मंगलवार को लोकसभा में भारी हंगामे के बाद 8 विपक्षी सांसदों को सस्पेंड कर दिया गया। आरोप है कि इन सांसदों ने कार्यवाही के दौरान हंगामा किया और स्पीकर की कुर्सी की ओर कागज़ फेंके। इस घटना के बाद सदन को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया। यह कार्रवाई Kiren R...

लोकसभा अध्यक्ष Om Birla की अनुपस्थिति में कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Krishna Prasad Tenneti ने इस व्यवहार को संसदीय गरिमा के खिलाफ बताया। चेयर ने साफ कहा कि बजट सत्र जैसे अहम समय में इस तरह का आचरण बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सदन स्थगित होने के बाद BJP नेताओं ने आरोप लगाया कि विपक्षी सांसदों का विरोध अनुशासनहीनता से आगे बढ़कर दुर्व्यवहार में बदल गया। BJP ने यह भी ऐलान किया कि वह इस पूरे घटनाक्रम को लेकर लोकसभा स्पीकर से औपचारिक शिकायत दर्ज कराएगी।
इस पूरे विवाद की जड़ में है पूर्व सेना प्रमुख Manoj Mukund Naravane की अप्रकाशित (unpublished) संस्मरण पुस्तक। लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi इस किताब के एक अंश का हवाला देना चाहते थे, जिसे चेयर ने संसदीय नियमों के खिलाफ बताया।
राहुल गांधी ने कहा कि:
चीन–अमेरिका टकराव एक बड़ा वैश्विक मुद्दा है
भारत भी चीन के साथ सीमा विवाद का सामना कर रहा है
यह विषय राष्ट्रपति के अभिभाषण और बजट से जुड़ा है, हालांकि, चेयर ने उन्हें केवल राष्ट्रपति के अभिभाषण तक सीमित रहने को कहा।
इस मुद्दे पर Amit Shah और Rajnath Singh दोनों ने आपत्ति जताई। उनका कहना था कि: संसद में केवल प्रकाशित दस्तावेज़ों का ही हवाला दिया जा सकता है unpublished सामग्री नियमों के तहत स्वीकार्य नहीं है
सांसदों के निलंबन के बाद:
Priyanka Gandhi Vadra
राहुल गांधी
अन्य कांग्रेस सांसद ने संसद के मकर द्वार पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रियंका गांधी ने इस फैसले को “हास्यास्पद” बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में हर सांसद को बोलने का अधिकार है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “प्रधानमंत्री Narendra Modi संसद में मुझे नरवणे मुद्दे पर बोलने देने से डरते हैं।” कांग्रेस ने कहा कि पार्टी को चुप कराने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वह राष्ट्रीय मुद्दों पर आवाज़ उठाती रहेगी।
सुबह 11 बजे सदन शुरू होते ही स्थगित
दोपहर 12 और 2 बजे फिर हंगामा
3 बजे कार्यवाही शुरू होते ही 8 सांसद सस्पेंड
इसके बाद पूरे दिन के लिए लोकसभा स्थगित, बुधवार को सुबह 11 बजे दोबारा कार्यवाही शुरू होने की संभावना है।
यह मामला सिर्फ 8 सांसदों के निलंबन तक सीमित नहीं है।
यह सवाल उठाता है कि:
क्या राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बहस रोकी जा रही है?
या फिर संसद की मर्यादा को बचाने के लिए सख्ती जरूरी थी?
फिलहाल संसद का माहौल पूरी तरह गरम है और आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने के संकेत दे रहा है।
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