
नवरात्रि शुरू होते ही कई लोग नौ दिनों तक व्रत रखते हैं। इस दौरान पूजा-पाठ के साथ खान-पान का भी खास ध्यान रखा जाता है। लेकिन व्रत में रोज क्या बनाया जाए, यह सोचकर कई बार परेशानी होने लगती है। हर दिन साबूदाना खिचड़ी या आलू खाकर भी आखिर कितने दिन निकालें।
व्रत में खाना थोड़ा अलग जरूर होता है, लेकिन ऐसा नहीं है कि आपके पास खाने के विकल्प कम हैं। फल, दूध, दही, मखाना, कुट्टू, सिंघाड़ा और समा के चावल जैसी चीजों से आप आसानी से अलग-अलग तरह का खाना बना सकते हैं।
अगर आप इस नवरात्रि व्रत रखने वाली हैं, तो सुबह से रात तक अपने खाने को कुछ इस तरह रख सकती हैं।
सुबह उठते ही एकदम से चाय या कुछ भारी खाने की बजाय पहले पानी पीना अच्छा रहता है। इसके बाद आप कोई मौसमी फल ले सकती हैं। केला, सेब, पपीता या संतरा जैसे फल आसानी से खाए जा सकते हैं।
अगर सिर्फ फल खाने से आपको जल्दी भूख लग जाती है, तो दूध के साथ कुछ बादाम या अखरोट ले सकती हैं। इससे पेट भी कुछ देर तक भरा रहेगा और दिन की शुरुआत भी ठीक से हो जाएगी।
नाश्ते में रोज एक ही चीज खाने की जरूरत नहीं है। जिस दिन मन करे साबूदाना खिचड़ी बना लें और दूसरे दिन मखाने की हल्की सी डिश या कुट्टू का चीला बना सकती हैं।
नाश्ते में आप ये चीजें ले सकती हैं:
साबूदाना खिचड़ी बनाते समय तेल या घी बहुत ज्यादा डालने की जरूरत नहीं है। थोड़ी मूंगफली डालकर भी इसका स्वाद अच्छा आता है और पेट भी भरा रहता है।
दोपहर तक अक्सर भूख अच्छी लगने लगती है, इसलिए इस समय सिर्फ फल खाकर रहने की बजाय ठीक से खाना खा लेना बेहतर है।
अगर आपके व्रत में अनाज नहीं खाया जाता, तो कुट्टू या सिंघाड़े के आटे की रोटी बना सकती हैं। इसके साथ आलू की सब्जी और दही लिया जा सकता है। अगर रोटी खाने का मन नहीं है, तो समा के चावल की खिचड़ी भी बना सकती हैं।
दोपहर के खाने में एक साथ बहुत सारी तली हुई चीजें खाने से बचें। व्रत के नाम पर ज्यादा घी-तेल वाला खाना खाने से कई लोगों को पेट भारी लगने लगता है।
शाम के समय चाय के साथ कुछ खाने का मन होना बिल्कुल आम बात है। इस समय अगर आप बहुत ज्यादा तली हुई चीजें खाएंगी तो रात के खाने तक पेट भारी रह सकता है।
इसके बजाय थोड़ा भुना हुआ मखाना, कोई फल, थोड़े से मेवे या दही ले सकती हैं।
अगर आपको चाय पीने की आदत है तो कम चीनी वाली चाय ले सकती हैं, लेकिन यह आपके व्रत के नियमों पर निर्भर करता है। हर घर में व्रत के नियम थोड़े अलग होते हैं।
रात के खाने में बहुत ज्यादा भारी खाना खाने की जरूरत नहीं है। दिनभर व्रत रखने के बाद भी ऐसा खाना लें जो आसानी से पच सके।
आप रात में समा के चावल की खिचड़ी, कुट्टू की रोटी, सिंघाड़े का चीला या दही के साथ कोई हल्की फलाहार वाली डिश ले सकती हैं।
अगर दिनभर आपने काफी कम खाया है तो रात में सिर्फ फल खाकर सोने की बजाय थोड़ा भरपेट खाना बेहतर रहेगा।
व्रत में कई लोग खाने पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन पानी पीना भूल जाते हैं। खासकर अगर आप ऑफिस जाती हैं या दिनभर घर के काम में व्यस्त रहती हैं तो ऐसा हो सकता है।
इसलिए पूरे दिन थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें। अगर आपके व्रत में दूध या दूसरे पेय लेने की अनुमति है, तो उन्हें भी अपनी जरूरत के हिसाब से लिया जा सकता है।
बिल्कुल नहीं। व्रत में खाने के कई विकल्प मौजूद हैं। आप अपनी पसंद के हिसाब से फल, दूध, दही, मखाना, कुट्टू, सिंघाड़ा और समा के चावल को अलग-अलग तरह से बना सकती हैं।
बस एक बात का ध्यान रखें कि व्रत में मिलने वाली चीजों को देखकर जरूरत से ज्यादा न खाएं। साबूदाना खिचड़ी, कुट्टू की पूरी और आलू की सब्जी व्रत में आम हैं, लेकिन इन्हें बहुत ज्यादा तेल में बनाकर खाने से भोजन भारी हो सकता है।
अगर आपको रोज-रोज यह सोचने में परेशानी हो रही है कि क्या खाना है, तो एक दिन का आसान प्लान इस तरह रख सकती हैं:
सुबह: पानी + फल
नाश्ता: साबूदाना खिचड़ी या दूध के साथ मखाना
दोपहर: कुट्टू की रोटी + सब्जी + दही
शाम: फल या भुना हुआ मखाना
रात: समा के चावल की खिचड़ी या सिंघाड़े का चीला
आप अपनी भूख और दिनभर के काम के हिसाब से खाने की मात्रा कम-ज्यादा कर सकती हैं।
व्रत रखना आस्था से जुड़ी बात है, लेकिन इस दौरान अपनी सेहत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर आपको बहुत ज्यादा कमजोरी, चक्कर या किसी तरह की परेशानी महसूस हो रही है तो उसे नजरअंदाज न करें।
अगर आप पहले से किसी बीमारी की दवा ले रही हैं, गर्भवती हैं या लंबे समय तक खाली पेट रहने से परेशानी होती है, तो व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर रहेगा।
नवरात्रि में पूजा और व्रत के साथ अगर खाने-पीने का थोड़ा ध्यान रखा जाए तो इन नौ दिनों में कमजोरी महसूस होने की संभावना कम हो सकती है। आखिर व्रत का मतलब सिर्फ खाना छोड़ना नहीं, बल्कि अपनी आस्था के साथ खुद का भी ध्यान रखना है।