टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल से ठीक पहले टीम इंडिया के लिए एक बड़ी चिंता का नाम है, अभिषेक शर्मा। टूर्नामेंट में अब तक उनका प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा है। छह मुकाबलों में सिर्फ 80 रन, तीन बार शून्य पर आउट और केवल एक अर्धशतक – आंकड़े साफ...

टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल से ठीक पहले टीम इंडिया के लिए एक बड़ी चिंता का नाम है, अभिषेक शर्मा। टूर्नामेंट में अब तक उनका प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा है। छह मुकाबलों में सिर्फ 80 रन, तीन बार शून्य पर आउट और केवल एक अर्धशतक – आंकड़े साफ बता रहे हैं कि युवा सलामी बल्लेबाज़ अपनी लय से दूर हैं। वेस्टइंडीज़ के खिलाफ सुपर 8 के अहम मुकाबले में, जो लगभग नॉकआउट जैसा था, अभिषेक सिर्फ 10 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। 197 रनों के बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए उनका जल्दी आउट होना भारतीय पारी को बैकफुट पर ले गया। कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेले गए इस मैच में टीम को तेज शुरुआत की जरूरत थी, लेकिन वह मिल नहीं सकी।
अभिषेक ने बहुत कम समय में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी पहचान बना ली है। वह फिलहाल टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में नंबर-1 बल्लेबाज़ हैं, और वो भी बड़े अंतर से। लेकिन बड़े टूर्नामेंट में सिर्फ रैंकिंग नहीं, प्रदर्शन मायने रखता है। इस विश्व कप में उनका सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। टूर्नामेंट की शुरुआत से पहले पेट के संक्रमण ने उनकी तैयारी प्रभावित की और वह नामीबिया के खिलाफ मैच नहीं खेल सके। वापसी के बाद भी वह लय हासिल नहीं कर पाए।
पहले चार मैचों में उन्होंने सिर्फ 15 रन बनाए, जिसमें तीन बार शून्य पर आउट होना शामिल था। हालांकि जिम्बाब्वे के खिलाफ 30 गेंदों में 55 रनों की तूफानी पारी ने उम्मीद जगाई थी कि अब वह रफ्तार पकड़ चुके हैं। लेकिन वेस्टइंडीज़ के खिलाफ फिर से कम स्कोर ने उनकी निरंतरता पर सवाल खड़े कर दिए।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर मनोज तिवारी ने अभिषेक की बल्लेबाज़ी पर खुलकर बात की। क्रिकबज़ पर बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि समस्या तकनीक से ज्यादा मानसिकता की है। तिवारी के मुताबिक, जब कोई बल्लेबाज़ अपने विकेट की कीमत नहीं समझता, तो वह ढीले शॉट खेलता है और वही अभिषेक के साथ हो रहा है। उन्होंने साफ कहा कि स्टार बनना आसान है, लेकिन सुपरस्टार बनने के लिए मैच जिताने पड़ते हैं। तिवारी ने यह भी जोड़ा कि टीम मैनेजमेंट उन पर भरोसा जता रहा है और उन्हें खुलकर खेलने की आजादी दी गई है।
लेकिन इस आजादी के साथ जिम्मेदारी भी आती है। वेस्टइंडीज़ मैच को उन्होंने अभिषेक के लिए बड़ा मौका बताया, जो एक “ऑफ डे” में बदल गया। सिर्फ बल्लेबाज़ी ही नहीं, फील्डिंग में भी वह उस दिन प्रभाव नहीं छोड़ पाए और दो कैच छोड़ दिए। तिवारी का मानना है कि दबाव की स्थिति में बल्लेबाज़ को यह समझना जरूरी है कि कौन सी गेंद पर अटैक करना है और किसे सम्मान देना है।
पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान ने भी अभिषेक की फॉर्म को लेकर चिंता जताई। अपने यूट्यूब चैनल पर उन्होंने कहा कि तकनीकी सुधार की जरूरत है। पठान ने बताया कि जिस शॉट पर वह आउट हुए, उसमें उनका बैक नी (पिछला घुटना) जरूरत से ज्यादा मुड़ गया था और शरीर का वजन पीछे की ओर जा रहा था। उनके मुताबिक, अभिषेक की बल्लेबाज़ी तब ज्यादा प्रभावी होती है जब उनका वजन फ्रंट फुट पर रहता है। सेमीफाइनल जैसे बड़े मुकाबले से पहले उन्हें इस पहलू पर खास ध्यान देना होगा।
सेमीफाइनल से पहले टीम इंडिया के सामने सवाल यह है कि क्या अभिषेक अपनी स्वाभाविक आक्रामकता और समझदारी के बीच संतुलन बना पाएंगे? प्रतिभा में कोई कमी नहीं है, लेकिन बड़े मंच पर निरंतरता ही असली पहचान बनाती है। अभी भी टीम मैनेजमेंट का भरोसा उनके साथ है और शायद यही भरोसा उन्हें वापसी की ताकत दे। अगर वह सही मानसिकता और बेहतर शॉट चयन के साथ मैदान पर उतरते हैं, तो एक बड़ी पारी सब कुछ बदल सकती है। सेमीफाइनल में भारत को सिर्फ एक स्टार नहीं, बल्कि मैच विनर की जरूरत होगी, और अब बारी अभिषेक शर्मा की है कि वह इस चुनौती को कैसे स्वीकार करते हैं।