इस मामले में शाहनवाज कई बार जिले के विभिन्न अधिकारियों से मिलकर इस जगह पर जंगल (Forest) लगाने के बारे में बोल चुके हैं, लेकिन वे हर बार विभागीय टाल मटोल में उलझ कर रह जाते हैं। शाहनवाज की मानें तो लगभग 37.5 एकड़ में स्थित इस जगह पर यदि वन विकसित कर दिया जाए, तो कई वन्य प्राणियों को यहां बसेरा मिल जाएगा।
वन कर्मियाें की शह पर ही उजाड़ हो गई भूमि :
यहां के स्थानीय निवासियों की मानें तो एक दशक पहले तक इस जगह भी एक घना जंगल हुआ करता था, लेकिन वन-विभाग के कर्मचारियों की शह पर धीरे-धीरे यहां के वृक्षों को वन माफियाओं के साथ मिलकर कटवा दिया गया। इस जगह पर बड़ी संख्या में इमारती लकड़ी जैसे सागौन के पेड़ थे। इसके अलावा नीलगिरी और चंदन के पेड़ भी बहुतायत में थे।

साथ ही यहां काजू, गरहाड़ी, खमेर के साथ पीपल, बरगद और नीम की त्रिवेणी भी थी, लेकिन पिछले कुछ सालों में यहां बहुत तेजी से वनों का दोहन हुआ। जिसके कारण वर्तमान में इस क्षेत्र में बड़े पेड़ नदारद हैं। यहां पर अभी गाजर घास, बेशरम सहित अन्य जंगली झाड़ियां ही दिखाई दे रही हैं।
जंगल बनाने के लिए कर रहे प्रयास :
सिवनी के ही रहने वाले डॉ. शाहनवाज खान यहां पर एक जंगल बनाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। शाहनवाज बताते हैं कि वे पिछले 5 वर्षों से जिम्मेदार अधिकारियों को इस बारे में बता रहे हैं। शहर से केवल 5 किमी की दूरी पर इस वन भूमि पर यदि जंगल बन जाए, तो इस जगह को ऑक्सीजन जोन के रूप में विकसित किया जा सकता है। जिसका फायदा पूरे शहर के लोगों को मिलेगा। आज के स्थिति को देखते हुए खाली पड़ी भूमि पर बड़ी संख्या में पेड़ लगाने की आवश्यकता है।

अत: इस बारे में कई बार जिले फॉरेस्ट अधिकारियों को बताया गया है, लेकिन फॉरेस्ट का उदासीन रवैया बताता है कि वे इस जगह पर वन विकसित करने के लिए गंभीर नहीं हैं।
पेड़ न कटने की गारंटी मांग रहे अधिकारी :
इस जगह पर वन विकसित करने की मांग लेकर जब शाहनवाज वन विभाग के अधिकारियों के पास गए तो अधिकारी उनसे लिखित में गारंटी मांग रहे हैं।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस बात की लिखित में गारंटी दी जाए कि यदि इस जगह पर वन विकसित किया जाता है तो भविष्य में यहां विकसित पेड़ों को नहीं काटा जाएगा।
मुझे जानकारी नहीं है, डीएफओ से जानकारी लूंगा
मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है। यदि डीएफओ इस तरह की गारंटी मांग रहे हैं, तो मैं उनसे इस मामले पर बात करूंगा। उनसे जानकारी ही लेकर ही इस विषय पर कुछ बता सकता हूं।
– रेवा शंकर कोरी, सीएफ
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