World Suicide Prevention Day: दुनिया भर में हर साल लगभग 800,000 लोग आत्महत्या से मर जाते हैं। वहीं भारत में इसके आकडों की बात करें तो सिर्फ साल 2019 में ही आत्महत्या से

World Suicide Prevention Day: दुनिया भर में हर साल लगभग 800,000 लोग आत्महत्या से मर जाते हैं। वहीं भारत में इसके आकडों की बात करें तो सिर्फ साल 2019 में ही आत्महत्या से 1,39,123 भारतीयों की मृत्यु हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में, आत्महत्या एक उभरती हुई और गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है।
हालांकि आत्महत्या के इन आकडों में मरने वालों के अलग अलग कारण देखें गए हैं।

भारत में आत्महत्या करने वालो आकडों में सबसे ज्यादा महिलाओं की संख्या निकलकर सामने आती हैं जिसमें घरेलू हिंसा एक बड़ा कारण देखा गया है। बंगलौर में किए गए एक केस स्टडी में घरेलू हिंसा आत्महत्या के लिए एक प्रमुख जोखिम कारक है।

पिछले दो साल में बेरोजगारी से मरने वाले लोगों मे संख्या में काफी बढ़ोतरी देखी गयी है हालांकि अभी तक इसके कुल आकडें सामने नहीं है। लेकिन लगातार आ रही खबरों के अनुसार बेरोजगारी से मरने वाले लोगों की संख्या में 25% तक बढ़ौतरी पायी गयी है।
इसके अलावा मानसिक स्वास्थ्य या नशीले मादक द्रव्यों का सेवन भी लोगों को आत्महत्या करने पर मजबूर कर देता। मानसिक स्वास्थ्य या मादक द्रव्यों के सेवन से आत्महत्या का पारिवारिक इतिहास रहा है। नशे की लत में पारिवारिक हिंसा या दुर्व्यवहार का अनुभव जैसे कि शारीरिक, यौन या मनोवैज्ञानिक दुर्व्यवहार भी आत्महत्या के पीछे के कारण देखे गए है। इसके अलावा गरीबी, प्यार और मानसिक तनाव इसके पीछे के मुख्य कारण है।
ग्रीनलैंड, पूरी दुनिया में सबसे अधिक आत्मघाती राज्य है, जिसमें लेसोथो सबसे आत्मघाती देश है। यूरोप दुनिया में सबसे अधिक आत्मघाती क्षेत्र है, जबकि पूर्वी भूमध्यसागरीय में सबसे कम आत्महत्या के केस आते है।
ग्रीनलैंड
पूरी दुनिया में सबसे अधिक आत्मघाती राज्य ग्रीनलैंड है, जिसमें लेसोथो सबसे आत्मघाती देश है। यूरोप दुनिया में सबसे अधिक आत्मघाती क्षेत्र है, जबकि पूर्वी भूमध्यसागरीय सबसे कम है।
हेल्पलाइन नंबर: 9152987821
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