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ट्रंप ने कहा—ईरान के परमाणु कार्यक्रम के 20 साल निलंबन पर हो सकता है सौदा; शांति की दिशा में संकेत

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे तनाव और परमाणु मुद्दे के संबंध में एक नया बयान जारी किया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि यदि ईरान 20 वर्षों की अवधि के लिए अपने परमाणु कार्यक्रम को निलंबित करने के लिए तैयार हो, तो वे किसी समझौते पर सहमत होने को तैयार होंगे। यह बयान इस साल मई में चीन से लौटते समय *एयर फ़ोर्स वन* में पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान दिया गया था।

ट्रंप के नवीनतम बयान में कई मुख्य बिंदु शामिल हैं:

  • उन्होंने कहा कि उनकी नज़र में 20 वर्षों का निलंबन “पर्याप्त” माना जा सकता है, बशर्ते कि ईरान की प्रतिबद्धता वास्तविक और विश्वसनीय हो।
  • ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि यदि ईरान के पास किसी भी रूप में परमाणु सामग्री पाई जाती है, तो वे किसी समझौते के साथ आगे नहीं बढ़ेंगे।
  • यह रुख अमेरिका द्वारा पहले की गई कड़ी मांगों से एक बदलाव का संकेत है, जिसमें ट्रंप ने लगातार इस बात पर ज़ोर दिया था कि ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से खत्म कर देना चाहिए।

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इस बदलाव की व्याख्या, कुछ हद तक, अमेरिका की पहले की कठोर नीति में नरमी के संकेत के रूप में की जा रही है—एक ऐसी नीति जिसके तहत अमेरिका ने लगातार यह रुख बनाए रखा था कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

ट्रंप के बयान का राजनीतिक और वैश्विक महत्व

ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अपनी चर्चा के बाद यह बयान दिया। उन्होंने बताया कि दोनों पक्ष होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के संबंध में भी एक समझौते पर पहुँच गए थे, क्योंकि इस महत्वपूर्ण शिपिंग मार्ग के बंद होने से तेल की कीमतों में भारी उछाल आ गया था।

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हालाँकि, ईरान ने ट्रंप के प्रस्ताव को तुरंत स्वीकार नहीं किया है, और वर्तमान में बातचीत में किसी सफलता (breakthrough) के कोई स्पष्ट संकेत नहीं हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने निलंबन के प्रस्ताव पर असहमति व्यक्त की है और इसके बजाय संघर्ष को समाप्त करने के लिए अपनी शर्तें सामने रखी हैं—जैसे कि संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को हटाना और होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा के संबंध में गारंटी देना।

यह बयान महत्वपूर्ण क्यों है?

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यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मध्य पूर्व के प्रति अमेरिकी नीति में संभावित बदलाव का संकेत देता है। ट्रंप ने पहले परमाणु कार्यक्रम पर स्थायी रोक लगाने पर ज़ोर दिया था, लेकिन अब वे 20 वर्षों के अस्थायी निलंबन को स्वीकार करने के लिए तैयार प्रतीत होते हैं—बशर्ते कि ईरान स्पष्ट और विश्वसनीय गारंटी दे।

इस बीच, बातचीत में किसी सफलता की उम्मीद अभी भी दूर की कौड़ी लगती है। ट्रंप ने यह भी कहा कि उनका सब्र अब जवाब दे रहा है, क्योंकि अब तक की बातचीत से कोई सकारात्मक संकेत सामने नहीं आए हैं। यह पूरा मुद्दा वैश्विक तेल बाज़ार, ऊर्जा सुरक्षा, शांति-स्थापना के प्रयासों और अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति को प्रभावित कर रहा है; इसके अलावा, जैसे-जैसे भविष्य की वार्ताएँ आगे बढ़ेंगी, इसका विश्व तेल कीमतों और वैश्विक बाज़ारों पर सीधा प्रभाव पड़ने की संभावना है।

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