Fruit Horizon 2026 : केंद्र सरकार बागवानी फसलों के निर्यात पर ज़ोर दे रही है, ताकि किसानों की आमदनी में इजाफा हो सके। इसी क्रम में भारत सरकार ने अंगूर और अनार के निर्यात को लेकर वियतनाम के साथ एक समझौता किया है। अब केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान लखनऊ में होने वाले आगामी ‘फ्रूट होराइजन-2026’ कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं, जहाँ वे बागवानी क्षेत्र से जुड़े किसानों और निर्यातकों के साथ विचार-मंथन सत्रों में शामिल होंगे। इस पहल से बागवानी निर्यात और उत्पादन, दोनों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
देश में फलों के उत्पादन, प्रसंस्करण और निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान 7 मई को उत्तर प्रदेश के लखनऊ दौरे पर रहेंगे। इस दौरे के दौरान, वे “फ्रूट होराइजन 2026” से जुड़े प्रमुख कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। इस दो-दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन देश के भीतर फलों के उत्पादन, गुणवत्ता मानकों, प्रसंस्करण और निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य किसानों, वैज्ञानिकों, निर्यातकों और अन्य संबंधित हितधारकों को एक मंच पर लाकर फल क्षेत्र को एक नई दिशा प्रदान करना है।
इस पहल से देश का फल व्यापार होगा मज़बूत
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान निर्यातकों और अन्य हितधारकों के साथ सीधा संवाद करेंगे। उनका प्रगतिशील निर्यातकों के साथ बैठक करने, साथ ही निर्यातकों, निदेशकों और अन्य प्रमुख हितधारकों के साथ चर्चा करने का कार्यक्रम है। इस संवाद का मुख्य केंद्र बिंदु फलों के निर्यात को बढ़ाना, बाज़ार की चुनौतियों को समझना और प्रभावी रणनीतियाँ तैयार करना जैसे मुद्दे होंगे। इस पहल से देश के फल व्यापार को मज़बूत करने और किसानों के लिए बेहतर अवसर सुनिश्चित करने में योगदान मिलने की उम्मीद है।

FPO, निर्यात और गुणवत्ता के संबंध में बड़ी घोषणाओं की उम्मीद
मुख्य कार्यक्रम 7 मई को रहमानखेड़ा स्थित ICAR-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (CISH) में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम के दौरान, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह किसानों, नर्सरी संचालकों और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ संवाद करेंगे। उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इन सत्रों के एजेंडे में गुणवत्ता मानक, निर्यात, मूल्य संवर्धन, ‘शून्य अस्वीकृति’ (zero rejection) का दर्जा हासिल करना और FPO (किसान उत्पादक संगठन), FPC (किसान उत्पादक कंपनियाँ) तथा SHG (स्वयं सहायता समूह) की महत्वपूर्ण भूमिकाएँ जैसे विषय शामिल हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री से इन विभिन्न योजनाओं और पहलों के संबंध में महत्वपूर्ण घोषणाएँ करने की भी उम्मीद है।
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बागवानी उत्पादन में भारी उछाल
केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, पिछले एक दशक में बागवानी उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। यह 2013-14 में 277.35 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 370.74 मिलियन टन हो गया है। इस कुल उत्पादन में से फलों का उत्पादन 117.65 मिलियन टन रहा, जबकि सब्जियों का उत्पादन 217.80 मिलियन टन दर्ज किया गया।
₹92,000 करोड़ का बागवानी निर्यात
2024-25 में, भारत ने ₹92,532 करोड़ मूल्य के बागवानी उत्पादों का निर्यात किया, जिसमें मसालों का हिस्सा सबसे अधिक (38 प्रतिशत) रहा। बागानी फसलों का योगदान 29.4 प्रतिशत रहा, जबकि प्रसंस्कृत उत्पादों का हिस्सा 13.9 प्रतिशत था। विशेष रूप से आम, अंगूर, केले और प्याज जैसे उत्पादों का निर्यात 100 से अधिक देशों में किया जाता है, जिनमें चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शामिल हैं।


















