भारत में LPG सिलेंडर डिलीवरी सिस्टम को ज़्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए, 1 मई, 2026 से नए नियम लागू किए जा रहे हैं। इन नियमों के तहत, अब ग्राहकों को अपने गैस सिलेंडर पाने के लिए एक 'डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड' (DAC) दिखाना ज़रूरी होगा। इस कोड के ब...

DAC एक खास वेरिफिकेशन कोड है जो LPG सिलेंडर बुक करने के तुरंत बाद ग्राहक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा जाता है। यह कोड काफी हद तक OTP (वन टाइम पासवर्ड) की तरह काम करता है।
जब डिलीवरी करने वाला व्यक्ति सिलेंडर लेकर आपके घर आएगा, तो वह DAC मांगेगा। तब ग्राहक को अपने मोबाइल फ़ोन पर मिला कोड दिखाना होगा।
अगर सही कोड नहीं दिया जाता है, या अगर रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर अपडेटेड नहीं है, तो डिलीवरी रद्द की जा सकती है और सिलेंडर वापस ले जाया जा सकता है।
1. 35 दिनों का इंतज़ार
अब ग्राहकों को अपना अगला 14.2 kg का LPG सिलेंडर बुक करने से पहले 35 दिनों का इंतज़ार करना होगा। यह नियम सभी ग्राहकों पर लागू होगा, जिसमें 'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना' (PMUY) के लाभार्थी भी शामिल हैं।
2. ज़्यादा से ज़्यादा दो सिलेंडरों की सीमा
अब घरों में ज़्यादा से ज़्यादा सिर्फ़ दो LPG सिलेंडर रखने की इजाज़त होगी—एक जो अभी इस्तेमाल में है और एक जो एक्स्ट्रा (spare) के तौर पर रखा गया है।
3. मोबाइल नंबर अपडेट करना ज़रूरी
LPG बुकिंग और डिलीवरी के लिए अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर अपडेटेड रखना ज़रूरी है। अगर रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर गलत या इनएक्टिव है, तो आपको DAC नहीं मिलेगा, जिससे डिलीवरी की प्रक्रिया में दिक्कतें आ सकती हैं।
हाल के दिनों में, धोखाधड़ी वाली डिलीवरी, गलत बिलिंग और सब्सिडी के गलत इस्तेमाल से जुड़ी शिकायतें सामने आई हैं। कई मामलों में, सिलेंडर डिलीवर करने के बहाने पैसे ले लिए गए, जबकि ग्राहक को असल में गैस मिली ही नहीं। DAC सिस्टम के लागू होने से यह पक्का होगा कि सिलेंडर सिर्फ़ सही व्यक्ति को ही डिलीवर किया जाए। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और गैस चोरी जैसी समस्याओं को रोकने में मदद मिलेगी।