टाइगर स्टेट का दर्जा हासिल कर चुके मप्र में पिछले 6 माह में पूरे देश में सर्वाधिक 26 बाघों की मौतें हुई हैं। साल 2020 में भी पूरे मप्र में 20 बाघों की मौतें हुई थीं, लेकिन इस साल तो केवल 6 माह में ही रिकार्ड मौतें हुई हैं। मप्र के बाद बाघों की मौतों में महाराष्ट्र का स्थान है। तीसरे स्थान पर कर्नाटक है। बाघों की लगातार होती मौतों को लेकर वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट ने चिंता जताई है। 

वहीं पूरे देश में तेंदुओं की मौत के मामले में महाराष्ट्र नंबर 1 स्थान पर है। वहीं रिकार्ड 41 मौतों के साथ मप्र दूसरे स्थान पर है। वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट और आरटीआई कार्यकर्ता अजय दुबे की मानें तो इसका असर अगले साल होने वाली बाघों की गणना पर पड़ सकता है और मप्र अपना टाइगर स्टेट का तमगा खो सकता है। 

पूरे देश में 94 बाघों और 310 तेंदुओं की मौत : 
वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन सोसायटी ऑफ इंडिया (Wildlife protection society of India) की रिपोर्ट की मानें तो इस साल 1 जनवरी से लेकर 30 जून तक पूरे देश में 94 बाघों और 310 तेंदुओं की मौत हुई है। वहीं एनटीसीए के पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल इसी अवधि में 56 बाघों की मौत दर्ज हुई थी। बाघों की मौत में अचानक हुई इस बढ़ोत्तरी से वन्य प्राणी विशेषज्ञ चिंतित हैं। 

संस्था ने भी आंकड़ों के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ये सभी आंकड़े चौंकाने वाले हैं। क्याेंकि पिछले साल कुल 109 बाघों और 653 तेंदुओं की मौत दर्ज की गई थी। 

बाघ के शावक बचा सकते हैं टाइगर स्टेट का तमगा : 
वर्तमान में मप्र 526 बाघों के साथ देश में पहले स्थान पर है। वहीं स्थान पर 524 बाघों के साथ कर्नाटक है। इसके अलावा कर्नाटक में बाघों की मौतें भी कम हुई है। इस कारण मप्र के टाइगर स्टेट का तमगा छिनने की चिंता वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट कर रहे हैं।

बताया जा रहा है कि मप्र में टाइगर शावक (Tiger Cub) भी बड़ी संख्या में हैं। अगले साल तक ये सभी शावक बड़े हो जाएंगे, जो टाइगर स्टेट का तमगा छिनने से बचा सकते हैं। 


देश भर में 30 जून तक हुई तेंदुओं और बाघों की मौतें : 

राज्य          बाघ     
मप्र             26  
महाराष्ट्र        25 
कर्नाटक       11 
उप्र             09
उत्तराखंड     08

राज्य          तेंदुए 
महाराष्ट्र        95
मप्र             41
उत्तराखंड     38
राजस्थान      24
कश्मीर        20

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