प्रीमैरिटल स्क्रीनिंग (Premarital Screening) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें हर कपल्स को शादी से पहले कुछ परीक्षण कराने की सलाह दी जाती है जिससे उनमें गंभीर बीमारियों को प्रसारित होने से रोका जा सके।

भारत में 21वी सदी में भी लोग शादी से पहले मेडिकल जांच कराने के मामले में बहुत पीछे हैं। लेकिन अगर आप पढ़े-लिखे और समझदार हैं तो शादी से पहले प्रीमैरिटल स्क्रीनिंग जरूर करवाएं ताकि बाद में आपको और आपको होने वाले परिवार को किसी बीमारी का खतरा ना हो।
प्रीमैरिटल स्क्रीनिंग (Premarital Screening) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें हर कपल्स को शादी से पहले कुछ परीक्षण कराने की सलाह दी जाती है जिससे उनमें गंभीर बीमारियों को प्रसारित होने से रोका जा सके।
यहां हम प्रीमैरिटल स्क्रीनिंग (Premarital Screening) में होने वाले 4 जरूरी मेडिकल टेस्ट के बारे में बताने जा रहे हैं जो स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा सुक्षाए गए हैं।

आजकल शादी से पहले सेक्स करना आम बात हो गई है। इसलिए हर व्यक्ति को कई प्रकार के यौन संबंध होने का खतरा रहता है। STD Test के जरिए आप कई तरह के यौन रोगों जैसे एचआईवी/एड्स, और हेपेटाइटिस सी जैसी यौन बीमारियों के बारे में पता लगा सकते हैं। ये बीमारियों आप अपने पार्टनर तक ना पहुचांए इसलिए इनके बारे में पहले से पता होना जरूरी है।

इस टेस्ट के जरिए आपको और आपके पार्टनर को RH फैक्टर के बारे में पता लगाया जा सकता है। बच्चे के लिए कपल का RH फैक्टर एक जैसा होना चाहिए। ऐसे में अगर आप दोनों का ब्लड ग्रुप एक दूसरे के अनुकूल नहीं है तो आपको प्रेग्नेंसी में दिक्कत हो सकती है। यह समस्या बच्चे के लिए और भी घातक हो सकती है।

शादी के हर कपल बच्चे की प्लानिंग करते हैं, इसलिए शादी से पहले इनफर्टिलिटी टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। इनफर्टिलिटी टेस्ट प्रजनन अंगों के स्वास्थ्य और शुक्राणुओं की संख्या के बारे में जानकारी देता है। यह टेस्ट इसलिए जरूरी है क्योंकि अगर रिपोर्ट में आपको किसी भी तरह की दिक्कत आती है तो आप समय से पहले इसका इलाज करा सकें।

इस टेस्ट के जरिए कई जेनेटिक बीमारियों का पता लगाया जा सकता है। इस टेस्ट की मदद से आप अपनी बीमारियों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में फैलने से रोक सकते हैं। जिसमें ब्रेस्ट कैंसर, किडनी डिजीज, कोलन कैंसर और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियां शामिल हैं।
ये कुछ जरूरी टेस्ट हैं जो शादी से पहले हर कपल को जरूर कराने की सलाह दी जाती है जिससे गंभीर बीमारियों को बढ़ने से रोका जा सके या उनका इलाज समय से पहले किया जा सके ताकि भविष्य में लोगों को उनके वैवाहिक जीवन में समस्याओं का सामना ना करना पड़ें।
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