मध्य प्रदेश में एक बार फिर किसानों का बड़ा आंदोलन देखने को मिल रहा है। करीब 2,000 किसान कई दिनों का राशन, बिस्तर और जरूरी सामान लेकर नर्मदापुरम से भोपाल तक पैदल मार्च करते हुए पहुंचे। इन किसानों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानेगी, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे। इस प्रदर्शन ने राज्य की राजनीति और कृषि व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मध्य प्रदेश में एक बार फिर किसानों का बड़ा आंदोलन देखने को मिल रहा है। करीब 2,000 किसान कई दिनों का राशन, बिस्तर और जरूरी सामान लेकर नर्मदापुरम से भोपाल तक पैदल मार्च करते हुए पहुंचे। इन किसानों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानेगी, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे। इस प्रदर्शन ने राज्य की राजनीति और कृषि व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
किसानों की सबसे बड़ी मांग है कि मूंग की फसल की 100% खरीद Minimum Support Price (MSP) पर की जाए। इस साल मध्य प्रदेश में मूंग की अच्छी पैदावार हुई है। लेकिन किसानों का आरोप है कि सरकार केवल सीमित मात्रा में ही MSP पर खरीद कर रही है। बाकी फसल उन्हें खुले बाजार में कम दाम पर बेचनी पड़ रही है, जिससे भारी नुकसान हो रहा है। सरकार द्वारा तय MSP ₹8,768 प्रति क्विंटल है, लेकिन खुले बाजार में किसानों को इससे काफी कम कीमत मिल रही है। यही वजह है कि किसान पूरी खरीद की मांग कर रहे हैं।
मध्य प्रदेश देश का सबसे बड़ा मूंग उत्पादक राज्य है। इस साल लाखों टन मूंग का उत्पादन हुआ है, लेकिन केंद्र सरकार ने Price Support Scheme (PSS) के तहत सीमित खरीद की मंजूरी दी है। किसानों का कहना है कि जब फसल पूरी उनकी है, मेहनत पूरी उनकी है, तो खरीद भी पूरी होनी चाहिए। अगर केवल कुछ प्रतिशत फसल ही MSP पर खरीदी जाएगी, तो बाकी फसल सस्ते दामों में बेचने की मजबूरी होगी। यही वजह है कि हजारों किसान सड़कों पर उतर आए हैं।
इस आंदोलन में किसानों ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं।
किसानों का कहना है कि वर्तमान ई-टोकन व्यवस्था के कारण कई किसान पंजीकरण कराने के बावजूद अपनी फसल बेच ही नहीं पा रहे हैं।

सरकार ने खरीद प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के लिए ई-टोकन सिस्टम शुरू किया था। लेकिन किसानों का आरोप है कि स्लॉट नहीं मिलते, तकनीकी समस्याएं आती हैं और कई बार टोकन मिलने के बाद भी खरीद केंद्रों पर फसल नहीं खरीदी जाती। इस साल लाखों किसानों ने पंजीकरण कराया, लेकिन उनमें से केवल एक छोटा हिस्सा ही अपनी मूंग MSP पर बेच पाया। बाकी किसान अब भी इंतजार कर रहे हैं।
#WATCH | Bhopal, Madhya Pradesh: Farmers march from Narmadapuram to Bhopal demanding 100% procurement of moong crop at Minimum Support Price (MSP) and related issues. pic.twitter.com/8HdzlLjzaX
— ANI MP/CG/Rajasthan (@ANI_MP_CG_RJ) July 28, 2026
जब किसान भोपाल की ओर बढ़ रहे थे, तब पुलिस ने कई जगह बैरिकेड लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की। भोपाल के बाहरी इलाके, ओबेदुल्लागंज और अन्य स्थानों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। हालांकि किसानों ने कई बैरिकेड पार कर दिए। पुलिस ने बल प्रयोग नहीं किया और बाद में किसानों को आगे बढ़ने दिया। किसान राष्ट्रीय ध्वज लेकर "जय जवान, जय किसान" के नारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे।
यह आंदोलन नर्मदापुरम के सेठानी घाट से शुरू हुआ। मार्च शुरू करने से पहले किसानों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया और फिर भोपाल के लिए पैदल यात्रा शुरू की। रास्ते में उनके साथ ट्रैक्टर-ट्रॉली भी चल रही थीं, जिनमें कई दिनों का भोजन, पानी और जरूरी सामान रखा गया था। किसानों ने साफ कहा कि वे बिना समाधान के वापस नहीं लौटेंगे।
मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि उसने केंद्र सरकार से मूंग खरीद की सीमा बढ़ाने की मांग की है। राज्य के कृषि मंत्री ने केंद्रीय कृषि मंत्री को पत्र लिखकर अधिक मात्रा में खरीद की अनुमति देने का अनुरोध किया है। सरकार का कहना है कि यदि खरीद सीमा बढ़ती है तो अधिक किसानों को MSP का लाभ मिल सकेगा। वहीं प्रशासन का दावा है कि पुलिस केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात की गई थी और किसानों से लगातार बातचीत की जा रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर किसानों की समस्या का जल्द समाधान करने की मांग की है। उनका कहना है कि खरीद प्रक्रिया में देरी के कारण किसान मजबूरी में अपनी मूंग कम दामों पर बेच रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
नहीं। किसानों का कहना है कि यह आंदोलन केवल मूंग खरीद तक सीमित नहीं है। उनका आरोप है कि पिछले कई वर्षों से किसानों को खाद की कमी, खरीद में देरी, ऑनलाइन पंजीकरण की समस्याएं और कम बाजार भाव जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बढ़ती खेती की लागत और घटती आय ने उनकी आर्थिक स्थिति को और मुश्किल बना दिया है।
अगर केंद्र सरकार खरीद सीमा बढ़ाने का फैसला करती है, तो आंदोलन शांत हो सकता है। लेकिन यदि किसानों की मुख्य मांगें पूरी नहीं होतीं, तो यह प्रदर्शन और बड़ा रूप ले सकता है। फिलहाल हजारों किसान भोपाल में डटे हुए हैं और सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। मध्य प्रदेश का यह किसान आंदोलन केवल एक फसल की खरीद का मुद्दा नहीं है, बल्कि किसानों की आय, सरकारी खरीद व्यवस्था और कृषि नीतियों से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है। किसानों की मांग है कि उनकी मेहनत का पूरा मूल्य मिले और सरकारी योजनाओं का लाभ हर किसान तक पहुंचे। अब सबकी नजर सरकार और केंद्र के अगले फैसले पर टिकी हुई है।