BJP-Congress: कॉंग्रेस ने शुक्रवार को भाजपा से महिला आरक्षण विधेयक पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा और मांग करते हुए इसे बजट सत्र के दूसरे भाग में लोकसभा में पेश करने को कहा। कॉंग्रेस की ओर से ये बयान तब सामने आया है| जब भारत राष्ट्र समिति (BRS) की नेता...

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BJP-Congress: कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक ट्वीट में कहा गया कि "9 मार्च 2010 को राज्यसभा में कांग्रेस नेतृत्व के प्रयासों के वजह से ही ऐतिहासिक महिला आरक्षण विधेयक पारित किया गया था, लेकिन इसे लोकसभा में समर्थन नहीं मिला|
https://twitter.com/Jairam_Ramesh/status/1634094971027435521?s=20
ये विधेयक व्यपगत नहीं हो पाया था''। यह जीवित है और लंबित है। इसे फिर से पारित होने से किसने रोका है,और कौन रोक रहा है ?
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BJP-Congress: संवाददाता सम्मेलन में विधेयक के बारे में पूछा गया था, जिसपर कांग्रेस नेता अलका लांबा ने कहा कि जब विधेयक राज्यसभा में पारित किया गया था, तो उस वक़्त कांग्रेस के पास लोकसभा में पूर्ण बहुमत नहीं था और यह गठबंधन सरकार चल रही थी।
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उन्होंने कहा, "हम राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित कराने में सफल रहे थे। यह जीवित है और वर्तमानता समय में भाजपा सरकार के पास लोकसभा में पूर्ण बहुमत भी है। उन्होंने अपने 2019 के घोषणापत्र में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का वादा भी किया था, लेकिन नौ साल सरकार में रहने के बाद भी इस पर चुप क्यूँ हैं।
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BJP-Congress: अलका लंबा ने मांग करते हुए कहा - "हम मांग करते हैं की सांसद सत्र का दूसरा चरण शुरू होने वाला है।इसमे बीजेपी सरकार को अपना रुख साफ़ करना चाहिए।
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महिला आरक्षण विधेयक को लोकसभा में पेश करे और महिलाओं का अधिकार सुनिश्चित करना चाहिए।"बजट सत्र का दूसरा चरण 13 मार्च को शुरू होगा और ये 6 अप्रैल तक चलेगा।
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