क्या पेट्रोल, डीज़ल और हवाई टिकटों के दाम बढ़ने वाले हैं? पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में चल रहे संकट ने दुनिया भर की चिंताओं को बढ़ा दिया है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने हाल ही में चेतावनी दी है कि अगर मौजूदा हालात ऐसे ही बने रहे, तो जुलाई या अगस्त तक वैश्विक तेल बाज़ार “रेड ज़ोन” में पहुँच सकता है। इसका भारत जैसे देशों पर सीधा असर पड़ सकता है, जो अपनी ज़रूरत का लगभग 85% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
होर्मुज़ जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया की तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुज़रता है। भारत भी सऊदी अरब, इराक, UAE और कुवैत जैसे देशों से अपना तेल आयात इसी रास्ते से करता है।

अगर इस क्षेत्र में कोई संघर्ष, हमला या जहाज़ों की आवाजाही में कोई रुकावट आती है, तो वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी से उछाल आएगा। यही वजह है कि भारत में पेट्रोल और डीजल के महंगे होने का खतरा बढ़ जाता है।
क्या भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें तुरंत बढ़ जाएँगी?
हालांकि, कीमतों में तुरंत और भारी बढ़ोतरी की संभावना कम है, लेकिन अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊँची बनी रहती हैं, तो इसका असर भारत में भी ज़रूर महसूस होगा। हाल ही में, देश में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में पहले ही ₹3 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो चुकी है।
भारत में ईंधन की कीमतें सिर्फ़ कच्चे तेल की लागत पर ही निर्भर नहीं करतीं। उन पर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर, अलग-अलग तरह के टैक्स, परिवहन लागत और तेल विपणन कंपनियों के मुनाफ़े के मार्जिन जैसे कारकों का भी असर पड़ता है। अगर तेल की कीमतें ऊँची बनी रहती हैं और रुपया कमज़ोर होता है, तो आम नागरिक पर आर्थिक बोझ बढ़ने की संभावना है।

हवाई टिकटें महंगी क्यों हो सकती हैं?
एयरलाइंस के लिए, एविएशन टर्बाइन फ़्यूल (ATF) उनकी सबसे बड़ी परिचालन लागत होती है। ईंधन की लागत एयरलाइन के कुल खर्च का लगभग 40% होती है। नतीजतन, तेल की कीमतों में किसी भी बढ़ोतरी का असर लगभग तुरंत ही हवाई किराए की दरों पर दिखाई देने लगता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में संकट बना रहता है, तो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों तरह की उड़ानों की लागत बढ़ सकती है। चूंकि छुट्टियों के मौसम में यात्रा की मांग पहले से ही ज़्यादा होती है, इसलिए टिकट की कीमतों में और भी उछाल आ सकता है।
सिर्फ़ पेट्रोल ही नहीं रोज़मर्रा की ज़रूरत की चीज़ें भी महंगी होंगी
तेल की बढ़ती कीमतों का असर सिर्फ़ पेट्रोल पंप तक ही सीमित नहीं है। इसका असर ट्रांसपोर्टेशन, सब्ज़ियों, ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं, बस के किराए, टैक्सियों, खेती और मैन्युफ़ैक्चरिंग तक फैलता है।

डीज़ल की ज़्यादा कीमतों से ट्रक ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ जाती है, जिससे सामान पहुंचाने का खर्च बढ़ जाता है। इसका सीधा असर बाज़ार की कीमतों पर पड़ता है। नतीजतन, आने वाले समय में महंगाई और बढ़ सकती है।
क्या भारत के पास कोई सुरक्षा कवच है?
पिछले कुछ सालों में, भारत ने रूस समेत कई देशों से तेल खरीदकर अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाई है। इसके अलावा, देश ‘रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार’ भी रखता है, जिनका इस्तेमाल आपातकालीन स्थितियों में किया जा सकता है। हालांकि, अगर यह संकट लंबे समय तक बना रहता है, तो इसके बुरे असर से खुद को पूरी तरह बचा पाना आसान काम नहीं होगा।
हालांकि स्थिति अभी पूरी तरह से काबू से बाहर नहीं हुई है, लेकिन खतरा लगातार बढ़ रहा है। अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, या अगर ‘हॉरमुज़ जलडमरूमध्य’ लंबे समय तक बाधित रहता है, तो भारत में पेट्रोल, डीज़ल, CNG और हवाई किराए की कीमतें बढ़ सकती हैं। इस संदर्भ में, आने वाले कुछ हफ़्तों को बेहद अहम माना जा रहा है।
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