10 अगस्त 2013 को उज्जैन में हुए एक ट्रेन हादसे में प्रदीप ने अपने दाएं पैर को खो दिया था। 90 प्रतिशत विकलांग होने के बाद 31 दिसंबर 2013 को उन्होंने जयपुर फुट लगवाया। जिसके बाद उन्होंने फिर से चलना सीखा और चलने के बाद वे थोड़ा बहुत दौड़ने भी लगे। इसी दौरान उन्हें फिर से साइकिल चलाने का विचार आया और धीरे-धीरे साइकिल चलाना शुरू कर दी।



