Navratri में Condom की बिक्री बढ़ने के दावे में कितना दम है? 2016-2017 की रिपोर्टों, Marketing की भूमिका और 2026 के अपुष्ट दावों की पूरी पड़ताल पढ़ें।

हर साल Navratri के दौरान सोशल मीडिया पर एक दावा लौट आता है: Garba के दिनों में Condom की बिक्री बढ़ जाती है, खासकर गुजरात में। Navratri 2026 में भी यह चर्चा फिर तेज हुई है। लेकिन क्या "देशभर में बिक्री आसमान छू रही है" जैसी बातें सबूतों पर टिकती हैं?
हमारी पड़ताल में जवाब है: पुरानी रिपोर्टों में कुछ बाजारों में बिक्री बढ़ने की बात जरूर है, लेकिन आंकड़े बहुत अलग-अलग हैं। 2026 के लिए कोई सत्यापित राष्ट्रीय डेटा उपलब्ध नहीं है। जो आंकड़े घूमते हैं, वे ज्यादातर 2016-2017 की रिपोर्टों के हैं।
The Economic Times ने 12 अक्टूबर 2016 को इस विषय पर रिपोर्ट छापी थी। उसमें कहा गया कि लोकप्रिय दावे 25% से 50% तक की बढ़ोतरी के थे, जबकि कुछ ब्रांड्स के लिए असल बढ़ोतरी 10% से 20% के आसपास रही। यानी इंटरनेट पर दोहराया जाने वाला आंकड़ा रिपोर्ट के मूल निष्कर्ष से ज्यादा बड़ा है।
सितंबर 2017 की Times of India की रिपोर्ट में गुजरात स्टेट फेडरेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन (GSFCDA) के एक प्रतिनिधि ने उस साल कंडोम और गर्भनिरोधकों की बिक्री में करीब 35% की बढ़ोतरी का अनुमान बताया था।
ये आंकड़े पुराने हैं, अलग-अलग बाजारों और स्रोतों के हैं और इन्हें 2026 के सत्यापित राष्ट्रीय आंकड़े की तरह नहीं पढ़ना चाहिए।
ये आंकड़े जरूरी नहीं कि एक-दूसरे का खंडन करें। वे अलग शहरों, ब्रांड्स, दुकानों और अवधियों के हो सकते हैं। किसी एक Pharmacy में बिक्री ज्यादा बढ़ी हो सकती है, जबकि पूरे बाजार में बदलाव छोटा हो। इसी तरह नौ रातों की बिक्री और पूरे महीने की बिक्री की तुलना भी अलग नतीजे देती है।
भरोसेमंद राष्ट्रीय ट्रेंड के लिए तुलना योग्य बिक्री डेटा और सही आधार अवधि चाहिए। ऐसा डेटा फिलहाल सार्वजनिक नहीं है।
कोई एक निश्चित कारण साबित नहीं है। लेकिन रिपोर्टों और विशेषज्ञों के हवाले से कुछ कारण बताए जाते हैं।
Garba और Dandiya रातों में युवा दोस्तों से मिलते हैं और सामुदायिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं। कुछ लोगों के लिए यह नए लोगों से मिलने का भी मौका बनता है। लेकिन Garba में जाने का मतलब यह नहीं कि कोई यौन संबंध बनाने का इरादा रखता है। सिर्फ कार्यक्रम में शामिल होना किसी के यौन व्यवहार का सबूत नहीं है।
2016 की Economic Times रिपोर्ट के अनुसार कंडोम कंपनियां त्योहारों के आसपास वितरण और प्रचार बढ़ा सकती हैं। वे कॉलेज, रेस्तरां और सामाजिक जगहों जैसे इलाकों पर ज्यादा ध्यान देती हैं।
इसका मतलब है कि बिक्री में बढ़ोतरी में उपभोक्ता मांग, उत्पाद की उपलब्धता और प्रचार, तीनों का हाथ हो सकता है। बिक्री 20% बढ़ने का मतलब यह नहीं कि यौन गतिविधि भी उसी अनुपात में बढ़ी है।
Mankind Pharma के MD राजीव जुनेजा ने एक Podcast में कहा था कि गुजरात में Garba के समय बिक्री बढ़ती है। India.com की Report में यह बात छपी है। यह एक कंपनी प्रमुख का बयान है और कंपनी के अपने दृष्टिकोण को दिखाता है।
