सुख-समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है सही घर की दिशा का चयन

Vastu Tips : ज्योतिष शास्त्र (Jyotish Shastra) में वास्तु (Vastu) का भी एक अहम् रोल है। जहां ज्योतिष ग्रहों की स्थिति बताता है और वास्तु घर में ऊर्जा संतुलन के जरिए उस पर पड़ने वाले प्रभावों को अनुकूल बनाता है। वेदों के अनुसार, वास्तु शास्त्र, ज्योतिष का ही एक अभिन्न हिस्सा है, जो कुंडली के दोषों को दूर करने के लिए दिशाओं और पंचतत्वों (अग्नि, वायु, जल, पृथ्वी, आकाश) को संतुलित करता है। यह संयोजन सही घर की दिशा का चयन, स्थान, निर्माण, और सुख-समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

वास्तु के अनुसार पूजा घर ( Pooja Room Vastu Tips) होने से वातावरण सकारात्मक और शुद्ध बना रहता है। साथ ही, परिवार के भाग्य में वृद्धि हो सकती है। ऐसे में मंदिर बनवाते या उसमें भगवान की प्रतिमा स्थापित करते समय वास्तु के इन विशेष नियमों का ख्याल अवश्य रखना चाहिए। इससे घर से नकारात्मक ऊर्जाएं दूर रहती हैं।

घर का सबसे पवित्र स्थान माना जाता है पूजा घर 

घर का सबसे पवित्र स्थान पूजा घर को माना जाता है। वास्तुशास्त्र में इस स्थान का खास महत्व बताया गया है। अगर घर का मंदिर और उसमें रखी चीजें वास्तु अनुसार हो तो आसपास के वातावरण में सकारात्मकता बनी रहती है। साथ ही, घर से नकारात्मक ऊर्जाएं दूर होती हैं।

मंदिर सही दिशा और वास्तु अनुसार होने से इसका शुभ प्रभाव परिवार के सदस्यों पर भी पड़ता है व भाग्य में वृद्धि हो सकती है। ऐसे में घर में मंदिर बनवाते समय, उसमें भगवान की प्रतिमा, यंत्र आदि स्थापित करते वक्त वास्तु के इन महत्वपूर्ण नियमों का ख्याल जरूर रखना चाहिए।

Pooja Room Vastu Tips
Pooja Room Vastu Tips

पूजा घर बनवाते समय इन वास्तु नियमों का रखें ध्यान

  • अपने घर में मंदिर रखते या बनवाते समय दिशा का ख्याल जरूर रखना चाहिए। वास्तु अनुसार मंदिर हमेशा ईशान कोण में होना चाहिए। जब भी आप पूजा करें तो मुख पूर्व, उत्तर या ईशान कोण की ओर ही होना चाहिए। ऐसा करने से भगवान की विशेष कृपा प्राप्त हो सकती है।
  • पूजा घर का द्वार ईशान कोण या पूर्व दिशा में होना चाहिए। अगर ऐसा संभव न हो तो आप उत्तर दिशा में भी द्वार लगवा सकते हैं। लेकिन भूलकर भी मंदिर या उसका गेट दक्षिण, नैऋत्य कोण में नहीं होना चाहिए। इससे अशुभ फल की प्राप्ति हो सकती है।
  • वास्तुशास्त्र के अनुसार अगर घर बहुमंजिला हो तो मंदिर सबसे नीचे की मंजिल में ही होना चाहिए। पूजाघर बनवाते समय इस बात का ध्यान भी जरूर रखें कि उसमें एक रोशनदान व खिड़की अवश्य मौजूद हो।
  • अगर आप अपने पूजा घर में हवन कुंड का निर्माण करवा रहे हैं तो इस बात का ख्याल रखें की वह षट्कोण या चौकोर हो। वास्तु अनुसार, घर में त्रिकोणीय या गोलाकार हवन कुंड होना शुभ नहीं माना जाता है।
  • घर के मंदिर में हल्का नीला या पीला रंग कराना सबसे उत्तम होता है। इससे ध्यान करते समय एकाग्रता बनी रहती है।
  • अगर आपने मंदिर किसी अलमारी में बनवाया हो तो उसके ऊपर किसी भी प्रकार का सामान नहीं रखना चाहिए।

