पाकिस्तान अपनी कमजोर विदेशी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा बढ़ाने के लिए अमेरिका से 10 अरब डॉलर की Exchange Stabilisation Support Facility मांग रहा है। पाकिस्तान के Finance Minister Muhammad Aurangzeb ने इसकी जानकारी दी है।

पाकिस्तान ने विदेशी मुद्रा स्थिति और निवेशकों का भरोसा मजबूत करने के लिए अमेरिका से $10 अरब की प्रस्तावित सुविधा मांगी है।
पाकिस्तान अपनी कमजोर विदेशी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा बढ़ाने के लिए अमेरिका से 10 अरब डॉलर की Exchange Stabilisation Support Facility मांग रहा है। पाकिस्तान के Finance Minister Muhammad Aurangzeb ने इसकी जानकारी दी है।
Aurangzeb के मुताबिक, इस प्रस्ताव को अमेरिकी Treasury Department के सामने रखा गया है और इस मुद्दे पर बातचीत चल रही है। हालांकि, अभी तक दोनों देशों के बीच कोई समझौता नहीं हुआ है।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तावित सुविधा पारंपरिक अर्थों में कोई loan या credit line नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान की मुद्रा और विदेशी मुद्रा स्थिति को लेकर बाजार में भरोसा पैदा करना है।
पाकिस्तान लंबे समय से विदेशी मुद्रा और बाहरी वित्तीय जरूरतों के दबाव से जूझता रहा है। देश 2023 में डिफॉल्ट के बेहद करीब पहुंच गया था। बाद में IMF और मित्र देशों से मिले वित्तीय समर्थन के कारण पाकिस्तान तत्काल संकट से बाहर निकल सका।
अब Islamabad अपनी आर्थिक रणनीति को बदलने की कोशिश कर रहा है। सरकार चाहती है कि पाकिस्तान बार-बार विदेशी कर्ज, deposits और bilateral rollovers पर निर्भर रहने के बजाय अंतरराष्ट्रीय capital markets से लंबी अवधि की financing जुटा सके।
यही वजह है कि प्रस्तावित अमेरिकी सुविधा को सीधे नए loan के बजाय एक confidence-building mechanism के रूप में देखा जा रहा है।
Muhammad Aurangzeb के अनुसार, इस सुविधा का मकसद पाकिस्तान की currency और foreign exchange stability के बारे में सकारात्मक संकेत देना है।
उनका कहना है कि इससे पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में लौटना आसान हो सकता है। यानी सरकार का लक्ष्य केवल तत्काल पैसा जुटाना नहीं, बल्कि देश की market credibility को मजबूत करना है।
नहीं।
यह महत्वपूर्ण है कि फिलहाल इसे अमेरिकी सहायता या स्वीकृत कर्ज के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। पाकिस्तान ने US Treasury Department के सामने प्रस्ताव रखा है और बातचीत जारी है।
Aurangzeb ने बताया कि पाकिस्तान को उम्मीद है कि सितंबर के अंत तक US Treasury या Exim Bank की ओर से feedback मिल सकता है।
इसलिए $10 अरब की राशि को फिलहाल प्रस्तावित सुविधा के रूप में ही समझना चाहिए।
पाकिस्तान वर्तमान में $7 अरब के IMF programme को लागू कर रहा है, जिस पर 2024 में सहमति बनी थी।
IMF programme का उद्देश्य पाकिस्तान की macroeconomic stability सुधारना, बाहरी वित्तीय दबाव कम करना और देश की आर्थिक नीतियों में सुधार लाना है।
हालांकि, IMF programme के बावजूद पाकिस्तान को अपने external financing requirements को पूरा करने के लिए लगातार बाहरी स्रोतों की जरूरत रहती है।
इसी कारण Islamabad अब ऐसी financing व्यवस्था की तलाश कर रहा है जो उसे हर साल short-term support और loan rollovers पर कम निर्भर बनाए।
पिछले कई वर्षों में पाकिस्तान ने अपनी विदेशी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए IMF के अलावा चीन, सऊदी अरब, UAE और अन्य bilateral partners पर भी भरोसा किया है।
