सोचिए, आपके फोन में कोई ऐसा वीडियो, ऑडियो या WhatsApp चैट है जो किसी केस में अहम सबूत बन सकता है। अब तक ऐसे मामलों में लोगों को अपना मोबाइल कोर्ट या जांच एजेंसी के पास जमा करना पड़ सकता था। लेकिन मध्य प्रदेश में यह व्यवस्था जल्द बदल सकती है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने डिजिटल सबूतों को लेकर Electronic Records Rules 2026 का ड्राफ्ट तैयार किया है। अगर राज्य सरकार इसे मंजूरी दे देती है तो वीडियो, ऑडियो, WhatsApp चैट, CCTV फुटेज और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स को अदालत में पेश करना पहले से कहीं ज्यादा आसान और सुरक्षित हो जाएगा। यह व्यवस्था लागू होने पर मध्य प्रदेश डिजिटल साक्ष्य प्रबंधन के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।

क्या हैं Electronic Records Rules 2026?

Electronic Records Rules 2026

डिजिटल दौर में अपराध और कानूनी विवादों के सबूत भी तेजी से डिजिटल होते जा रहे हैं। WhatsApp मैसेज, ई-मेल, बैंक ट्रांजैक्शन, कॉल रिकॉर्ड, CCTV फुटेज और मोबाइल वीडियो अब अदालतों में महत्वपूर्ण साक्ष्य बन चुके हैं। इन्हीं बदलती जरूरतों को देखते हुए हाई कोर्ट ने एक ऐसी प्रणाली प्रस्तावित की है जिसमें इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स को सुरक्षित तरीके से जमा, संरक्षित और सत्यापित किया जा सके। इसका मकसद डिजिटल सबूतों की विश्वसनीयता बनाए रखना और छेड़छाड़ की संभावना को खत्म करना है।

अब मोबाइल जमा करने की जरूरत नहीं होगी

नए नियमों की सबसे बड़ी खासियत यही है। यदि किसी व्यक्ति के पास वीडियो रिकॉर्डिंग, ऑडियो क्लिप, स्क्रीनशॉट या WhatsApp चैट जैसे डिजिटल सबूत हैं तो उसे पूरा मोबाइल जमा नहीं करना पड़ेगा। संबंधित डेटा को निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपलोड किया जाएगा और सिस्टम एक यूनिक आईडी जनरेट करेगा। इसके बाद व्यक्ति अपना मोबाइल वापस रख सकेगा। केवल विशेष परिस्थितियों में अदालत डिवाइस को सुरक्षित रखने या डेटा हटाने संबंधी निर्देश दे सकती है। यह बदलाव आम लोगों के लिए काफी राहतभरा माना जा रहा है।

डिजिटल सबूत से छेड़छाड़ करना लगभग नामुमकिन होगा

आज सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि वीडियो या ऑडियो असली है या उसमें बदलाव किया गया है। नए नियमों के तहत हर इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की एक विशेष “Hash Value” बनाई जाएगी। यह डिजिटल फिंगरप्रिंट की तरह काम करेगी। अगर रिकॉर्ड में एक सेकंड का बदलाव भी किया गया तो Hash Value बदल जाएगी और तुरंत पता चल जाएगा कि सबूत के साथ छेड़छाड़ हुई है। इससे अदालतों को प्रमाणिकता की जांच करने में काफी मदद मिलेगी।

यौन अपराधों में पीड़ित की पहचान पूरी तरह सुरक्षित रहेगी

Electronic Records Rules 2026

यौन अपराधों से जुड़े मामलों में गोपनीयता सबसे बड़ा मुद्दा होता है। ड्राफ्ट नियमों के अनुसार ऐसे मामलों के इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध नहीं होंगे। केवल अदालत को ही रिकॉर्ड देखने की अनुमति होगी। वकील और संबंधित पक्ष भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही रिकॉर्ड देख सकेंगे। इससे पीड़ित की पहचान और निजी जानकारी सुरक्षित बनी रहेगी।

डिजिटल सबूत बनेगा एक पैकेज फाइल

नए सिस्टम में सिर्फ वीडियो या चैट ही अपलोड नहीं होगी। उसके साथ समय, तारीख, स्रोत, हैश वैल्यू और यूनिक आईडी जैसी तकनीकी जानकारी भी जोड़ दी जाएगी। यह पूरी जानकारी मिलकर एक “पैकेज फ़ाइल” तैयार करेगी। अदालत में इसी पैकेज फाइल को आधिकारिक डिजिटल साक्ष्य माना जाएगा।

ई-सेवा केंद्रों से होगा सबूत अपलोड

हर व्यक्ति तकनीकी रूप से सक्षम नहीं होता। इसे ध्यान में रखते हुए जिला अदालतों के ई-सेवा केंद्रों को इस प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है। वकील या आम नागरिक इन केंद्रों पर जाकर डिजिटल साक्ष्य अपलोड कर सकेंगे। इससे ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के लोगों को भी सुविधा मिलेगी। हालांकि यदि कोई जानबूझकर गलत डेटा अपलोड करता है या प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई और जुर्माने का प्रावधान भी हो सकता है।

ये नए नियम क्यों जरूरी हैं?

नए आपराधिक कानूनों के बाद तलाशी और जब्ती की वीडियो रिकॉर्डिंग को भी महत्व दिया गया है। साथ ही साइबर अपराधों और ऑनलाइन लेनदेन से जुड़े मामलों में डिजिटल सबूतों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में अदालतों के पास एक आधुनिक और सुरक्षित सिस्टम होना समय की जरूरत बन गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

Electronic Records Rules 2026 सिर्फ एक नया नियम नहीं, बल्कि भारतीय न्याय व्यवस्था को डिजिटल युग के अनुरूप बनाने की बड़ी पहल है। अगर यह लागू होता है तो लोगों को मोबाइल जमा कराने की परेशानी से राहत मिलेगी, डिजिटल सबूतों की सुरक्षा बढ़ेगी और अदालतों में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स की विश्वसनीयता भी मजबूत होगी।

Also Read – शाजापुर को 388 करोड़ की सौगात: CM मोहन यादव ने 43 विकास कार्यों का कि