Nagpur NGO Sexual Harassment: नासिक के अशोक खरात, TCS कांड और अमरावती MMS मामले के बाद अब एक और नया Nagpur NGO Sexual Harassment मामला सामने आ रहा है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। यह मामला किसी धार्मिक संस्था या किसी कॉरपोरेट ऑफिस का नहीं बल्कि एक सामाजिक संस्था से जुड़ा है।
एक NGO जो कथित तौर पर गरीब और बच्चों के लिए काम करता है। इस NGO ने महिला सुरक्षा को लेकर देश में फिर से बहस छेड़ दी है। NGO के प्रमुख फ़ज़िल काज़ी पर महिला कर्मचारियों से यौन उत्पीड़न, जबरन धार्मिक दबाव और मानसिक प्रताड़ना जैसे गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं।
Nagpur NGO Sexual Harassment वाला मामला इतना बढ़ गया है कि अब इसमें टेररिज्म के लिंक भी मिलने की सम्भावना जताई जा रही है। इस जांच में अब ATS स्क्वाड जुड़ चुकी है। इस मामले से जुड़े वीडियो और कई फोटोस भी सोशल मीडिया पर धारण जैसे वायरल हो रही है।
क्या है Nagpur NGO Sexual Harassment और कौन है यह फ़ज़ील काज़ी
नागपुर स्थित एक NGO जो महिला और बाल विकास के लिए काम करता है, उसी के प्रमुख हैं यह फ़ज़ील काज़ी, अचानक से यह मामला सुर्खियों में तब आया जब इस NGO के खिलाफ एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई।
महिला ने शिकायत में कहा कि यह आरोपी NGO में काम करने वाली महिलाओं के साथ अनुचित व्यवहार करता है। उन्हें Sexually Harass करता है और धर्म बदलने का दबाव बनाता है।
बताया जा रहा है कि यह NGO समाज सेवा के नाम पर चलाया तो जा रहा है, लेकिन अंदरूनी माहौल काफी भयानक है। एक के बाद एक महिलाओं ने शिकायत शुरू कर दी है जिसके बाद Nagpur NGO Sexual Harassment वाले मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे भी सामने आ रहे हैं।
जबरन kiss करना और गलत तरीके से छूना!
इस NGO में काम करने वाली कई पीड़ित महिलाओं और कर्मचारियों ने NGO के ऑर्गेनाइजर फ़ज़ील काज़ी पर इल्जाम लगाया है कि वह उन्हें जबरन किस करता है। निजी सीमाओं का उल्लंघन करता है। गलत तरीके से छूता है। इतना ही नहीं दूसरे धर्म को मानने वाले लोगों पर धर्म बदलने का जोर बनाता है।
कार्य स्थल पर इस व्यक्ति माहौल को काफी डरावना बनाकर रखा था, FIR के मुताबिक यह व्यक्ति संगठन में काम करने वाले कर्मचारियों को मानसिक रूप से परेशान भी करता था और विरोध करने पर बदनामी की धमकी देता था।
NGO में बनाया था डरावना माहौल
जब पुलिस ने इस Nagpur NGO Sexual Harassment केस की जांच की तो पता चला कि NGO के भीतर नियंत्रित माहौल बनाया गया था। मतलब महिला कर्मचारियों पर नजर रखने के लिए फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाए गए थे। महिलाओं की गतिविधियों को नोटिस किया जाता। NGO का माहौल इतना टॉक्सिक बना दिया गया था कि कई कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ दी। NGO में होने वाला उत्पीड़न और ऊपर से इस प्रकार का कंट्रोलिंग व्यवहार यह मामला यौन उत्पीड़न तक सीमित नहीं था बल्कि साइबर स्टॉकिंग तक भी पहुंच गया था।
आतंकी गतिविधियों की संभावना
Nagpur NGO Sexual Harassment केस की गंभीरता को देखते हुए इस मुद्दे में अब एंटी टेररिज्म स्क्वाड ATS भी जुड़ चुका है, क्योंकि इस मुद्दे में धर्म परिवर्तन की खबरें काफी जोर पकड़ रही हैं। साथ ही NGO की फंडिंग गतिविधियों और नेटवर्क का दायरा देखते हुए पुलिस को अंदेशा हो रहा है कि इसकी फंडिंग कहीं बाहर से आई थी।
हिंदू धर्म की महिलाओं को कर्मचारी नियुक्त करना, उनका शारीरिक और मानसिक शोषण करना, उन पर धर्म बदलने का दबाव बनाना, हिंदू धर्म के पुरुषों को भी टॉर्चर करना, साइबर स्टॉकिंग करना इत्यादि. हरकतों की वजह से पुलिस को लग रहा है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता इसके पीछे बहुत बड़ा नेटवर्क होने के चांसेस है।
देश भर में मिल रहे हैं एक ही तरह के पैटर्न
देश भर में एक के बाद एक ऐसे मामले सामने आते जा रहे हैं। TCS नासिक, अमरावती और अब यह नागपुर का NGO देश भर में इस प्रकार के आरोपो को भरमार भबढ़ती जा रही है। मतलब पुलिस को लग रहा है कि यह एक व्यापक पैटर्न हो सकता है जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बनाया जा रहा हो। साथ ही कर्मचारियों पर धर्म बदलने का दबाव डाला जा रहा हो। फिलहाल आरोपी फ़ज़ील काज़ी को गिरफ्तार कर लिया गया है। ATS और पुलिस अपने तरीके से सच्चाई उगलवाने में लगी है।
कुल मिलाकर Nagpur NGO Sexual Harassment मामला केवल महिलाओं के शारीरिक शोषण और सेक्सुअल एब्यूज तक का मामला नहीं रहा, अब यह बहुत बड़ा पैटर्न और नेटवर्क बन चुका है जिसमें आने वाले दिनों में और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।

















