ऑफ सीजन में तो ताबड़तोड़ पैसा
Agri Tips: केंद्र से लेकर राज्य सरकारें खेती (Agriculture) को लाभ का धंधा बनाने के लिए कई तरह के जतन कर रही हैं। इसके बावजूद भी किसानों को फायदा नहीं हो पा रहा है। वैसे भी खेती अब पहले जैसी नहीं रही। सीजन में जब टमाटर, गाजर, भिंडी या अन्य सब्जियां भरपूर मात्रा में बाजार में पहुंचती हैं तो दाम अचानक गिर जाते हैं। कई बार हालात ऐसे बनते हैं कि किसानों को लागत भी नहीं मिलती।
आंकड़ों की मानें तो 20 से 25 फीसदी तक सब्जियां खेत से बाजार तक के सफर में खराब हो जाती हैं। ऐसे में मेहनत भी जाती है और पैसा भी, लेकिन अब यही सब्जियां किसानों के लिए ‘पैसों का पेड़’ बन सकती हैं। जरूरत है सोच बदलने और नए तरीकों को अपनाने की। अगर सब्जी खेती में कम कमाई हो रही है, फसल खराब हो जा रही है, लागत डूब जा रही है या और भी कोई दिक्कत है तो ये आइडिया (Agri Tips) आपके लिए है। किसान भाई अब किसी भी सीजन की सब्जी से किसी भी सीजन में कमाई कर सकते हैं, जानें ये तरीका…
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ऐसे करें सब्जी की प्रोसेसिंग
कृषि सलाहकार सुनील पटेल का कहना है कि वेजिटेबल प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर किसान अपनी उपज को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं। ऑफ सीजन में अच्छे दाम पर बेच सकते हैं। इससे न तो सब्जियां सड़ेंगी और न ही लागत डूबेगी। प्रोसेसिंग का तरीका बहुत जटिल नहीं है। सबसे पहले खेत से सब्जियां निकालने के बाद उनकी सफाई और छंटाई (ग्रेडिंग) की जाती है।
खराब या सड़ी सब्जियों को अलग कर दिया जाता है। ब्लांचिंग प्रक्रिया में सब्जियों को 3-4 मिनट तक गर्म पानी में उबाला जाता है, फिर डिहाइड्रेशन यानी सुखाने की प्रक्रिया होती है, जिसमें सब्जियों से पानी निकाला जाता है। आखिर में एयरटाइट पैकिंग कर दी जाती है। इस तरह तैयार उत्पाद महीनों तक सुरक्षित रहता है।

टमाटर का पाउडर बना लें
निमाड़ क्षेत्र में टमाटर की भरपूर पैदावार होती है, लेकिन सीजन में दाम गिरने से किसान परेशान हो जाते हैं। ऐसे में टमाटर पाउडर एक अच्छा विकल्प बन सकता है। लाल और पके टमाटरों को स्लाइस में काटकर 3-4 दिन धूप में सुखाया जाए। फिर मिक्सर में पीसकर पाउडर बना लें। इसे एयरटाइट पैक कर बाजार में बेचा जा सकता है। यही तरीका गाजर के चिप्स, प्याज पाउडर या मिक्स वेज ड्राई पैक के लिए भी अपनाया जा सकता है।
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मसाला, दाल, अनाज, शहद की भी प्रोसेसिंग
सुनील पटेल के मुताबिक, किसान चाहें तो फल, सब्जी, मसाला, अनाज, दलहन, तिलहन, शहद, मशरूम और औषधीय उत्पादों की प्रोसेसिंग यूनिट भी लगा सकते हैं। कृषि अपशिष्ट से चारा और पैलेट्स बनाकर भी अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं।
सबसे खास बात ये कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत फूड प्रोसेसिंग यूनिट पर सब्सिडी भी मिलती है। सही योजना और तकनीकी मार्गदर्शन के साथ किसान छोटा स्टार्टअप शुरू कर सकते हैं, जो आगे चलकर बड़े कारोबार में बदल सकता है।

