मध्य प्रदेश में अब कोरोना से ज्यादा ब्लैक फंगस का संक्रमण लोगों को डराने लगा है। पूरे प्रदेश में अब तक म्यूकोरमाइकोसिस के 600 से ज्यादा मरीज मिल चुके हैं। इनमें से 31 लोगों की मौत हुई है। संक्रमण के तेजी से फैलने के कारण इसके इलाज में उपयोग होने वाली ड्रग एंफोटेरिसिन बी लाइपोसोमोल की कमी ने समस्या को और विकराल कर दिया है।
शुरुआती दौर में संक्रमण को खत्म करने की तैयारी :
चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग की मानें तो बीमारी की नि:शुल्क जांच के लिए विशेष डेस्क बनाई जा रही है। साथ ही नि:शुल्क एंडोस्कोपी जांच की भी व्यवस्था की जा रही है। वर्तमान में प्रदेश को सनफार्मा कंपनी से एंफोटेरिसिन बी लाइपोसोमोल की 2500 वायल प्राप्त हो चुकी हैं। वहीं 10 हजार वायल मायलॉन कंपनी उपलब्ध करवाएगी।
शुरुआती दौर में संक्रमण को खत्म करने की तैयारी :
चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग की मानें तो बीमारी की नि:शुल्क जांच के लिए विशेष डेस्क बनाई जा रही है। साथ ही नि:शुल्क एंडोस्कोपी जांच की भी व्यवस्था की जा रही है। वर्तमान में प्रदेश को सनफार्मा कंपनी से एंफोटेरिसिन बी लाइपोसोमोल की 2500 वायल प्राप्त हो चुकी हैं। वहीं 10 हजार वायल मायलॉन कंपनी उपलब्ध करवाएगी।
लापरवाही करने पर गंवाने पड़ रहे हैं अंग :
जीएमसी के ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. यशवीर बताते हैं कि संक्रमण सबसे पहले नाक से शुरू हो रहा है। इसलिए सबसे पहले नाक की जांच हम नोजल एंडोस्कोपी जिसे दूरबीन पद्धति से की जाती है। यदि संक्रमण सिर्फ नाक तक सीमित है तो नाक की सर्जरी कर फंगस को दूर कर दिया जाता हैं। यदि संक्रमण बढ़कर आंख या चेहरे पर पहुंच गया है तो फिर उस हिस्से की सर्जरी करना पड़ती है।
संक्रमण से निपटने टास्क फोर्स गठित :
इसी समस्या से निपटने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा एक टास्क फोर्स का गठन भी किया गया है। जिसमें प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी, चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री विश्वास सारंग, एसीएस एसपी दुबे और हमीदिया अस्पताल के लोकेंद्र दवे शामिल हैं।














