है। लगभग पांच दशक पुराने मध्य प्रदेश अवकाश नियम 1977 को अब समाप्त कर मध्य प्रदेश सिविल सर्विसेज (लीव) रूल्स, 2025 लागू किए जाएंगे। यह बदलाव राज्य के सेवा नियमों में पहली बड़ी समीक्षा मानी जा रही है।
नए नियमों को इस तरह तैयार किया गया है कि वे केंद्र सरकार के अवकाश नियमों के ज्यादा करीब हों और साथ ही वर्तमान प्रशासनिक व सामाजिक जरूरतों को भी पूरा कर सकें। संशोधित ढांचा कर्मचारियों के कल्याण को बेहतर बनाने, नियमों की अस्पष्टता को दूर करने और अवकाश के दुरुपयोग को रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था को मजबूत करता है।
सबसे अहम बदलाव अर्जित अवकाश (EL) से जुड़ा है। अब कर्मचारियों को साल पूरा होने के बाद नहीं, बल्कि अग्रिम रूप से अवकाश दिया जाएगा। हर कर्मचारी को हर साल:
1 जनवरी को 15 दिन का अर्जित अवकाश
1 जुलाई को 15 दिन का अर्जित अवकाश मिलेगा। नए नियुक्त कर्मचारियों को भी उनकी जॉइनिंग डेट से अनुपात के आधार पर अर्जित अवकाश दिया जाएगा। इसके अलावा, सरकारी शिक्षक और प्रोफेसर, जिन्हें पहले ग्रीष्मकालीन अवकाश के कारण EL का लाभ नहीं मिलता था, अब उन्हें भी सालाना 10 दिन का अर्जित अवकाश मिलेगा।
नए नियमों में विशेष मेडिकल लीव का भी प्रावधान किया गया है। यदि कोई कर्मचारी सरकारी ड्यूटी के दौरान घायल होता है, तो उसे दो साल तक का विशेष मेडिकल अवकाश मिल सकेगा।
यह अवकाश मेडिकल सलाह के आधार पर दिया जाएगा
इसे कर्मचारी के सामान्य अवकाश खाते से नहीं काटा जाएगा
वेतन व्यवस्था इस तरह होगी कि शुरुआती अवधि में पूरा वेतन, और बाद की अवधि में आंशिक वेतन मिलेगा
अन्य महत्वपूर्ण बदलाव - संशोधित नियमों में कई और अहम सुधार किए गए हैं, जिनमें शामिल हैं:
कैजुअल लीव को मेडिकल लीव में बदलने की अनुमति
प्रोबेशन पर चल रहे कर्मचारियों और प्रशिक्षुओं के लिए स्पष्ट अवकाश प्रावधान
चाइल्ड केयर लीव के दौरान वेतन भुगतान के नियमों में बदलाव
नियमों को अधिक जेंडर-न्यूट्रल बनाया गया है
सिंगल फादर और सरोगेसी से जुड़े मामलों को भी अवकाश नियमों में शामिल किया गया है
सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि अवकाश कोई पूर्ण अधिकार नहीं है, लेकिन साथ ही अधिकारियों की मनमानी रोकने के लिए सुरक्षा उपाय भी जोड़े गए हैं। इसके तहत अनिवार्य लीव रोस्टर लागू किए जाएंगे, ताकि अवकाश स्वीकृति या अस्वीकृति में पारदर्शिता बनी रहे।
सरकार का मानना है कि ये नए नियम 2026 से राज्य के प्रशासनिक ढांचे और कर्मचारियों के वर्क-लाइफ बैलेंस पर सकारात्मक असर डालेंगे। साथ ही, इससे सेवा अनुशासन मजबूत होगा और अवकाश प्रबंधन ज्यादा व्यवस्थित और न्यायसंगत बन सकेगा।
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