8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) से जुड़ा एक अहम अपडेट सामने आया है। आयोग ने केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) के लिए कर्मचारी जानकारी अपलोड करने की अंतिम तिथि एक महीने बढ़ाकर 31 जुलाई 2026 कर दी है।

8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) से जुड़ा एक अहम अपडेट सामने आया है। आयोग ने केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) के लिए कर्मचारी जानकारी अपलोड करने की अंतिम तिथि एक महीने बढ़ाकर 31 जुलाई 2026 कर दी है।
आयोग की ओर से जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, कुछ सरकारी कार्यालय तय समय सीमा तक आवश्यक जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड नहीं कर सके थे। इसी कारण उन्हें अतिरिक्त समय दिया गया है।
हालांकि, इस फैसले का वेतन संशोधन (Salary Revision), महंगाई भत्ता (DA), पेंशन या आयोग की सिफारिशों के लागू होने की तारीख से कोई सीधा संबंध नहीं है।
आयोग ने कहा कि कई मंत्रालयों, विभागों और केंद्र शासित प्रदेशों से अभी भी आवश्यक कर्मचारी डेटा प्राप्त नहीं हुआ है।
देशभर में बड़ी संख्या में सरकारी संस्थानों से जानकारी जुटाई जा रही है। ऐसे में सभी विभागों से सटीक और पूरी जानकारी सुनिश्चित करने के लिए डेटा अपलोड की समय सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
आयोग ने सभी नोडल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे 31 जुलाई 2026 तक लंबित जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करें।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि केवल आधिकारिक Data Collection Portal पर अपलोड किया गया डेटा ही मान्य होगा।
ईमेल, हार्ड कॉपी, एक्सेल शीट या पीडीएफ के माध्यम से भेजी गई जानकारी स्वीकार नहीं की जाएगी। इसका उद्देश्य सभी सरकारी विभागों से एक समान प्रारूप में डेटा एकत्र करना है।
डेटा संग्रह 8वें वेतन आयोग के शुरुआती और सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में से एक है।
आयोग केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों, विभागों और विभिन्न सरकारी संस्थानों से विस्तृत जानकारी जुटा रहा है ताकि उसे कर्मचारियों की संख्या, स्टाफिंग पैटर्न, कार्यबल की आवश्यकता और सरकारी खर्च का समग्र आकलन मिल सके।
इसी आधार पर भविष्य में वेतन, भत्तों और अन्य सेवा शर्तों से जुड़ी सिफारिशें तैयार की जाएंगी।
हाँ। नियमित कर्मचारियों के अलावा आयोग ने कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्स कर्मचारियों से संबंधित जानकारी भी मांगी है।
सरकारी विभागों से वित्त वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के दौरान एजेंसियों के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों का विवरण मांगा गया है।
इसमें कई श्रेणियों के कर्मचारी शामिल हैं, जैसे—
आयोग ने इन कर्मचारियों का डेटा केवल संख्या के आधार पर नहीं बल्कि Man-Months के रूप में मांगा है। इससे यह पता चल सकेगा कि कितने कर्मचारी कितने समय तक कार्यरत रहे।
हालांकि, सलाहकार (Consultants), सेवानिवृत्त विशेषज्ञ और अन्य पेशेवरों का डेटा अलग प्रक्रिया के तहत एकत्र किया जा रहा है।
आयोग केवल वेतन संशोधन तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वह यह भी समझना चाहता है कि वर्तमान समय में केंद्र सरकार का कार्यबल किस प्रकार काम कर रहा है।
इसके तहत यह अध्ययन किया जाएगा कि विभिन्न विभाग नियमित कर्मचारियों और आउटसोर्स स्टाफ पर किस हद तक निर्भर हैं तथा भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार कार्यबल की योजना कैसे बनाई जा सकती है।
केंद्र सरकार ने जनवरी 2025 में 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दी थी।
इसके बाद आयोग ने विभिन्न सरकारी संगठनों से जानकारी जुटाने का प्रारंभिक कार्य शुरू किया।
हालांकि, आयोग के Terms of Reference (ToR) अभी तक आधिकारिक रूप से अधिसूचित नहीं किए गए हैं।
जब तक ToR जारी नहीं होते और डेटा संग्रह की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक कर्मचारी संगठनों, मंत्रालयों और अन्य हितधारकों के साथ विस्तृत चर्चा शुरू होने की संभावना कम है।
फिलहाल आयोग की प्राथमिकता नियमित कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, सलाहकारों, संविदा कर्मचारियों और आउटसोर्स कार्यबल का व्यापक डेटाबेस तैयार करना है।
नहीं। आयोग द्वारा जारी नवीनतम आदेश केवल कर्मचारी डेटा जमा करने की समयसीमा बढ़ाने से संबंधित है।
इस आदेश में कहीं भी वेतन संशोधन, महंगाई भत्ता (DA), पेंशन, अन्य भत्तों या 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की तारीख का उल्लेख नहीं किया गया है।
यानी फिलहाल आयोग केवल जानकारी एकत्र करने के चरण में है और वेतन संरचना पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
8वें वेतन आयोग द्वारा डेटा जमा करने की समयसीमा बढ़ाया जाना प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसका सीधा संबंध कर्मचारियों की सैलरी बढ़ोतरी या आयोग की सिफारिशों के लागू होने की तारीख से नहीं है। फिलहाल आयोग व्यापक स्तर पर कर्मचारियों और आउटसोर्स कार्यबल का डेटा एकत्र कर रहा है ताकि भविष्य में वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों पर ठोस और तथ्य आधारित सिफारिशें तैयार की जा सकें।