तुर्की ने एक बार फिर भारत के साथ अपने संबंधों को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया है। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा है कि उनका देश भारत के साथ बेहतर रिश्ते चाहता है और पाकिस्तान के साथ उसके संबंधों को भारत विरोधी नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों से रिश्तों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।

क्या कहा तुर्की के विदेश मंत्री ने?

सिंगापुर में एक कार्यक्रम के दौरान हाकान फिदान ने साफ कहा कि तुर्की और भारत के बीच कोई सीधा विवाद नहीं है और न ही कोई सीमा संबंधी समस्या है। उनके मुताबिक, दोनों देशों के बीच सहयोग की काफी संभावनाएं मौजूद हैं और तुर्की भारत के साथ रिश्तों को आगे बढ़ाना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के कई देशों के पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध हैं और तुर्की भी उनमें से एक है, इसलिए इसे भारत के खिलाफ नहीं देखा जाना चाहिए।

भारत तुर्की रिश्तों में दूरी क्यों बढ़ी?

पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों में तनाव तब बढ़ा जब तुर्की ने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर मुद्दे का जिक्र किया। भारत इसे अपना आंतरिक मामला बताता रहा है। इसके अलावा, पाकिस्तान के साथ तुर्की की बढ़ती रक्षा साझेदारी भी भारत के लिए चिंता का कारण बनी। इसी वजह से दोनों देशों के बीच राजनीतिक भरोसे में कमी देखने को मिली।

भारत की विदेश नीति में बदलाव

हाल के वर्षों में भारत ने अपनी विदेश नीति में कई नए साझेदार देशों के साथ रिश्ते मजबूत किए हैं। आर्मेनिया, ग्रीस और साइप्रस जैसे देशों के साथ भारत का सहयोग बढ़ा है। इन कदमों को क्षेत्रीय संतुलन की कोशिश के तौर पर देखा जाता है, जिससे तुर्की के साथ रिश्तों पर अप्रत्यक्ष असर भी पड़ा है।

आर्थिक रिश्ते अभी भी अहम

राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत और तुर्की के बीच व्यापारिक संबंध पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश अभी भी जारी है। हालांकि, पर्यटन और कुछ शैक्षणिक सहयोग पर जरूर असर देखने को मिला है, क्योंकि कई लोगों ने यात्रा और साझेदारी के फैसलों पर पुनर्विचार किया है।

क्या बदल रहा है तुर्की का रुख?

तुर्की इस समय यूरोप, एशिया और मध्य पूर्व के बीच अपनी भूमिका को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में भारत जैसे बड़े बाजार और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ बेहतर रिश्ते उसके लिए फायदेमंद हो सकते हैं। इसी वजह से माना जा रहा है कि तुर्की हाल के बयानों के जरिए रिश्तों को दोबारा संतुलित करने की कोशिश कर रहा है।

भारत और तुर्की के रिश्तों का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि दोनों देश संवेदनशील मुद्दों को कैसे संभालते हैं। पाकिस्तान, कश्मीर और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे अभी भी दोनों देशों के बीच मतभेद का कारण बने हुए हैं। हालांकि व्यापार और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग की गुंजाइश अभी भी बनी हुई है।

तुर्की ने भारत के बारे में क्या कहा?
तुर्की ने कहा है कि वह भारत के साथ बेहतर संबंध चाहता है और पाकिस्तान के साथ उसके रिश्तों को भारत विरोधी नहीं माना जाना चाहिए।

भारत और तुर्की के बीच तनाव क्यों है?
कश्मीर मुद्दे पर तुर्की के बयानों और पाकिस्तान के साथ उसकी नजदीकी साझेदारी को इसका मुख्य कारण माना जाता है।

क्या दोनों देशों के बीच व्यापार जारी है?
हाँ, भारत और तुर्की के बीच व्यापार और आर्थिक संबंध अभी भी जारी हैं।

तुर्की के विदेश मंत्री कौन हैं?
वर्तमान में तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान हैं।