Dhruv Rathee के हिंदू देवी-देवताओं से जुड़े वीडियो मामले में Google ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि वीडियो भारत में withheld किया गया है, दुनियाभर में नहीं। जानें पूरा मामला।

YouTuber Dhruv Rathee के हिंदू देवी-देवताओं से जुड़े एक वीडियो को लेकर चल रहे विवाद में मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। Google LLC ने अदालत को बताया कि संबंधित YouTube वीडियो को भारत में withheld कर दिया गया है, लेकिन दुनियाभर में इसे हटाया नहीं गया है।
यह मामला वकील अमिता सचदेवा की याचिका से जुड़ा है। सचदेवा ने वीडियो को लेकर आपत्ति जताई है और इसके खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज कराया है।
मामले का शीर्षक Amita Sachdeva v. Union of India & Ors है।

सुनवाई के दौरान Google की ओर से पेश वकील ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को बताया कि वीडियो को भारत में हटाया गया है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर इसे हटाने का मुद्दा अभी दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के समक्ष विचाराधीन है।
Google की ओर से यह भी कहा गया कि अदालतों द्वारा कंटेंट हटाने के आदेश आम तौर पर भारतीय डोमेन के संदर्भ में दिए गए हैं और global injunction का सवाल अभी लंबित है।
इस तरह फिलहाल वीडियो पर भारत में रोक है, जबकि अन्य देशों में इसकी उपलब्धता पर डिवीजन बेंच के फैसले का इंतजार है।
विवाद 21 मार्च को प्रकाशित Dhruv Rathee के वीडियो से जुड़ा है, जिसका शीर्षक था “Can Hindus eat BEEF? Kerala Story 2 Exposed”।
वीडियो में हिंदू धार्मिक ग्रंथों और खान-पान से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई थी। याचिकाकर्ता अमिता सचदेवा का आरोप है कि वीडियो में हिंदू देवी-देवताओं को लेकर ऐसी बातें कही गईं, जो कथित तौर पर मानहानिकारक हैं और धार्मिक भावनाओं को आहत करती हैं।
वीडियो में Rathee ने प्राचीन ग्रंथों और ऋषियों के संदर्भ में मांसाहार से जुड़ी बातों पर चर्चा की थी तथा यह तर्क रखा था कि कुछ प्राचीन धार्मिक स्रोतों में भगवान राम और भगवान कृष्ण जैसे देवताओं के मांस खाने का उल्लेख मिलता है।
इन दावों और वीडियो की सामग्री को लेकर विवाद अदालत तक पहुंचा।
इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने 3 जुलाई को Grievance Appellate Committee (GAC) को सचदेवा की अपील पर निर्णय लेने को कहा था। सचदेवा ने वीडियो हटाने की मांग की थी।
इसके बाद 15 जुलाई को GAC ने वीडियो को 24 घंटे के भीतर हटाने का आदेश दिया।
मंगलवार की सुनवाई में सचदेवा ने अदालत के सामने कहा कि 30 जुलाई को YouTube ने वीडियो को केवल भारत में withheld किया और उसे globally नहीं हटाया। उनके अनुसार यह GAC के आदेश का केवल आंशिक अनुपालन है।
Google की दलील सुनने के बाद अदालत ने कहा कि global injunction का मुद्दा पहले से ही डिवीजन बेंच के सामने विचाराधीन है। अदालत ने संकेत दिया कि Google ने फिलहाल वह कदम उठाया है जो उसके स्तर पर संभव था, जबकि बाकी मुद्दा डिवीजन बेंच के निर्णय पर निर्भर करेगा।
अदालत ने सचदेवा को यह विकल्प भी दिया कि यदि वह इस मुद्दे को कुछ समय तक लंबित रखना चाहती हैं, तो ऐसा कर सकती हैं।
केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा ने मामले में व्यापक अनुपालन की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने अदालत के सामने तर्क दिया कि एक बार किसी वीडियो पर आपत्ति दर्ज हो जाने और आदेश पारित होने के बाद कार्रवाई को केवल एक स्तर तक सीमित रखने से विवाद दोबारा सामने आ सकता है।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि यदि स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं होते हैं, तो एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक वही सामग्री पहुंचने के कारण लगातार नई याचिकाएं दाखिल होने का सिलसिला चल सकता है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई 3 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार संबंधित वीडियो भारत में YouTube पर withheld है। हालांकि, इसे global level पर हटाने का प्रश्न अभी डिवीजन बेंच के समक्ष विचाराधीन है।
इसलिए इस चरण पर यह कहना उचित नहीं होगा कि वीडियो को पूरी तरह और दुनियाभर से हटाने का अंतिम आदेश हो चुका है। Global injunction को लेकर आगे का फैसला डिवीजन बेंच की कार्यवाही पर निर्भर करेगा।
विवाद 21 मार्च को प्रकाशित “Can Hindus eat BEEF? Kerala Story 2 Exposed” नाम के YouTube वीडियो को लेकर है।
Google के अनुसार वीडियो भारत में withheld किया गया है। हालांकि, इसे globally हटाया नहीं गया है क्योंकि global injunction से जुड़ा मुद्दा डिवीजन बेंच के सामने लंबित है।
GAC ने 15 जुलाई को वीडियो को 24 घंटे के भीतर हटाने का आदेश दिया था।
मामले में वकील अमिता सचदेवा याचिकाकर्ता हैं। उन्होंने वीडियो के खिलाफ आपत्ति जताने के साथ इसके संबंध में आपराधिक मामला भी दर्ज कराया है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले को 3 सितंबर के लिए स्थगित किया है।
नहीं। Global injunction का मुद्दा डिवीजन बेंच के समक्ष विचाराधीन बताया गया है। इसलिए इस पर अंतिम स्थिति डिवीजन बेंच के फैसले के बाद स्पष्ट होगी।
Disclaimer: यह रिपोर्ट अदालत में हुई कार्यवाही और उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों पर आधारित है। इसमें किसी पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों को अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है। मामले में आगे अदालतों के निर्णय के अनुसार स्थिति बदल सकती है।