भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी बल्लेबाज अजींक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। उनके इस फैसले के बाद उनके पूर्व कोच प्रवीण आमरे ने रहाणे के करियर को याद करते हुए उनकी बल्लेबाजी, नेतृत्व क्षमता और शांत स्वभाव की जमकर तारीफ की। आमरे ने कहा कि रहाणे हमेशा ऐसे खिलाड़ी रहे, जिन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में टीम की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई और शानदार प्रदर्शन किया।

भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी बल्लेबाज अजींक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। उनके इस फैसले के बाद उनके पूर्व कोच प्रवीण आमरे ने रहाणे के करियर को याद करते हुए उनकी बल्लेबाजी, नेतृत्व क्षमता और शांत स्वभाव की जमकर तारीफ की। आमरे ने कहा कि रहाणे हमेशा ऐसे खिलाड़ी रहे, जिन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में टीम की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई और शानदार प्रदर्शन किया।

प्रवीण आमरे ने साल 2020-21 के ऑस्ट्रेलिया दौरे को याद करते हुए कहा कि एडिलेड टेस्ट में भारत के सिर्फ 36 रन पर ऑलआउट होने के बाद टीम का मनोबल पूरी तरह टूट चुका था। ऐसे मुश्किल समय में अजींक्य रहाणे ने मेलबर्न टेस्ट में शानदार शतक लगाया और कप्तान के रूप में टीम का नेतृत्व करते हुए भारत को जीत दिलाई। आमरे के अनुसार, यही एक महान बल्लेबाज और बेहतरीन कप्तान की पहचान होती है कि वह कठिन समय में आगे बढ़कर टीम को संभाले।
अपने पूर्व शिष्य की तारीफ करते हुए प्रवीण आमरे ने कहा कि अजींक्य रहाणे हमेशा एक 'साइलेंट वॉरियर' रहे। उन्होंने कभी ज्यादा शोर नहीं मचाया, लेकिन जब भी टीम को उनकी जरूरत पड़ी, उन्होंने जिम्मेदारी के साथ प्रदर्शन किया। आमरे ने कहा कि रहाणे का स्वभाव शुरू से ही ऐसा था कि वह टीम को खुद से पहले रखते थे और यही बात उन्हें एक खास खिलाड़ी बनाती है।

आमरे ने रहाणे के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि उन्होंने मुंबई की ओर से अपने फर्स्ट क्लास करियर की शुरुआत पाकिस्तान के कराची में की थी। अपने पहले ही मैच में रहाणे ने शानदार शतक लगाया था। उसी समय उन्हें महसूस हो गया था कि यह खिलाड़ी भविष्य में भारत के लिए जरूर खेलेगा और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बड़ा नाम बनाएगा।
प्रवीण आमरे ने साल 2014 के इंग्लैंड दौरे पर लॉर्ड्स टेस्ट में लगाए गए रहाणे के शानदार शतक को भी उनके करियर की सबसे बेहतरीन पारियों में शामिल किया। उन्होंने कहा कि लॉर्ड्स जैसे ऐतिहासिक मैदान पर मुश्किल परिस्थितियों में शतक लगाना किसी भी खिलाड़ी के लिए बेहद खास उपलब्धि होती है। रहाणे का नाम लॉर्ड्स के ऑनर्स बोर्ड पर दर्ज होना भारतीय क्रिकेट के लिए गर्व का पल था।
अजींक्य रहाणे के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में 2020-21 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी को माना जाता है। उस समय टीम इंडिया कई प्रमुख खिलाड़ियों की चोट से जूझ रही थी, लेकिन रहाणे ने कप्तानी संभालते हुए युवा खिलाड़ियों के साथ ऑस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर 2-1 से हराकर इतिहास रच दिया। क्रिकेट विशेषज्ञ आज भी इस सीरीज को भारतीय क्रिकेट की सबसे यादगार जीतों में गिनते हैं।

अजींक्य रहाणे ने साल 2011 में भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था। अपने 12 साल से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने भारत के लिए 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। अपनी शानदार बल्लेबाजी, शांत स्वभाव और जिम्मेदार कप्तानी की बदौलत उन्होंने भारतीय क्रिकेट में एक अलग पहचान बनाई।
अजींक्य रहाणे का अंतरराष्ट्रीय करियर केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने कई ऐसे यादगार मौके दिए जिन्हें भारतीय क्रिकेट प्रशंसक हमेशा याद रखेंगे। मुश्किल परिस्थितियों में टीम को संभालना, दबाव में शानदार प्रदर्शन करना और बिना किसी शोर-शराबे के अपनी जिम्मेदारी निभाना उनकी सबसे बड़ी पहचान रही। यही वजह है कि उनके पूर्व कोच प्रवीण आमरे ने उन्हें भारतीय क्रिकेट का एक सच्चा 'साइलेंट वॉरियर' बताया।