इन देशों से मिलने वाले deposits, loans और rollovers ने पाकिस्तान को तत्काल liquidity pressure से निपटने में मदद की है।
लेकिन Finance Minister के मुताबिक, अब सरकार की पूरी कोशिश market-based financing की तरफ बढ़ने की है।
इसका मतलब है कि पाकिस्तान लंबी अवधि के लिए अंतरराष्ट्रीय capital markets से पैसा जुटाना चाहता है, ताकि बार-बार अल्पकालिक bilateral financing की जरूरत कम हो।
अगर पाकिस्तान की financial credibility में सुधार होता है, तो वह international markets में अपेक्षाकृत बेहतर शर्तों पर पैसा जुटा सकता है।
लंबी repayment अवधि का मतलब यह भी होगा कि सरकार पर एक साथ बड़ी रकम चुकाने का दबाव कम हो सकता है।
हालांकि, international markets में वापसी के लिए केवल विदेशी मुद्रा सहायता पर्याप्त नहीं होगी। पाकिस्तान को inflation, fiscal deficit, external account और debt sustainability जैसे मुद्दों पर भी लगातार सुधार दिखाना होगा।
इस पूरी रणनीति का एक अहम हिस्सा पाकिस्तान की sovereign credit rating में सुधार करना भी है।
Muhammad Aurangzeb ने कहा कि पाकिस्तान की rating 2003-04 के बाद से एक स्तर पर अटकी हुई है और सरकार का लक्ष्य कम से कम B+ rating तक पहुंचना है।
एक बेहतर sovereign rating से किसी देश के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों से borrowing करना आसान हो सकता है। इसके अलावा, निवेशकों का भरोसा बढ़ने पर सरकार को लंबी अवधि के debt instruments जारी करने के बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
हालांकि, rating agencies आम तौर पर किसी देश की आर्थिक नीतियों, debt repayment capacity, foreign exchange position और fiscal stability समेत कई कारकों का आकलन करती हैं।
ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी।
अगर अमेरिका इस प्रस्ताव को समर्थन देता है और इससे पाकिस्तान की foreign exchange credibility मजबूत होती है, तो यह Islamabad के लिए एक महत्वपूर्ण सकारात्मक संकेत हो सकता है।
लेकिन पाकिस्तान की आर्थिक चुनौतियां केवल विदेशी मुद्रा की उपलब्धता तक सीमित नहीं हैं। देश को अपने बाहरी कर्ज, राजकोषीय घाटे, कमज़ोर tax base और बार-बार होने वाली external financing जरूरतों से भी निपटना होगा।
इसलिए $10 अरब की संभावित सुविधा को व्यापक आर्थिक सुधारों का विकल्प नहीं, बल्कि market confidence मजबूत करने के एक साधन के रूप में देखना ज्यादा उचित होगा।
पाकिस्तान अब उस मॉडल से धीरे-धीरे बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है जिसमें हर वित्तीय संकट के दौरान IMF और मित्र देशों से emergency financing या loan rollover की जरूरत पड़ती है।
Aurangzeb ने bilateral partners के पिछले दशक में दिए गए समर्थन के लिए आभार जताया, लेकिन साथ ही संकेत दिया कि Islamabad अपनी financing strategy को फिर से तैयार कर रहा है।
सरकार का लक्ष्य है कि पाकिस्तान ऐसी स्थिति में पहुंचे जहां वह अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजार से लंबी अवधि का वित्त जुटा सके और निवेशकों के बीच अपनी विश्वसनीयता बहाल कर सके।
अमेरिका से मांगी गई $10 अरब की Exchange Stabilisation Support Facility इसी बड़े बदलाव का हिस्सा है। फिलहाल इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी किनहीं। अभी दोनों Washington की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और पाकिस्तान अपनी आर्थिक स्थिरता में कितना सुधार दिखा पाता है।