मध्य प्रदेश में करीब दो दशक बाद सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का नया मॉडल लागू करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में Passenger Transport Vision Summit 2026 का उद्घाटन करते हुए 2030 तक प्रदेश में करीब 15,000 नई बसें शुरू करने की योजना की जानकारी दी।

मध्य प्रदेश में करीब दो दशक बाद सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का नया मॉडल लागू करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में Passenger Transport Vision Summit 2026 का उद्घाटन करते हुए 2030 तक प्रदेश में करीब 15,000 नई बसें शुरू करने की योजना की जानकारी दी।
सरकार का प्रस्तावित नया मॉडल तकनीक आधारित होगा, जिसमें डिजिटल सिस्टम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल टिकटिंग, निजी बस ऑपरेटरों की भागीदारी और ग्रीन मोबिलिटी पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसका लक्ष्य प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुविधाजनक, तेज, सुरक्षित और यात्री-केंद्रित बनाना है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने समिट को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन की बढ़ती जरूरत का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राज्य में 5 लाख किलोमीटर से अधिक का सड़क नेटवर्क है, जो शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों को आपस में जोड़ता है।
राज्य में धार्मिक पर्यटन के तेजी से बढ़ने के कारण भी यात्री परिवहन की मांग में बड़ा बदलाव आया है। खासतौर पर उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, उज्जैन में पहले हर साल करीब 60 से 70 लाख श्रद्धालु आते थे, जबकि हाल के समय में यह संख्या बढ़कर 8 करोड़ से अधिक हो गई है। यात्रियों और पर्यटकों की इस बढ़ती आवाजाही को देखते हुए राज्य में मजबूत और प्रभावी सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क की जरूरत और बढ़ गई है।
समिट में सबसे अहम घोषणाओं में से एक मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के विस्तार से जुड़ी है।
राज्य सरकार ने 2030 तक मध्य प्रदेश में लगभग 15,000 नई बसें संचालित करने का रोडमैप तैयार किया है। इस योजना में निजी बस ऑपरेटरों की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी।
सरकार निजी क्षेत्र को परिवहन व्यवस्था से जोड़ने के साथ-साथ बस सेवाओं में आधुनिक तकनीक और डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है।
इससे राज्य के शहरों के साथ-साथ छोटे कस्बों और अन्य क्षेत्रों में बस कनेक्टिविटी बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री के ऐलान के मुताबिक नए परिवहन मॉडल के तहत पहली बड़ी पहल सेवा संकल्प माह के दौरान शुरू करने की योजना है। सेवा संकल्प माह 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक प्रस्तावित है।
नए मॉडल के तहत पहली आधिकारिक सेवा या पहल को 25 सितंबर को प्रदेश के लोगों के सामने पेश किए जाने की उम्मीद है।
सरकार इसे मध्य प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के नए चरण के तौर पर देख रही है, जिसमें ज्यादा बसों के साथ यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
मध्य प्रदेश के नए परिवहन मॉडल में ग्रीन मोबिलिटी को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
राज्य में इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण का इकोसिस्टम विकसित हो रहा है। सरकार इसी क्षमता का इस्तेमाल सार्वजनिक परिवहन में क्लीन एनर्जी आधारित वाहनों की संख्या बढ़ाने के लिए करना चाहती है।
इंदौर में मेट्रो सेवाओं के विस्तार के बाद अब सरकार इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन और फ्लेक्स-फ्यूल बसों के इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी ध्यान दे रही है।
इन बसों के जरिए पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने और शहरी तथा इंटर-सिटी परिवहन को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाने का लक्ष्य है।
नई यात्री परिवहन पहल के तहत आधुनिक सुविधाओं से लैस पारंपरिक भगवा रंग की बसों को दोबारा सड़कों पर उतारने की योजना के संकेत भी सरकार की ओर से दिए गए हैं।
Madhya Pradesh Mobility Vision 2030 में तकनीक और डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया को महत्वपूर्ण भूमिका दी जा रही है।
Passenger Transport Vision Summit में AI आधारित रूट प्लानिंग, डिजिटल टिकटिंग, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप और ग्रीन मोबिलिटी समेत आठ प्रमुख विषयों पर चर्चा हो रही है।
AI और यात्री डेटा के जरिए यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि किस इलाके में कितने यात्रियों की जरूरत है। इसके आधार पर बस रूट, बसों की संख्या और टाइमटेबल को बेहतर तरीके से तैयार किया जा सकता है।
इससे ज्यादा यात्री वाले रूट पर अतिरिक्त बसें उपलब्ध कराने और कम मांग वाले रूट पर संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है।
नए परिवहन मॉडल में डिजिटल टिकटिंग को भी बढ़ावा देने की योजना है। डिजिटल टिकटिंग से यात्रियों के लिए टिकट खरीदना आसान हो सकता है और किराया संग्रह की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जा सकता है।
सरकार के ‘One State, One Journey’ विजन के तहत अलग-अलग सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के बीच एकीकृत टिकटिंग व्यवस्था विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
अगर यह व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू होती है, तो यात्रियों को अलग-अलग सेवाओं के लिए बार-बार टिकट लेने की परेशानी कम हो सकती है।
सार्वजनिक परिवहन का विस्तार करने के साथ सरकार इसे आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने पर भी जोर दे रही है।
प्रस्तावित मॉडल में निजी ऑपरेटरों की भागीदारी, आधुनिक फ्लीट मैनेजमेंट और तकनीक आधारित संचालन को शामिल किया जा रहा है। इससे सरकार पर पारंपरिक सार्वजनिक क्षेत्र के संचालन का पूरा वित्तीय बोझ कम करने और परिवहन सेवाओं को मांग के अनुसार संचालित करने में मदद मिल सकती है।
समिट में सरकार, निजी बस ऑपरेटरों, तकनीकी कंपनियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधि संभावित निवेश और संचालन मॉडल पर चर्चा कर रहे हैं।
Passenger Transport Vision Summit 2026 में सार्वजनिक परिवहन के भविष्य से जुड़े आठ प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा की जा रही है:
इन सभी क्षेत्रों का उद्देश्य ऐसी परिवहन व्यवस्था तैयार करना है, जो आधुनिक तकनीक से लैस होने के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल और यात्रियों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप हो।
अगर सरकार की योजना निर्धारित समय के अनुसार लागू होती है, तो 2030 तक मध्य प्रदेश में बस कनेक्टिविटी में बड़ा विस्तार देखने को मिल सकता है।
15 हजार नई बसें, डिजिटल टिकटिंग, AI आधारित रूट प्लानिंग और इलेक्ट्रिक-हाइड्रोजन जैसी क्लीन टेक्नोलॉजी के संयोजन से यात्रियों को अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने की कोशिश होगी।
हालांकि, योजना की सफलता सिर्फ घोषणाओं पर नहीं बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। पर्याप्त संख्या में बसों की उपलब्धता, चार्जिंग और रिफ्यूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, निजी ऑपरेटरों की भागीदारी और पूरे प्रदेश में सेवा की गुणवत्ता बनाए रखना बड़ी चुनौतियां होंगी।
फिलहाल सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है—2030 तक मध्य प्रदेश के सार्वजनिक परिवहन को अधिक स्मार्ट, सुरक्षित, पर्यावरण-अनुकूल और यात्री-केंद्रित बनाना। आने वाले समय में इस योजना के तहत शुरू होने वाली सेवाओं से पता चलेगा कि नया मॉडल यात्रियों की रोजमर्रा की यात्रा को कितना आसान बना पाता है।