पाकिस्तान के कराची शहर से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक साइकिल एंबुलेंस शहर की सड़कों पर चलती दिखाई दे रही है, जिसके बाद इंटरनेट पर इसको लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

पाकिस्तान के कराची शहर से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक साइकिल एंबुलेंस शहर की सड़कों पर चलती दिखाई दे रही है, जिसके बाद इंटरनेट पर इसको लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।
कुछ यूजर्स ने इस पहल का मजाक उड़ाते हुए मीम्स शेयर किए और इसकी तुलना दुनिया में तेजी से बढ़ रही आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं जैसे एयर एंबुलेंस, ड्रोन मेडिकल सर्विस और फ्लाइंग आईसीयू जैसी तकनीकों से करने लगे।
कई वायरल पोस्ट में दावा किया गया कि कराची के मेयर बैरिस्टर मुर्तजा वहाब ने हाल ही में साइकिल एंबुलेंस सेवा शुरू की है। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इसको लेकर व्यंग्यात्मक टिप्पणियां करनी शुरू कर दीं।
एक यूजर ने मजाक करते हुए लिखा कि पाकिस्तान ने साइकिल एंबुलेंस के जरिए दुनिया को चौंका दिया है और मानवता के लिए यह एक बड़ी खोज है। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि जहां दुनिया भविष्य की मेडिकल टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ रही है, वहीं पाकिस्तान अभी भी साइकिल पर निर्भर है।
Karachi finally gets a Cycle Ambulance 🚲🚑
— Vijay Gupta (@foryouvjg) July 20, 2026
After 77 years of "innovation".
Only possible under leadership of Asim Munir 😂
Eco-friendly, traffic-proof, and comes with free cardio. #Karachi #Pakistan #DesiJugaad pic.twitter.com/Fhhuc2WHjJ
हालांकि सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच इस पहल से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बात कई लोगों से छूट गई। दरअसल, कराची की यह साइकिल एंबुलेंस कोई नई शुरुआत नहीं है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह सेवा मई 2025 से ही संचालित हो रही है। इसे सिंध इंटीग्रेटेड इमरजेंसी एंड हेल्थ सर्विसेज (SIEHS-1122), जिसे रेस्क्यू 1122 के नाम से भी जाना जाता है, ने एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया था।
इसका उद्देश्य सामान्य एंबुलेंस की जगह लेना नहीं था, बल्कि उन इलाकों तक जल्दी पहुंचना था जहां ट्रैफिक और संकरी गलियों की वजह से बड़ी एंबुलेंस पहुंचने में परेशानी का सामना करती हैं।
कराची जैसे बड़े और भीड़भाड़ वाले शहरों में कई बार सड़क जाम और तंग रास्तों के कारण मरीजों तक समय पर मदद पहुंचाना मुश्किल हो जाता है।
इसी समस्या को देखते हुए विशेष रूप से तैयार की गई माउंटेन बाइक का इस्तेमाल किया गया। इन साइकिलों पर प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी पहुंचते हैं और मरीज को शुरुआती चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराते हैं।
इनके जरिए जरूरत पड़ने पर:
जैसी सेवाएं दी जाती हैं, जब तक कि बड़ी एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंच जाती।
कराची की इस पहल की एक खास बात यह भी है कि इसमें प्रशिक्षित महिला वॉलंटियर्स भी शामिल हैं। इसका उद्देश्य सिर्फ आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना ही नहीं, बल्कि रेस्क्यू सेवाओं में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देना भी है।
जहां एक तरफ सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसका मजाक बनाया, वहीं दूसरी ओर कई यूजर्स ने इस पहल का समर्थन भी किया।
एक यूजर ने कहा कि एंबुलेंस किस वाहन से पहुंच रही है, यह मायने नहीं रखता, बल्कि जरूरी यह है कि उस पर मौजूद स्वास्थ्यकर्मी सक्षम हो और सही समय पर मरीज की मदद कर सके।
कुछ लोगों ने यह भी बताया कि साइकिल और बाइक एंबुलेंस का इस्तेमाल दुनिया के कई देशों में पहले से किया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर, लंदन की NHS सेवाओं में भी Cycle Response Units का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि भीड़भाड़ वाले इलाकों में मरीजों तक तेजी से पहुंचा जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, साइकिल एंबुलेंस कोई पिछड़ी हुई व्यवस्था नहीं बल्कि कई जगहों पर अपनाई जाने वाली एक व्यावहारिक मेडिकल रणनीति है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां बड़े वाहन आसानी से नहीं पहुंच सकते, वहां छोटे और तेज साधन मरीजों की जान बचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
कराची की यह पहल भी इसी सोच पर आधारित है कि मुश्किल परिस्थितियों में मरीज तक जल्द से जल्द चिकित्सा सहायता पहुंचाई जा सके।
सोशल मीडिया पर भले ही यह सेवा मजाक का विषय बनी हो, लेकिन इसके पीछे का उद्देश्य भीड़भाड़ वाले शहर में आपातकालीन सेवाओं को ज्यादा प्रभावी बनाना है।