मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। इस बार मामला दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में गिने जाने वाले Strait of Hormuz यानी होर्मुज़ जलडमरूमध्य का है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स नेवी यानी Islamic Revolutionary Guard Corps Navy ने दावा किया है कि अब इस पूरे इलाके की परिभाषा बदल दी गई है। ईरान का कहना है कि पहले जिस होर्मुज़ स्ट्रेट को सिर्फ कुछ द्वीपों और सीमित समुद्री हिस्से तक माना जाता था, अब उसे एक विशाल “स्ट्रैटेजिक ऑपरेशनल कॉरिडोर” के तौर पर देखा जाएगा। साफ शब्दों में कहें तो ईरान अब इस पूरे समुद्री इलाके पर पहले से कहीं ज्यादा सैन्य निगरानी और कंट्रोल चाहता है।
छोटे रास्ते से ‘विशाल सैन्य कॉरिडोर’ तक
आईआरजीसी नेवी के राजनीतिक डिप्टी Mohammad Akbarzadeh ने ईरानी मीडिया से बातचीत में कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर पुरानी सोच अब खत्म हो चुकी है। पहले इसे सिर्फ Hormuz Island और Hengam Island जैसे द्वीपों के आसपास का सीमित समुद्री इलाका माना जाता था, लेकिन अब इसकी सीमा कई गुना बढ़ा दी गई है। ईरान के मुताबिक अब यह ऑपरेशनल एरिया Jask और Sirik से लेकर Qeshm Island और Greater Tunb के आगे तक फैला हुआ माना जाएगा। यानी पहले जहां यह इलाका करीब 20 से 30 मील तक माना जाता था, अब ईरान इसे करीब 200 से 300 मील यानी लगभग 500 किलोमीटर चौड़ा “मिलिट्री ऑपरेशन ज़ोन” बता रहा है। ईरानी अधिकारियों ने इसे “पूरा क्रिसेंट” यानी अर्धचंद्राकार सुरक्षा क्षेत्र बताया है।
दुनिया की तेल सप्लाई की लाइफलाइन है होर्मुज़
होर्मुज़ स्ट्रेट सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की तेल सप्लाई की नस माना जाता है। खाड़ी देशों का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से तेल और गैस दुनिया तक पहुंचाता है। ऐसे में अगर यहां तनाव बढ़ता है, तो उसका असर सीधे ग्लोबल ऑयल मार्केट और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। इसी वजह से ईरान की तरफ से आई यह नई घोषणा सिर्फ एक सैन्य बयान नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए बड़ा भू-राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है।
ईरान का सीधा संदेश – एक इंच भी नहीं छोड़ेंगे
आईआरजीसी अधिकारी ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि ईरान अपनी समुद्री सीमाओं और हितों पर किसी भी तरह की घुसपैठ बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि ईरानी सेना हर गतिविधि पर “पूरी ताकत और अधिकार” के साथ नजर रख रही है।
उन्होंने दो टूक कहा – “हम खून दे देंगे, लेकिन अपनी जमीन और पानी का एक इंच भी नहीं छोड़ेंगे।”
ईरान का कहना है कि उसकी सशस्त्र सेनाएं देश की समुद्री सीमा और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए हर स्तर पर तैयार हैं।
अब जहाजों के लिए नया नियम लागू करेगा ईना?
ईरान ने इस पूरे इलाके में समुद्री आवाजाही को लेकर भी सख्त संकेत दिए हैं। आईआरजीसी ने दावा किया है कि होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए अब “सुरक्षित रास्ता” वही होगा जिसे इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान तय करेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक अगर कोई जहाज तय किए गए कॉरिडोर से हटता है, तो उसके खिलाफ “निर्णायक कार्रवाई” की चेतावनी भी दी गई है। यानी आने वाले दिनों में इस समुद्री रास्ते पर ईरान का कंट्रोल और ज्यादा आक्रामक रूप में दिखाई दे सकता है।
अमेरिका और इज़राइल के साथ बढ़ते तनाव के बीच बड़ा कदम
ईरान की यह नई रणनीति ऐसे समय सामने आई है जब मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है। तेहरान पहले ही अमेरिका और इज़राइल पर “गैरकानूनी आक्रामक युद्ध” छेड़ने का आरोप लगा चुका है। ईरान का दावा है कि मार्च से उसने उन जहाजों की आवाजाही सीमित करनी शुरू कर दी थी जिन्हें वह “दुश्मन समर्थित” मानता है। वहीं पिछले महीने अमेरिका की अगुवाई में ईरानी बंदरगाहों पर कथित नाकेबंदी के बाद इन कदमों को और सख्त किया गया। तेहरान ने अमेरिकी कार्रवाई को “समुद्री डकैती” तक करार दिया था। अब होर्मुज़ स्ट्रेट को 500 किलोमीटर तक फैलाए गए ऑपरेशनल ज़ोन के तौर पर पेश करना उसी रणनीति का अगला बड़ा कदम माना जा रहा है।
क्या दुनिया के लिए बढ़ने वाला है नया खतरा?
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अगर होर्मुज़ स्ट्रेट में सैन्य तनाव और बढ़ा, तो इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। दुनिया की ऊर्जा सप्लाई, तेल की कीमतें और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग सीधे प्रभावित हो सकती हैं। ईरान की यह नई समुद्री परिभाषा साफ दिखाती है कि तेहरान अब सिर्फ अपनी सीमाओं की रक्षा की बात नहीं कर रहा, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र में अपनी रणनीतिक पकड़ और मजबूत करना चाहता है।

















