देश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े और ठीक उसी बीच प्रधानमंत्री का UAE दौरा शुरू हो गया। अब हर किसी के मन में एक ही सवाल है क्या यह सिर्फ कूटनीतिक यात्रा है या भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी बड़ी रणनीति? Narendra Modi का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब मध्य पूर्व में जारी तनाव ने पूरी दुनिया के तेल बाजार को हिला दिया है। भारत में ईंधन की कीमतें बढ़ चुकी हैं और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ रही है। ऐसे माहौल में अबू धाबी में होने वाली बातचीत को काफी अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान भारत और United Arab Emirates के बीच LPG और Strategic Petroleum Reserve जैसे बड़े समझौते हो सकते हैं, जो आने वाले समय में भारत को तेल संकट से बचाने में मदद कर सकते हैं।
UAE दौरा भारत के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात होने वाले कच्चे तेल पर निर्भर करता है। जब भी मध्य पूर्व में तनाव बढ़ता है, उसका असर सीधे भारत की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देता है। ऐसे समय में UAE भारत के सबसे भरोसेमंद ऊर्जा साझेदारों में गिना जाता है। लंबे समय से दोनों देशों के बीच तेल और गैस सप्लाई को लेकर मजबूत समझौते रहे हैं। यही वजह है कि इस बार पीएम मोदी का दौरा सिर्फ औपचारिक मुलाकात नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भारत की “Energy Security Strategy” का अहम हिस्सा समझा जा रहा है।
LPG और Strategic Petroleum Reserve समझौते से क्या फायदा होगा?
सूत्रों के मुताबिक इस दौरे में दो बड़े MoU पर सहमति बन सकती है। पहला LPG सप्लाई को लेकर और दूसरा Strategic Petroleum Reserve यानी आपातकालीन तेल भंडारण से जुड़ा हुआ है। सीधी भाषा में समझें तो अगर भविष्य में फिर कोई बड़ा वैश्विक संकट आता है और तेल सप्लाई प्रभावित होती है, तो भारत के पास अतिरिक्त भंडारण और सुरक्षित सप्लाई का विकल्प रहेगा।
पेट्रोल डीजल कीमत बढ़ने के बीच क्यों अहम है यह यात्रा?
हाल ही में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। चार साल बाद आम उपभोक्ताओं के लिए यह पहला बड़ा झटका माना जा रहा है। CNG के दाम भी बढ़ाए गए हैं। लंबे समय तक सरकार और तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार का दबाव खुद झेल रही थीं। लेकिन US-Iran तनाव और महंगे क्रूड ऑयल ने हालात मुश्किल कर दिए। अब सरकार की कोशिश सिर्फ मौजूदा संकट संभालने की नहीं, बल्कि भविष्य के लिए मजबूत व्यवस्था बनाने की भी दिख रही है। UAE यात्रा को उसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
भारत UAE रिश्ते अब सिर्फ तेल तक सीमित नहीं रहे
पिछले कुछ सालों में भारत और UAE के रिश्तों में जबरदस्त तेजी आई है। व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देश लगातार करीब आए हैं। Mohamed bin Zayed Al Nahyan के साथ पीएम मोदी की मुलाकात में व्यापार और निवेश बढ़ाने पर भी जोर रहेगा।
यूरोप दौरे का क्या है बड़ा संदेश?
UAE के बाद पीएम मोदी नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली भी जाएंगे। यह पूरा दौरा बताता है कि भारत इस समय सिर्फ ऊर्जा संकट से निपटने में नहीं, बल्कि वैश्विक साझेदारियां मजबूत करने में भी जुटा हुआ है। Ulf Kristersson और Giorgia Meloni जैसे नेताओं के साथ होने वाली बैठकों में व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा होगी। यानी भारत इस समय दुनिया के बड़े देशों के साथ अपने रिश्तों को नए स्तर पर ले जाने की कोशिश कर रहा है। PM Modi का UAE दौरा ऐसे वक्त पर हो रहा है जब दुनिया ऊर्जा संकट और geopolitical तनाव से गुजर रही है। भारत के लिए यह सिर्फ एक विदेशी यात्रा नहीं, बल्कि आने वाले समय की आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा बड़ा कदम माना जा रहा है। अगर LPG और Strategic Petroleum Reserve समझौते होते हैं, तो इससे भारत को भविष्य के तेल संकटों से काफी हद तक सुरक्षा मिल सकती है।













