खंडवा में आवारा कुत्तों के खिलाफ अनोखा प्रदर्शन हुआ। कुत्ते की ड्रेस में व्यक्ति जनसुनवाई पहुंचा। 3,168 नसबंदियों और ₹33.20 लाख खर्च के आंकड़ों पर सवाल उठे।

मध्य प्रदेश के खंडवा शहर में आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर एक अनोखा प्रदर्शन चर्चा का विषय बन गया। नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष मुल्लू राठौर एक व्यक्ति को कुत्ते का कॉस्ट्यूम पहनाकर कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में पहुंचे।
प्रतीकात्मक प्रदर्शन को देखकर जनसुनवाई परिसर में मौजूद लोगों का ध्यान इस ओर गया। कई लोग अपनी समस्याओं के साथ पहुंचे थे, लेकिन कुत्ते की वेशभूषा में मौजूद व्यक्ति की तस्वीरें और वीडियो बनाने लगे।
नेता प्रतिपक्ष का कहना था कि इस प्रदर्शन के जरिए प्रशासन का ध्यान खंडवा में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या और नगर निगम की कार्यप्रणाली की ओर आकर्षित करना है।
मुल्लू राठौर ने आवारा कुत्तों के मुद्दे को प्रशासन के सामने अलग तरीके से रखने के लिए यह प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि शहर के कई इलाकों में आवारा कुत्तों की संख्या और उनके कारण होने वाली परेशानी लगातार बनी हुई है।
उनके मुताबिक बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों में आवारा कुत्तों को लेकर डर का माहौल है। उन्होंने प्रशासन से समस्या के प्रभावी समाधान और नगर निगम की कार्रवाई की समीक्षा की मांग की।
नेता प्रतिपक्ष ने नगर निगम के उपलब्ध आंकड़ों का हवाला देते हुए नसबंदी अभियान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
उनके अनुसार, वर्ष 2024 में 3,168 कुत्तों की नसबंदी किए जाने का दावा नगर निगम की ओर से किया गया था। इसके लिए निगम के कोष से लगभग ₹33.20 लाख खर्च होने की बात कही गई।
इन आंकड़ों के आधार पर एक कुत्ते की नसबंदी पर औसत खर्च करीब ₹1,048 बैठता है।
हालांकि, यह आंकड़े और उनसे जुड़े आरोप प्रदर्शनकारी नेता प्रतिपक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए हैं। नगर निगम या संबंधित अधिकारियों का पक्ष इस उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।
राठौर ने सवाल उठाया कि अगर हजारों कुत्तों की नसबंदी वास्तव में की गई है, तो शहर के अलग-अलग वार्डों और मोहल्लों में आवारा कुत्तों की समस्या कम क्यों नहीं दिखाई दे रही।
उन्होंने नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर नसबंदी के नाम पर कथित फर्जीवाड़े का आरोप लगाया। उनका दावा है कि वेबसाइट पर आंकड़े दर्ज करने भर से जमीनी स्थिति नहीं बदल रही है।
हालांकि, नसबंदी में फर्जीवाड़े का आरोप अभी आरोप ही है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। इस मामले में नगर निगम या प्रशासन की ओर से विस्तृत जवाब सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।
प्रदर्शन के दौरान यह भी सवाल उठाया गया कि वर्ष 2025 के नसबंदी संबंधी आंकड़े अब तक स्पष्ट रूप से सार्वजनिक क्यों नहीं किए गए हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने प्रशासन से नसबंदी अभियान की संख्या, खर्च और वास्तविक परिणामों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सरकारी राशि का इस्तेमाल किस तरह हुआ और अभियान का जमीनी असर क्या रहा।
अपर कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में नेता प्रतिपक्ष ने एक और गंभीर आंकड़ा सामने रखा।
ज्ञापन के अनुसार, पिछले चार वर्षों में खंडवा में करीब 13,225 लोग कुत्तों के काटने के बाद अस्पताल पहुंचे। इस आंकड़े का इस्तेमाल आवारा कुत्तों की समस्या की गंभीरता बताने के लिए किया गया।
यदि यह आंकड़ा आधिकारिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड से पुष्ट होता है, तो यह शहर में डॉग बाइट की समस्या के पैमाने को समझने में महत्वपूर्ण हो सकता है। उपलब्ध जानकारी में इस आंकड़े का विस्तृत स्रोत या वर्षवार विभाजन नहीं दिया गया है।
नेता प्रतिपक्ष के मुताबिक आवारा कुत्तों की वजह से शहर में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के बीच असुरक्षा की स्थिति बनी हुई है।
स्थानीय स्तर पर ऐसी शिकायतों का संबंध आम तौर पर रात में आवाजाही, गलियों और रिहायशी इलाकों में कुत्तों के झुंड तथा अचानक हमले के डर से जोड़ा जाता है। खंडवा में प्रदर्शन के जरिए इसी चिंता को प्रशासन के सामने प्रमुखता से उठाया गया।
इस मामले में मुख्य सवाल केवल आवारा कुत्तों की संख्या का नहीं है। प्रशासन के सामने नसबंदी अभियान की वास्तविक प्रगति, खर्च, पकड़े गए और छोड़े गए कुत्तों की संख्या तथा डॉग बाइट के आधिकारिक आंकड़ों को एक साथ देखने की चुनौती है।
यदि नसबंदी के आंकड़े सही हैं, तो उनके जमीनी प्रभाव का आकलन करना भी जरूरी होगा। वहीं, यदि आंकड़ों में कोई विसंगति है, तो उसकी जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि सरकारी योजना के क्रियान्वयन में कहां समस्या आई।
फिलहाल, खंडवा में आवारा कुत्तों को लेकर किया गया यह अनोखा प्रदर्शन शहर की एक गंभीर नागरिक समस्या को राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा के केंद्र में ले आया है।