भारतीय संस्कृति में नमस्‍कार करने की प्रथा सदियों से चली आ रही है। हिन्‍दू संस्‍कृति के अनुसार जब भी हम किसी से मिलते हैं तो उसे हाथ जोड़ कर नम्‍स्‍कार किया जाता है। लेकिन क्‍या आपने कभी सोचा है नमस्‍कार करने पर हाथ जोड़ने का क्‍या कारण है? शायद न सोचा हो लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इसके पीछे भी वैज्ञानिक महत्‍व है। जी हां नमस्‍कार करने के पीछे कई ऐसे वैज्ञानिक तथ्‍य छिपे हैं जिनके बारे में जानकर आपको खुशी होगी और आप हमेशा नमस्‍कार करने को ही प्राथमिकता देगें।

हिन्‍दू संस्‍कृति में नमस्‍कार को इसलिए महत्‍व दिया गया है क्‍योंकि जब भी आप किसी व्‍यक्ति से मिलते हैं तो आप उसे दोनों हाथ जोड़ कर नमस्‍कार करते हैं जिससे आपके हाथ सामने वाले व्‍यक्ति से संपर्क में नहीं आते और आप सक्रमंण से होने वाली सभी बीमारियों से बच जाते हैं। इसमें सक्रंमण का कोई खतरा नहीं होता और किसी भी व्‍यक्ति कें संपर्क में आए बिना आप उसका आदर कर और मान कर चुके होते हैं।  

प्राचीन काल में नमस्‍कार करने के पीछे का कारण

जब आप किसी व्यक्ति से नमस्कार करते हैं तब आपके अंगूठे छाती से लगे होते हैं। जहां आप उस स्थिति में होते जब आपके शरीर के पंचतत्‍व अग्नि, पृथ्‍वी, वायु, जल, और शून्‍य एक सकारात्‍मक स्थिति में होते हैं। जिससे कि आप सामने वाले व्‍यक्ति के साथ एक सकारात्‍मक ऊर्जा का आदान प्रदान करते हैं जिसे हिन्‍दू संस्‍कृति में एक अच्‍छा प्रतीक माना गया है।

एक अन्‍य कारण की बात करें तो जब हम अपने दोनों हाथ जोड़ते हैं और भगवान को नमस्कार करते हैं उस वक्त हाथ जुड़े होते हैं तथा दोनों अंगूठे माथे से लगे होते हैं ऐसे में जो आशावादी सोच के कारण सकारात्मकता आती है वह सीधे शरीर में प्रवेश करती है ।

नमस्‍कार की परिभाषा

हिन्‍दू संस्‍कृति के अनुसार नमस्‍कार करते समय व्‍यक्ति के मन में एक भाव होता है जो इस प्रकार है – “मेरी आत्मा आपकी आत्मा को पहचानती है। मेरे अंदर आपके प्रति प्रकाश, प्रेम सौंदर्य, सच्चाई और दया का सम्मान है। हमारे बीच कोई दूरी और कोई अंतर नहीं है। हम सब एक समान हैं। हम एक हैं।”

नमस्‍कार के पीछे वैज्ञानिक तथ्‍य

इसके पीछे के वैज्ञानिक तर्क को देखा जाए तो नमस्‍कार एक ऐसी क्रिया है जिसमें आप किसी व्‍यक्ति के बिना संपर्क में आए उसे पूर्ण आदर और सम्‍मान देने के लिए करते हैं। और आप किसी भी व्यक्ति के सम्पर्क में आने से बच जाते हैं जिससे आप कोई अंजान रोग के संपर्क में भी नहीं आते।

हम उम्‍मीद करते हैं कि आपको यह जानकारी पंसंद आयी होगी आगे भी हम इसी प्रकार की जानकारीओं से आपको आगे अवगत कराते रहेगें।

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