Navratri के बाद त्योहारों, छुट्टियों, पारिवारिक कार्यक्रमों और शादियों का मौसम आता है। 2016 की Economic Times रिपोर्ट में एक उद्योग-पक्ष ने कहा कि बिक्री में बदलाव का कारण सिर्फ Garba नहीं, बल्कि व्यापक त्योहारी और शादी का सीजन भी हो सकता है।
सही और लगातार इस्तेमाल पर Condom अनचाहे गर्भ और कई यौन संचारित संक्रमणों (STI) के जोखिम को घटाने में मदद करता है। लेकिन उपलब्धता, कीमत, शिक्षा और सामाजिक संकोच खरीद पर असर डालते हैं। इस विषय को सनसनी की बजाय सार्वजनिक स्वास्थ्य के नजरिए से देखना चाहिए।
2017 में एक Condom ब्रांड Manforce के विज्ञापन में Navratri से जुड़ा टैगलाइन और अभिनेत्री सनी लियोनी थीं। कुछ हिंदू संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई। एक व्यापार संगठन ने केंद्रीय मंत्री को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि कंपनी त्योहार के नाम पर Condom बेच रही है। इस घटना से पता चलता है कि विषय कितना संवेदनशील है।
जरूरी नहीं। Condom की बिक्री यौन गतिविधि का अधूरा पैमाना है। लोग पहले से खरीदकर रख सकते हैं, ऑफर पर ज्यादा मात्रा में ले सकते हैं या दुकान के समय और उपलब्धता के हिसाब से अलग जगह से खरीद सकते हैं। कुछ लोग त्योहार के बाद उपयोग के लिए भी खरीदते हैं।
बिक्री के आंकड़े यह नहीं बता सकते कि खरीदार कौन है, किसलिए खरीद रहा है या त्योहार के दौरान उपयोग हो रहा है या नहीं।
कुछ वायरल पोस्ट Condom की बिक्री से आगे बढ़कर दावा करती हैं कि किसी खास धर्म के पुरुष नाम बदलकर Garba में घुसते हैं, हिंदू महिलाओं को निशाना बनाते हैं, यौन संबंधों की रिकॉर्डिंग करते हैं और उससे ब्लैकमेल करते हैं।
ये गंभीर आरोप हैं, पर Navratri से जुड़ी किसी चर्चा में दिख जाने भर से ये सत्य नहीं हो जाते। Condom की बिक्री का आंकड़ा संगठित निशानेबाजी, धार्मिक धोखाधड़ी या ब्लैकमेल का सबूत नहीं है। ऐसे आरोपों को स्थापित करने के लिए पुलिस के बयान, अदालती रिकॉर्ड या विश्वसनीय खोजी रिपोर्टिंग जैसे मामले-आधारित प्रमाण चाहिए।
किसी एक व्यक्ति के कथित अपराध को पूरे धार्मिक समुदाय पर थोपना भी गलत है। जिन्हें उत्पीड़न, जबरदस्ती, धमकी या बिना सहमति रिकॉर्डिंग का सामना करना पड़ा हो, वे कानूनी सुरक्षा के हकदार हैं। मदद के लिए Women Helpline 181 या आपात स्थिति में 112 पर संपर्क किया जा सकता है।
साथ ही, किसी के कपड़े या Garba में हिस्सा लेना उसके चरित्र या यौन व्यवहार का सबूत नहीं है।
यह बहस दिखाती है कि त्योहार, उपभोक्ता व्यवहार, Marketing और यौन स्वास्थ्य पर बात करने में भारत की झिझक आपस में कैसे जुड़ी हैं। यौन स्वास्थ्य शर्म का विषय नहीं होना चाहिए और गर्भनिरोधक खरीदना किसी के चरित्र पर अंदाजा लगाने का आधार नहीं होना चाहिए।
कुछ बाजारों में Navratri के दौरान Condom की बिक्री बढ़ सकती है। लेकिन हर Garba सीजन में देशभर में बिक्री का "आसमान छूना" एक अतिसरलीकरण है। 2026 में बढ़ोतरी का सटीक पैमाना अभी अपुष्ट है।