18 वर्षीय Shriya Lohia ने Motorsports में Gender Barriers, ट्रैक पर अपने अनुभव और महिलाओं के भविष्य को लेकर खुलकर बात की। जानिए उनकी प्रेरक कहानी।

मोटरस्पोर्ट्स की दुनिया में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, लेकिन रेसिंग अब भी काफी हद तक पुरुषों के दबदबे वाला खेल है। ऐसे माहौल में 18 वर्षीय Shriya Lohia ने अपनी पहचान बनाकर लैंगिक बाधाओं को चुनौती दी है।
भारत की पहली महिला F4 रेसर के रूप में पहचान बनाने वाली Shriya Lohia ने ‘We Women Want Conclave & Shakti Awards 2026’ में मोटरस्पोर्ट्स में मौजूद जेंडर बैरियर और अपने अनुभवों पर खुलकर बात की। इस कार्यक्रम का आयोजन ITV Network और The Sunday Guardian Foundation ने किया था।
Lohia ने बताया कि रेस ट्रैक पर उनकी क्षमता का आकलन उनके जेंडर के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, असली अंतर मेहनत और प्रदर्शन से तय होता है।

ITV Network के साथ बातचीत में Shriya Lohia ने मोटरस्पोर्ट्स में महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर अपनी राय रखी।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का जेंडर यह तय नहीं करता कि वह रेस ट्रैक पर या उसके बाहर कितना अच्छा प्रदर्शन कर सकता है। उनके अनुसार, मोटरस्पोर्ट्स में भी सबसे महत्वपूर्ण चीज उस व्यक्ति की मेहनत और क्षमता होनी चाहिए।
Lohia ने यह भी स्वीकार किया कि महिलाओं को लेकर नकारात्मक सोच रखने वाले लोग मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि महिला रेसर्स को कभी-कभी ऐसे लोगों की आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता है, जो बिना पूरी स्थिति समझे उनकी गलतियों के लिए जेंडर को जिम्मेदार ठहराते हैं।

Shriya Lohia ने महज नौ साल की उम्र में प्रतिस्पर्धी गो-कार्टिंग शुरू की थी। यानी 18 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते उन्होंने अपनी जिंदगी का लगभग आधा हिस्सा रेसिंग


