भोपाल में हजारों किसान मूंग की 100% MSP पर सरकारी खरीद और ई-टोकन व्यवस्था खत्म करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। जानें आंदोलन की वजह।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मूंग की 100% न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सरकारी खरीद की मांग को लेकर किसानों का बड़ा आंदोलन जारी है। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के नेतृत्व में हजारों किसान नर्मदापुरम से मार्च करते हुए भोपाल पहुंच चुके हैं। प्रदर्शनकारी किसान अपने साथ एक सप्ताह का राशन, पानी, बिस्तर और जरूरी सामान लेकर आए हैं और सावरकर सेतु के पास डेरा डाले हुए हैं। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
किसानों की सबसे बड़ी मांग है कि सरकार मूंग की पूरी फसल की 100% खरीद MSP पर करे। उनका कहना है कि वर्तमान में मूंग की खरीद प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत होती है, जिसमें सीमित मात्रा में ही खरीद की जाती है। इससे बड़ी संख्या में किसानों को अपनी उपज खुले बाजार में कम कीमत पर बेचनी पड़ती है।
इसके अलावा किसान खाद वितरण में लागू ई-टोकन व्यवस्था को भी खत्म करने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि इस व्यवस्था के कारण समय पर खाद नहीं मिल पाती, जिससे खेती प्रभावित होती है।
मध्य प्रदेश सरकार ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। राज्य के किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री ऐदल सिंह कंसाना ने केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan को पत्र लिखकर बताया कि राज्य में इस वर्ष करीब 8.06 लाख मीट्रिक टन मूंग का उत्पादन हुआ है, जबकि अब तक 4.54 लाख मीट्रिक टन खरीद का ही लक्ष्य तय किया गया है। ऐसे में बड़ी संख्या में किसान MSP का लाभ नहीं उठा पाएंगे।
किसानों का कहना है कि केंद्र सरकार ने अरहर, उड़द और मसूर जैसी दालों की 100% MSP खरीद की घोषणा की है, लेकिन मूंग के लिए यह व्यवस्था लागू नहीं है। उनका कहना है कि MSP 8,768 रुपये प्रति क्विंटल तय होने के बावजूद उन्हें बाजार में इससे काफी कम कीमत पर फसल बेचनी पड़ रही है।
किसान नेता संतोष पटवारी का कहना है कि कई बार सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के बावजूद समाधान नहीं निकला। इसलिए अब राजधानी में आंदोलन करना उनकी मजबूरी बन गई है।
यह आंदोलन नर्मदापुरम के सेठानी घाट से शुरू हुआ। शुरुआत में प्रशासन ने किसानों को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की, लेकिन बाद में बैरिकेड हटाने पड़े और किसान भोपाल की ओर बढ़ गए। रास्ते में ओबैदुल्लागंज, रायसेन और मंडीदीप सहित कई स्थानों पर पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी।
किसानों के आंदोलन को देखते हुए भोपाल में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। कई प्रमुख मार्गों पर बैरिकेड लगाए गए हैं और वरिष्ठ अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। प्रशासन ने किसान नेताओं से मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करने के बजाय ज्ञापन सौंपने की अपील भी की है।
आंदोलन की वजह से होशंगाबाद रोड और आसपास के इलाकों में ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित हुई है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुछ स्कूलों में अवकाश भी घोषित किया गया है ताकि विद्यार्थियों और अभिभावकों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
किसान संगठनों का कहना है कि पिछले कई सीजन से उन्हें खरीद में देरी, सीमित खरीद, रजिस्ट्रेशन की समस्याएं और खाद की कमी जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि बाजार में फसलों के उचित दाम नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में किसानों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
फिलहाल हजारों किसान भोपाल में डटे हुए हैं और मुख्यमंत्री आवास तक मार्च की तैयारी कर रहे हैं। दूसरी ओर प्रशासन लगातार किसानों से बातचीत की कोशिश कर रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार किसानों की मांगों पर क्या फैसला लेती है और आंदोलन का समाधान कैसे निकलता है।