 

पूजा घर में भगवान की मूर्ति रखने के नियम

  • ​वास्तु अनुसार पूजा घर में भगवान की मूर्ति इस प्रकार रखनी चाहिए की उनका मुख पश्चिम दिशा की ओर हो। साथ ही, भगवान की मूर्ति अत्यधिक बड़ी नहीं रखनी चाहिए। उनका साइज तीन उंगली जितना रखना सही माना जाता है।
  • पूजा घर में मूर्तियों को चौकी पर कपड़ा बिछाकर स्थापित करना चाहिए। साथ ही, इस बात का भी ख्याल रखें की कोई भी मूर्ति या प्रतिमा खंडित न हो।
  • मान्यता है कि विष्णु, ब्रह्मा, शिव, सूर्य, इंद्र, कार्तिकेयजी आदि का मुख पश्चिम दिशा में होना चाहिए। इसके अलावा, भगवान हनुमान का मुख नैऋत्य दिशा की ओर होना चाहिए। कुबेर देवता, दुर्गा मां, गणेशजी और भैरव बाबा का मुख दक्षिणाभिमुख होना चाहिए।
  • माता पार्वती और शिवजी की प्रतिमा अग्निकोण में होनी चाहिए।
  • वास्तुशास्त्र के अनुसार, इष्ट देवता का स्थान उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि पूर्वजों की तस्वीर कभी भी भगवानों की प्रतिमा के साथ नहीं लगाने चाहिए।
  • मंदिर में भूलकर भी दो शिवलिंग, दो शंख और दो गणपतिजी की मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। वास्तु के अनुसार, मंदिर में दो मूर्तियां रखना शुभ नहीं माना जाता है।

 

मंदिर यंत्रों और चिन्हों से जुड़े नियम

  • वास्तु के अनुसार, घर में कुबेर यंत्र को उत्तर दिशा में रखना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि शुभ यंत्रों को प्राण प्रतिष्ठित करवाकर ही उन्हें पूजा घर में स्थापित करना चाहिए।
  • अपने घर के मंदिर में शुभ चिन्हों का प्रयोग उनके स्वामी देवताओं के साथ करना शुभ माना जाता है।
  • स्वास्तिक भगवान गणेश और लक्ष्मी जी के साथ, विष्णुजी और माता लक्ष्मी के साथ शंख और मां सरस्वती वीणा।
  • मान्यता है कि रात में सोने से पहले मंदिर में जाकर शुभ चिन्हों को एक बार प्रणाम अवश्य करना चाहिए। ऐसा करने से परिवार के सदस्यों के भाग्य में वृद्धि हो सकती है।

पूजाघर से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण वास्तु नियम

  • अगर मंदिर घर की किसी अलमारी में स्थापित हो तो इसके द्वार पर पर्दा जरूर लगाना चाहिए। ऐसा करने से बाहर से आने वाले व्यक्ति की नजर सीधे मंदिर पर नहीं पड़ेगी।
  • घर के मंदिर में नियमित पूजा पाठ जरूर करनी चाहिए। दो समय पूजा करने से घर का माहौल सकारात्मक बना रहता है। साथ ही नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
  • पूजाघर को हमेशा साफ रखना चाहिए। वहां, गंदगी, धूल-मिट्टी, मकड़ी के जाले, गंदे वस्त्र आदि होना शुभ नहीं माना जाता है।
  • अपने घर के मंदिर में जल से भरा एक मिट्टी का कलश अवश्य रखना चाहिए। साथ ही, उसे प्रतिदिन जरूर बदलें। ऐसा करने से भाग्य में वृद्धि हो सकती है।
  • देवी-देवताओं को भोग लगाते समय इस बात का ख्याल रखें की भोग को भगवान के सामने रखकर थोड़ी देर के लिए पूजाघर का द्वार बंद कर देना चाहिए।