मिडिल ईस्ट में हालात एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ लेते दिखाई दे रहे हैं। खबरें हैं कि अमेरिका और इज़राइल के सैन्य अधिकारी ईरान पर संभावित हमलों के लिए टारगेट तैयार कर रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह कार्रवाई अगले हफ्ते तक भी हो सकती है। इसी ब...

मिडिल ईस्ट में हालात एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ लेते दिखाई दे रहे हैं। खबरें हैं कि अमेरिका और इज़राइल के सैन्य अधिकारी ईरान पर संभावित हमलों के लिए टारगेट तैयार कर रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह कार्रवाई अगले हफ्ते तक भी हो सकती है। इसी बीच Donald Trump के हालिया बयान और चीन दौरे के बाद हालात और ज्यादा तनावपूर्ण नज़र आने लगे हैं। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम से पीछे नहीं हटता, तो अमेरिका कठोर कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वॉशिंगटन और इज़राइल के बीच ईरान को लेकर लगातार हाई-लेवल बातचीत चल रही है। बताया जा रहा है कि दोनों देशों के सैन्य अधिकारी संभावित स्ट्राइक लोकेशन्स पर काम कर रहे हैं। इज़राइल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी संकेत दिए हैं कि संघर्ष दोबारा शुरू होने की आशंका काफी बढ़ चुकी है। उनका कहना है कि अब अमेरिका को भी लगने लगा है कि ईरान के साथ बातचीत किसी नतीजे तक नहीं पहुंच रही है। यही वजह है कि अब डिप्लोमेसी की जगह सैन्य विकल्पों की चर्चा तेज हो गई है।
हाल ही में ट्रंप चीन दौरे पर गए थे। ईरान को उम्मीद थी कि चीन इस मामले में बड़ी मध्यस्थता करेगा और अमेरिका पर दबाव बनाएगा। खासकर Strait of Hormuz को लेकर चीन की भूमिका पर काफी अटकलें लगाई जा रही थीं। लेकिन चीन ने साफ तौर पर किसी भी सीधे हस्तक्षेप से दूरी बना ली। बीजिंग की तरफ से सिर्फ वैश्विक व्यापार और समुद्री रास्तों को खुला रखने की बात कही गई। यानी चीन फिलहाल अपने आर्थिक हितों को ज्यादा अहमियत देता दिखाई दे रहा है, ना कि ईरान के लिए अमेरिका से टकराव को।
चीन में ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात के दौरान ईरान सबसे बड़ा मुद्दा बना रहा था। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका और चीन दोनों इस बात पर सहमत हैं कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए। इसके अलावा Strait of Hormuz को खुला रखने पर भी दोनों देशों के बीच सहमति बनी। यह समुद्री रास्ता दुनिया की तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है। हालांकि बातचीत के बावजूद कोई बड़ा समाधान निकलता नजर नहीं आया।
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर ईरान को लेकर बेहद तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान अब अमेरिका पर हँसना बंद कर देगा। ट्रंप ने आरोप लगाया कि पिछले कई दशकों से ईरान अमेरिका को धोखा देता रहा है और अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाता रहा है। उनकी भाषा पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक दिखाई दी, जिससे यह संकेत मिला कि व्हाइट हाउस अब सख्त रणनीति की ओर बढ़ सकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर अमेरिका और इज़राइल ने सैन्य कार्रवाई की, तो इसका असर सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। पूरा मध्य पूर्व अस्थिर हो सकता है। तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, वैश्विक व्यापार प्रभावित हो सकता है और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह स्थिति बेहद अहम है क्योंकि भारत की बड़ी ऊर्जा जरूरतें इसी क्षेत्र से जुड़ी हैं।
अभी तक किसी आधिकारिक सैन्य कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह के संकेत सामने आ रहे हैं, उससे दुनिया की नजरें अब अगले कुछ दिनों पर टिक गई हैं। अगर बातचीत पूरी तरह टूटती है, तो हालात तेजी से बदल सकते हैं। वहीं अगर आखिरी वक्त में कोई समझौता होता है, तो टकराव टल भी सकता है। फिलहाल माहौल ऐसा है जहां हर बयान और हर कूटनीतिक मुलाकात बेहद मायने रखती है।