स्टडी के अनुसार ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनिका द्वारा मिलकर सीरम इंस्टीट्यूट में बनाई गई कोविशील्ड, भारत बायोटेक की स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन की तुलना में अधिक प्रभावी है।

देश में कोरोना पर लगाए लगाने वैक्सीनेशन लगातार जारी है। वैक्सीनेशन के साथ-साथ भारत में उपलब्ध तमाम वैक्सीन पर शोध भी जारी हैं। जिसमें वैक्सीन के संबंध में रोजाना नई नई जानकारियां सामने आ रही हैं। ताजा रिसर्च के मुताबिक कोवैक्सीन और कोविशील्ड (Covishield and Covaxin) में हुई एक तुलनात्मक स्टडी में कोवीशील्ड को कोवैक्सीन की तुलना में ज्यादा प्रभावी बताया गया है।
इस स्टडी के अनुसार ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनिका (Oxford Astrazeneca) द्वारा मिलकर सीरम इंस्टीट्यूट में बनाई गई कोविशील्ड, भारत बायोटेक (Bharat Biotech) की स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन की तुलना में अधिक प्रभावी है।
पहले के शोधों की तुलना में अधिक प्रभावी साबित :
शोध में सामने आया कि कोविशील्ड कोवैक्सीन की तुलना में अधिक एंटीबॉडी बनाती है। हालांकि कोवैक्सीन भी कोरोना से लड़ाई में पूरी तरह कारगर है, लेकिन कोविशील्ड ज्यादा प्रभावी है और कोरोना को हराने में कारगर साबित हुई है। इसके पूर्व हुए शोधों में बताया गया है कि कोविशील्ड की पहली डोज (First Doze of covishield) कोरोना वायरस के खिलाफ 70 फीसदी कारगर है।
लेकिन तीसरे चरण के शोध के बाद जो आंकड़े सामने आए हैं। उसके अनुसार यह वैक्सीन कोरोना से लड़ाई में 81 फीसदी तक कारगर है।
515 लोगों पर किया गया तीसरे चरण का शोध :
कोरोना वायरस वैक्सीन इंड्यूस्ड एंटीबॉडी टाइट्रे की ओर से की गई शुरुआती स्टडी में इस बात का दावा किया गया है कि कोविशील्ड कोवैक्सीन की तुलना में बेहतर एंटीबॉडी बनाती है। स्टडी में कोविशील्ड की पहली डोज ले चुके लोगाें में कोवैक्सीन की तुलना में अधिक एंटीबॉडी मिलीं।
यह शोध 515 स्वास्थ्य कर्मियों पर किया गया, जिसमें 305 पुरुष और 210 महिलाएं शामिल थीं। शोध में 425 लोगों को कोविशील्ड दी गई जबकि शेष 90 को कोवैक्सीन की डोज दी गई।
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