केंद्रीय बजट 2026 को लेकर उद्योग जगत, टैक्स एक्सपर्ट्स और निवेशकों की नजरें टिकी हुई हैं। पिछले साल के बड़े टैक्स ओवरहॉल के बाद, जिसमें नई टैक्स व्यवस्था के तहत ₹12 लाख तक की आय को टैक्स-फ्री किया गया था, इस बार बड़े बदलावों के बजाय फाइन-ट्यूनिंग की उम...

केंद्रीय बजट 2026 को लेकर उद्योग जगत, टैक्स एक्सपर्ट्स और निवेशकों की नजरें टिकी हुई हैं। पिछले साल के बड़े टैक्स ओवरहॉल के बाद, जिसमें नई टैक्स व्यवस्था के तहत ₹12 लाख तक की आय को टैक्स-फ्री किया गया था, इस बार बड़े बदलावों के बजाय फाइन-ट्यूनिंग की उम्मीद जताई जा रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, बजट 2026 में सरकार स्टैंडर्ड डिडक्शन को मौजूदा ₹75,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख कर सकती है, ताकि महंगाई के असर को कुछ हद तक कम किया जा सके। इसके अलावा, इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव (Slab Rationalisation) की भी चर्चा है। संभावनाओं में शामिल हैं, निचले टैक्स स्लैब का विस्तार 30% टैक्स स्लैब की सीमा ₹15 लाख से बढ़ाकर ₹30 लाख करना टैक्स प्रोफेशनल्स की एक बड़ी मांग यह भी है कि Section 80D (हेल्थ इंश्योरेंस) के लाभों को नई टैक्स व्यवस्था में शामिल किया जाए।
Section 80EEA को दोबारा लागू या एक्सटेंड किया जा सकता है
मिड-इनकम होमबायर्स के लिए ज्यादा टैक्स रिबेट
PMAY (प्रधानमंत्री आवास योजना) का दायरा बढ़ाया जा सकता है
कैपिटल मार्केट निवेशक LTCG और STCG टैक्स में संभावित बदलावों पर नजर बनाए हुए हैं।
इक्विटी LTCG की छूट सीमा ₹1.25 लाख से बढ़ाकर ₹2 लाख
टैक्स दरों में कुछ राहत
ब्याज और किराये पर TDS लिमिट बढ़ाने
टैक्स कंप्लायंस को सरल बनाने
ITR फाइलिंग की डेडलाइन बढ़ाने जैसी मांगें भी सामने आ रही हैं।
सरकार से उम्मीद है कि वह ₹11–12 लाख करोड़ के दायरे में कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) को बनाए रखेगी।
सड़क और रेलवे
शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर
ग्रीन एनर्जी
डिफेंस, सीमा पर जारी तनाव के चलते डिफेंस बजट में बढ़ोतरी और Atmanirbhar Bharat के तहत घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलने की संभावना है। इंडस्ट्री PPP मॉडल, एसेट मोनेटाइजेशन (करीब ₹10 लाख करोड़ का लक्ष्य) और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करने के लिए इंसेंटिव्स की भी उम्मीद कर रही है।
बजट 2026 में सरकार राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने पर जोर दे सकती है। अनुमान है कि: फिस्कल डेफिसिट GDP के 4.4% या 4.3% के आसपास रह सकता है, रेवेन्यू डेफिसिट और कर्ज-GDP अनुपात को नियंत्रण में रखा जाएगा वैश्विक स्तर पर संभावित ट्रेड वॉर, अमेरिकी टैरिफ और घरेलू मांग में सुस्ती जैसे जोखिमों को देखते हुए सरकार सतर्क रुख अपना सकती है।
मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट: PLI स्कीम का विस्तार, कच्चे माल पर ड्यूटी कट
ग्रीन एनर्जी: रिन्यूएबल्स, ग्रीन हाइड्रोजन और EV सेक्टर को ज्यादा फंड
एग्रीकल्चर: MSP सपोर्ट, ग्रामीण योजनाएं और इनपुट लागत से राहत
एजुकेशन और स्किलिंग: NEP लागू करने और जॉब क्रिएशन पर फोकस
MSME और स्टार्टअप्स: आसान क्रेडिट, कंप्लायंस में छूट
डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक्स: भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में इंसेंटिव
FY26 के लिए GDP ग्रोथ 7–7.5% रहने का अनुमान है। बजट से घरेलू मांग और निवेश को सपोर्ट करने वाले ऐलानों की उम्मीद है।
कैपेक्स की निरंतरता
इक्विटी-फ्रेंडली टैक्स फैसलों
बड़े रिफॉर्म अनाउंसमेंट्स पर रहेंगी
FICCI, CII और JM Financial के सर्वे में जॉब क्रिएशन, इंफ्रास्ट्रक्चर और एक्सपोर्ट को टॉप प्राथमिकता बताया गया
टैक्स एक्सपर्ट्स नई टैक्स व्यवस्था में मिडिल क्लास को टार्गेटेड राहत की उम्मीद कर रहे हैं
Economic Survey (31 जनवरी) में ग्रोथ फोरकास्ट 7.3–7.4% रहने की संभावना
रविवार को बजट पेश होना इसे ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक बनाता है,